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Siddharthnagar News: इलाज के इंतजाम के बीच बीमारियों का ठिकाना

Thu, 10 Sep 2026 11:16 PM IST
गोरखपुर ब्यूरो संवाद न्यूज एजेंसी, सिद्धार्थनगर
संवाद न्यूज एजेंसी, सिद्धार्थनगर Updated Thu, 10 Sep 2026 11:16 PM IST
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Siddharthnagar News: A breeding ground for diseases amidst medical treatment facilities
सिद्धार्थनगर। जिले में जहां मरीजों को बीमारी से निजात दिलाने के लिए इलाज होता है, उसी मेडिकल कॉलेज परिसर में फैली गंदगी और जलभराव से बीमारी का खतरा बढ़ है। माधव प्रसाद त्रिपाठी मेडिकल कॉलेज में पुरानी बिल्डिंग, महिला अस्पताल और नए भवन के आसपास गंदा पानी भरा है। इसे तेज दुर्गंध उठ रही है और उसमें मच्छर पनप रहे हैं।
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बृहस्पतिवार को मेडिकल कॉलेज परिसर में स्वच्छता व्यवस्था की पड़ताल की गई तो कई जगह सफाई व्यवस्था की यह हकीकत सामने आई।
टीम कॉलेज परिसर में पहुंची तो जलभराव और समस्याएं नजर आई। सबसे खराब स्थिति पुराने भवन से महिला अस्पताल जाने वाली गैलरी की थी। गैलरी के दोनों ओर लंबे हिस्से में गंदा पानी भरा दिखा।
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कई जगह भवन की नींव तक पानी में डूबी नजर आ रही थी। इसी रास्ते से महिला अस्पताल, नए भवन और ब्लड बैंक की ओर मरीजों और तीमारदारों की आवाजाही होती है। मजबूरी में लोग गंदे पानी और दुर्गंध के बीच से होकर गुजर रहे हैं। कुछ महिलाएं तो रास्ते से गुजरते समय मुंह पर साड़ी रखती दिखाई दीं।
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वहां एक स्टाफ से पूछने पर उसने बताया कि मेडिकल कॉलेज परिसर में जल निकासी की समुचित व्यवस्था नहीं होने से यह समस्या लंबे समय से बनी हुई है। बारिश के दौरान स्थिति और गंभीर हो जाती है। बारिश का पानी तो बाद में निकल जाता है लेकिन कई स्थानों पर गंदा पानी लंबे समय तक भरा रहता है। पानी सड़ने से दुर्गंध और मच्छरों की समस्या बढ़ती जाती है। अस्पताल के अंदर सफाई व्यवस्था अच्छी है लेकिन भवनों के बीच भरे गंदे पानी की ओर पर्याप्त ध्यान नहीं दिया जा रहा है। ऐसे में अस्पताल परिसर में संक्रमण से बचाव के इंतजामों पर भी सवाल खड़े हो रहे हैं।
शाम होते ही मच्छरों का प्रकोप : मेडिकल कॉलेज के दक्षिणी हिस्से में भी जलभराव की स्थिति देखने को मिली। ब्लड बैंक और महिला अस्पताल के आसपास भरा पानी में मच्छर पनप रहे हैं। स्थानीय लोगों के अनुसार दिन में स्थिति कुछ सामान्य रहती है लेकिन शाम होते ही मच्छरों का प्रकोप बढ़ जाता है।
मौके पर मिले स्थानीय निवासी रमेश ने बताया कि वह अपनी बेटी का इलाज कराने के लिए दो दिन से मेडिकल कॉलेज आ रहे हैं। उन्होंने कहा कि शाम के समय ब्लड बैंक और महिला अस्पताल के सामने बैठना मुश्किल हो जाता है। गनीमत है कि पुराने भवन में संचालित होने वाला जनरल वार्ड पहले ही बंद हो चुका है। अगर वहां मरीज भर्ती रहते तो परेशानी और अधिक होती।

नालियों का जाल, फिर भी पानी की निकासी नहीं : मेडिकल कॉलेज बनने के बाद परिसर के अलग-अलग भवनों की नालियों से जोड़ा गया है। नालियों का निर्माण लगातार कराया जा रहा है। इसके लिए लाखों रुपये खर्च किए जा रहे हैं। बावजूद इसके परिसर में जलभराव की समस्या खत्म नहीं हो पा रही है। मेडिकल कॉलेज के एक कर्मचारी ने बताया कि परिसर में नालियों का जाल तो बिछा दिया गया है लेकिन कई जगह नालियों का सेंटर आपस में नहीं मिलाया गया है। ि
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