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Siddharthnagar News: बलवा एवं हत्या के प्रयास के आरोपियों को सात साल का कठोर कारावास

Fri, 16 Feb 2024 12:02 AM IST
गोरखपुर ब्यूरो संवाद न्यूज एजेंसी, सिद्धार्थनगर
संवाद न्यूज एजेंसी, सिद्धार्थनगर Updated Fri, 16 Feb 2024 12:02 AM IST
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Seven years rigorous imprisonment to those accused of rebellion and attempt to murder
सिद्धार्थनगर। अपर जनपद एवं सत्र न्यायाधीश एफटीसी प्रथम हिमांशु दयाल श्रीवास्तव ने बलवा व हत्या के प्रयास के सात आरोपियों को सात साल कठोर कारावास की सजा सुनाई है। कोर्ट ने इटवा थाना क्षेत्र के बयारी गांव निवासी अभियुक्त लालमन, राममनीष, रामबिहारी, रामप्रकाश, रामफेर, राजा एवं दिगपाल को दोषी ठहराते हुए सजा सुनाई है। साथ ही सभी को 14-14 हजार रुपये के जुर्माने से दंडित किया है, जुर्माना जमा न करने पर तीन माह के अतिरिक्त कारावास की सजा भुगतनी होगी। अभियोज से पीड़ित पक्ष की पैरवी राज्य सरकार की तरफ से अपर जिला शासकीय अधिवक्ता फौजदारी राजेश कुमार त्रिपाठी ने किया।
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इटवा थानाक्षेत्र के बयारी गांव में एक जुलाई 2007 को घटना हुई थी। बयारी गांव निवासी संतोष ने पुलिस को लिखित तहरीर देकर घटना की जानकारी देते हुए कार्रवाई की मांग की थी। उसने आरोप लगाया था कि उसके गांव के लालमन, प्रकाश, बिहारी, रामफेर, राजा, रविंद्र, दिगपाल, गोल्हौरा थानाक्षेत्र के गांव सेहरी सिंगिवा निवासी दो और मिश्रौलिया थानाक्षेत्र के जोगीकुंड गांव निवासी एक सहित 14 लोग लाठी, डंडा, फरसा व बंदूक से लैश होकर उसके घर के सामने सार्वजनिक रास्ते में दीवाल का निर्माण करवा रहे थे। उन लोगों को दीवाल बनाने से रोकने पर वह उसे गालियां देते हुए जान से मारने की नीयत से दौड़ा लिए।
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शोर मचाने पर बीच-बचाव करने पहुंचे उसके चाचा राकेश कुमार के सिर पर मारकर गंभीर रुप से घायल कर दिया और पिता गंगोत्री प्रसाद को भी बहुत मारे-पीटे और मरा जानकर छोड़े। पुलिस की चार्जशीट दाखिल होने पर कोर्ट की सुनवाई के दौरान केस में पुलिस की लीपापोती की जानकारी होने पर वादी मुकदमा संतोष कुमार मिश्र ने मुख्य न्यायिक मजिस्ट्रेट के न्यायालय में सभी 14 आरोपियों के खिलाफ बलवा, दंगा, मारपीट, गंभीर रूप से मारने पीटने, हत्या के प्रयास व जानमाल की धमकी के अपराध में परिवाद दाखिल किया। न्यायालय ने चिकित्सकीय परीक्षण रिपोर्ट व गवाहों की गवाहीँ व घटना के तथ्यों एवं परिस्थितियों को देखते हुए सभी 14 अभियुक्तों को प्रथम दृष्टया अभियुक्त पाकर विचारण के लिए तलब कर लिया। जमानत के बाद दोनों पत्रावलियों को सत्र न्यायालय के सुपुर्द किया। न्यायालय ने दोनों पक्षों के अधिवक्ताओं की बहस सुनकर पत्रावली का अवलोकन किया। उपलब्ध साक्ष्यों गवाहों की गवाही, जिरह, चिकित्सकीय परीक्षण रिपोर्ट, अन्य आवश्यक सुसंगत दस्तावेजी साक्ष्यों, घटना के तथ्यों व परिस्थितियों को ध्यान में रखते हुए को दोषी ठहराते हुए सजा सुनाया। वहीं मुन्नन, मुकेश,जग्गन, रविन्द्र, इब्राहिम व इज़राइल को न्यायालय ने संदेह का लाभ देते हुए दोषमुक्त कर दिया।
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मामले की अल्पीकरण में जुटी रही पुलिस
पीड़ित संतोष का कहना है कि घटना की सूचना जब उसने थाने पर दिया तो तत्कालीन थानाध्यक्ष ने कहा कि पहले अपनी जान बचाओ बाद में देखा जाएगा। इसके बाद उसने सादे कागज पर दस्तखत करवा कर कहा जाओ इलाज करवाओ। इसके बाद पुलिस ने मुल्जिमों का नाम निकालकर घटना का अल्पीकरण करके केस दर्ज किया और मात्र मारपीट व जानमाल की धमकी के अपराध में सिर्फ 11 अभियुक्तों के खिलाफ आरोप पत्र दाखिल कर दिया। जिस पर पीड़ित ने कोर्ट से गुहार लगाई थी।
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