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Siddharthnagar News: 100 गणित शिक्षकों को दिया तकनीकी प्रशिक्षण
Wed, 09 Sep 2026 11:33 PM IST
गोरखपुर ब्यूरो
संवाद न्यूज एजेंसी, सिद्धार्थनगर
संवाद न्यूज एजेंसी, सिद्धार्थनगर
Updated Wed, 09 Sep 2026 11:33 PM IST
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- जिज्ञासा लैब के जरिए बच्चों में विकसित होगी प्रयोग और नवाचार की समझ
- संख्या पद्धति, अबेकस, पाइथागोरस प्रमेय समेत गणितीय अवधारणाओं को प्रयोग से समझाया
सिद्धार्थनगर। परिषदीय विद्यालयों में गणित और विज्ञान की पढ़ाई को तकनीकी और प्रयोगात्मक बनाने के लिए शिक्षकों को प्रशिक्षित किया जा रहा है। चयनित 100 उच्च प्राथमिक विद्यालयों के गणित शिक्षकों की दो दिवसीय कार्यशाला बुधवार को शुरू हुई। प्रशिक्षण में शिक्षकों को टीएलएम और डिजिटल संसाधनों के माध्यम से गणितीय अवधारणाओं को बच्चों को सरल तरीके से समझाने के तौर-तरीके बताए गए।
जनपद के 300 विद्यालयों में आरईसी फाउंडेशन के सीएसआर के तहत जिज्ञासा लैब और सौर ऊर्जा से संचालित स्मार्ट कक्ष स्थापित किए जाने हैं। इनमें 200 उच्च प्राथमिक विद्यालयों में जिज्ञासा लैब की स्थापना पूरी हो चुकी है। दूसरे चरण में चयनित 100 विद्यालयों के विज्ञान और गणित शिक्षकों को प्रशिक्षित किया जा रहा है। प्रशिक्षण का उद्देश्य कक्षा शिक्षण को रटने के बजाय प्रयोग और गतिविधियों से जोड़ना है।
कार्यशाला में बिहार के मोतिहारी से आए विषय विशेषज्ञ बाल्मीकि कुमार पांडेय ने शिक्षकों को गणित को सरल और रोचक बनाने के लिए शिक्षण सामग्री के प्रयोग की जानकारी दी। संख्या पद्धति, अबेकस के माध्यम से स्थानीय मान की समझ, जोड़, पाइथागोरस प्रमेय, कोण और त्रिभुज आदि विषयों को गतिविधियों के माध्यम से समझाया गया। क्षेत्रमिति से संबंधित आकृतियों के क्षेत्रफल और आयतन के सूत्रों को भी प्रयोगात्मक तरीके से निकालने का अभ्यास कराया गया।
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विशेषज्ञों ने शिक्षकों को जिज्ञासा लैब की उपयोगिता के बारे में जानकारी दी। बताया गया कि लैब का उद्देश्य बच्चों को नए विचारों को तलाशने, उनका परीक्षण करने और ‘करके सीखने’ के लिए प्रोत्साहित करना है। लैब में प्रयोग के लिए आवश्यक उपकरणों के साथ बच्चों को सीखने के लिए अनुकूल वातावरण उपलब्ध कराया जाता है। औजारों और उपकरणों के सुरक्षित इस्तेमाल के लिए गाइड और लैब सहायक भी मौजूद रहेंगे।
आयोजकों के अनुसार प्रशिक्षण के बाद शिक्षक विद्यालयों में गणित और विज्ञान विषयों को गतिविधि आधारित तरीके से पढ़ाएंगे। इससे विद्यार्थियों में तार्किक क्षमता, जिज्ञासा, प्रयोग करने की आदत और तकनीकी समझ विकसित करने में मदद मिलेगी। कार्यशाला में प्रतिभागी शिक्षक-शिक्षिकाओं के साथ यूनिसेड की टीम मौजूद रही।
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- संख्या पद्धति, अबेकस, पाइथागोरस प्रमेय समेत गणितीय अवधारणाओं को प्रयोग से समझाया
सिद्धार्थनगर। परिषदीय विद्यालयों में गणित और विज्ञान की पढ़ाई को तकनीकी और प्रयोगात्मक बनाने के लिए शिक्षकों को प्रशिक्षित किया जा रहा है। चयनित 100 उच्च प्राथमिक विद्यालयों के गणित शिक्षकों की दो दिवसीय कार्यशाला बुधवार को शुरू हुई। प्रशिक्षण में शिक्षकों को टीएलएम और डिजिटल संसाधनों के माध्यम से गणितीय अवधारणाओं को बच्चों को सरल तरीके से समझाने के तौर-तरीके बताए गए।
जनपद के 300 विद्यालयों में आरईसी फाउंडेशन के सीएसआर के तहत जिज्ञासा लैब और सौर ऊर्जा से संचालित स्मार्ट कक्ष स्थापित किए जाने हैं। इनमें 200 उच्च प्राथमिक विद्यालयों में जिज्ञासा लैब की स्थापना पूरी हो चुकी है। दूसरे चरण में चयनित 100 विद्यालयों के विज्ञान और गणित शिक्षकों को प्रशिक्षित किया जा रहा है। प्रशिक्षण का उद्देश्य कक्षा शिक्षण को रटने के बजाय प्रयोग और गतिविधियों से जोड़ना है।
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कार्यशाला में बिहार के मोतिहारी से आए विषय विशेषज्ञ बाल्मीकि कुमार पांडेय ने शिक्षकों को गणित को सरल और रोचक बनाने के लिए शिक्षण सामग्री के प्रयोग की जानकारी दी। संख्या पद्धति, अबेकस के माध्यम से स्थानीय मान की समझ, जोड़, पाइथागोरस प्रमेय, कोण और त्रिभुज आदि विषयों को गतिविधियों के माध्यम से समझाया गया। क्षेत्रमिति से संबंधित आकृतियों के क्षेत्रफल और आयतन के सूत्रों को भी प्रयोगात्मक तरीके से निकालने का अभ्यास कराया गया।
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विशेषज्ञों ने शिक्षकों को जिज्ञासा लैब की उपयोगिता के बारे में जानकारी दी। बताया गया कि लैब का उद्देश्य बच्चों को नए विचारों को तलाशने, उनका परीक्षण करने और ‘करके सीखने’ के लिए प्रोत्साहित करना है। लैब में प्रयोग के लिए आवश्यक उपकरणों के साथ बच्चों को सीखने के लिए अनुकूल वातावरण उपलब्ध कराया जाता है। औजारों और उपकरणों के सुरक्षित इस्तेमाल के लिए गाइड और लैब सहायक भी मौजूद रहेंगे।
आयोजकों के अनुसार प्रशिक्षण के बाद शिक्षक विद्यालयों में गणित और विज्ञान विषयों को गतिविधि आधारित तरीके से पढ़ाएंगे। इससे विद्यार्थियों में तार्किक क्षमता, जिज्ञासा, प्रयोग करने की आदत और तकनीकी समझ विकसित करने में मदद मिलेगी। कार्यशाला में प्रतिभागी शिक्षक-शिक्षिकाओं के साथ यूनिसेड की टीम मौजूद रही।