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Siddharthnagar News: 15 क्विंटल मिलावटी मिठाई पकड़ी, इससे ज्यादा खप गई बाजार में

Fri, 17 Oct 2025 11:45 PM IST
गोरखपुर ब्यूरो संवाद न्यूज एजेंसी, सिद्धार्थनगर
संवाद न्यूज एजेंसी, सिद्धार्थनगर Updated Fri, 17 Oct 2025 11:45 PM IST
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Siddharthnagar News: 15 quintals of adulterated sweets seized, more than this was consumed in the market
शहर की दुकान में सजा हुआ मिठाई
सिद्धार्थनगर। चखने में स्वाद अच्छा है, महक भी अच्छी है और देखने में भी बिल्कुल बेहतरीन। अगर आप भी मिठाई की परख ऐसे ही करते हैं तो सतर्क हो जाएं। बाजार में धंधेबाजों ने विभिन्न प्रकार की आकर्षक दिखने वाली करोड़ों की मिलावटी मिठाई बाजार में बिकने लगीं हैं।
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खराब क्वालिटी के तेल, पाउडर वाले केमिकल के दूध में तैयार इन मिठाइयों को खपाने के लिए बाजारों तक पहुंचाया जा चुका है। एक सप्ताह में खाद्य सुरक्षा विभाग की टीम ने छापा मारकर ऐसी 15 क्विंटल से अधिक मिठाई को नष्ट कराने के साथ जांच के लिए सैंपल भेजा है, लेकिन इससे कहीं अधिक बाजार में उतारी जा चुकी है।
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केमिकल और रंग का प्रयोग होकर बनने वाली मिठाई सेहत के लिए बहुत ही घातक है। जो कई प्रकार की गंभीर बीमारी का शिकार बना सकती है। इसके सेवन से बचने की जरूरत है, ऐसा स्वास्थ्य विशेषज्ञ सलाह दे रहे हैं।
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बाजार में मिलावटी मिठाई की भरमार: हरियाणा में काफी दिनों तक मिठाई की दुकान पर काम करने वाले पप्पू ने बताया कि मिठाई में मिलावट बड़े पैमाने पर की जाती है। बताया कि मिलावटी घी, खोआ और छेना से बनी इन मिठाइयों को आकर्षक बनाने के लिए रंग, एल्युमिनियम वर्क और खुशबू के लिए एसेंस का इस्तेमाल किया गया है।
मिठाई के धंधेबाजों ने दीपावली के लिए महीने भर पहले सितंबर में ही करीब 10 करोड़ का मैदा, सूजी, बेसन, रिफाइंड ऑयल, घी, वनस्पति, शकरकंद का आटा समेत खोआ और मिठाई बनाने की सामग्री एकत्र कर लेते हैं। शहर समेत विभिन्न कस्बों में मिलाकर सौ से अधिक मिठाई के कारखाने संचालित हो रहे हैं। यहां बड़े पैमाने पर वनस्पति घी, रिफाइंड, कलर, विशेष किस्म के सेंट आदि के प्रयोग से मिठाई तैयार की जा रही है।
खाद्य सुरक्षा विभाग ने इन कारखानों में बनाई जा रही मिलावटी मिठाइयों का भंडाफोड़ अबतक नहीं कर सका है जबकि नामचीन एवं साधारण मिठाई की दुकानों के नमूने कई बार असुरक्षित एवं अधोमानक पाए गए हैं। नगर के ही परसा में खाद्य सुरक्षा विभाग की टीम ने परसा शाह आलम स्थित मिठाई निर्माण इकाई से एक लच्छा बर्फी, एक डोडा बर्फी, एक सूजी हलवा केक का नमूना संग्रहीत करते हुए 305 किलो लच्छा बर्फी, 161 किलो डोडा बर्फी सीज की तथा 200 किलो सूजी हलवा केक, 35 किलो डोडा बर्फी नष्ट कराया गया।
इन्हें विभिन्न प्रकार की मिलावटी सामग्री से तैयार किया जा रहा था। वहीं, जब स्थानीय लोगों से बात की गई तो पता चला कि यह कारखाना लंबे समय से चल रहा है। पिछले एक सप्ताह से दिन-रात चल रहा है। गाड़ियों में मिठाई लेकर दुकानदार जा रहे हैं। इसके अलावा भी शिवनगर डिडई आदि में छापा मारकर बड़ी मात्रा में पकड़ा गया है।
केमिकल वाले रंग से देते हैं सूबसूरती: कस्बे में मिठाई की दुकान पर काम करने वाले एक कारीगर ने बताया कि मिठाइयों को रंगीन बनाने के लिए लाल और पीले रंग के केमिकल वाले पाउडर का प्रयोग किया जा रहा है। लड्डू में बूंदी का इस्तेमाल हो रहा है। इसके साथ ही कई प्रकार की मिठाई में रंग डाला जा रहा है। खुशबू के लिए सेंट का इस्तेमाल करने से धंधेबाज परहेज नहीं कर रहे हैं। मौजूदा समय में घी, लड्डू और अन्य महंगी मिठाई में सेंट का प्रयोग होता है। इसके अलावा मिठाइयों को आकर्षक बनाने के लिए लगाया जाता है। त्योहार में यह आम हो गया है। क्योंकि, उसे देखकर लोग भागते हैं। अब तो चांदी की जगह एल्युमिनियम का वर्क लगाया जा रहा है। इसके अलावा लड्डू, रसगुल्ला आदि को बनाते के बाद पहले ऊपर से केवड़ा जल डाल दिया जाता है। इससे हल्की खुशबू आती थी।

तीसरे दिन मिठाई खराब होने लगती थी। अब इसकी जगह एसेंस की पुड़िया आती है। 20 ग्राम की पुड़िया 50 किलोग्राम लड्डू के लिए पर्याप्त होती है। इसमें अलग-अलग खुशबू वाला विकल्प होता है। वैसे इलाइची वाला सबसे अच्छा माना जाता है। क्योंकि इसके प्रयोग से मिठाई सात से आठ दिन तक ताजा जैसी दिखती है।
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