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Siddharthnagar News: विद्यालय भवन जर्जर, नहीं कराया गया जमींदोज, हादसे की आशंका
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-खेसरहा ब्लॉक क्षेत्र में जर्जर हैं कई विद्यालय भवन, दूसरी जगह पढ़ते हैं बच्चे
-कई बार पत्राचार के बाद भी नहीं दिखाया गया भवन
-खेसरहा और बंसी ब्लॉक क्षेत्र के हैं विद्यालय
संवाद न्यूज एजेंसी
सकारपार। बेसिक शिक्षा विभाग की ओर से निष्प्रयोज्य हो चुके भवनों का कोई ध्यान देने वाला नहीं है। विद्यालय में पढ़ने वाले बच्चे मध्यावकाश में खेलकूद करते समय जर्जर भवन के इर्दगिर्द घूमते हैं, जिससे खतरे का डर बना है। जबकि विद्यालय के जर्जर भवन होने की सूचना देने के बावजूद विभागीय शिथिलता का परिणाम है कि अब तक इन भवनों को जमींदोज नहीं करवाया जा रहा है। जो कभी भी बड़ी दुर्घटना का कारण बन सकते हैं।
यह हाल तब है जब विद्यालयों के कायाकल्प के साथ ही अतिरिक्त भवन के लिए योजना चल रही है। जिम्मेदारों की उदासीनता बच्चों पर भारी पड़ सकताी है। बांसी क्षेत्र के गोनहा डीह गांव में लगभग पांच दशक पूर्व प्राथमिक विद्यालय भवन का निर्माण हुआ। जो अब पूर्ण रूप से निष्प्रयोज्य हो चुका है। भवन जर्जर होने के बाद विभाग ने लगभग एक दशक पूर्व बगल में नया भवन बना दिया, लेकिन पुराने भवन का ध्वस्तीकरण अभी तक नहीं कराया गाया, जबकि जर्जर भवन अपने आप गिर रहा है। विद्यालय में कुल नामांकित विद्यार्थियों की संख्या 110 है। विद्यालय का किचन सेड जर्जर भवन के समीप है। इससे मध्यावकाश में बच्चे भोजन करने के लिए जर्जर भवन के इर्द गिर्द घूमते रहते हैं।
प्रधानाचार्य चंद्र प्रकाश राय ने बताया कि बच्चों को सुरक्षित रखने के लिए मध्यावकाश में विद्यालय में तैनात स्टॉप की बाकायदा ड्यूटी लगती है, ताकि कोई छात्र जर्जर भवन के आसपास न जाने पाए।
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इसी तरह खेसरहा के कंपोजिट विद्यालय बिशुनपुर मुस्तहकम में लगभग चार दशक पहले विभाग ने बच्चों की पढ़ाई के लिए भवन का निर्माण कराया था। जो अब जर्जर हो चुका है। भवन कभी भी गिर सकता है, जिससे बड़ा हादसा होने से इनकार नहीं किया जा सकता। प्रधानाचार्य नीरज कुमार मिश्र ने बताया कि जर्जर भवन के संबंध में उच्च अधिकारियों को पत्र के माध्यम से अवगत कराया गया है। लेकिन ध्यान नहीं दिया जा रहा है।
वहीं, खेसरहा के पिपरा फरदंग में 1975 में प्राथमिक विद्यालय का निर्माण करवाया गया। जो ढहने की कगार पर है। विद्यालय के प्रभारी मोइनुद्दीन अंसारी ने बताया कि मध्यावकाश में बच्चे जर्जर भवन के समीप पहुंच जाते हैं। इसको लेकर हमेशा यह भय रहता है कि कहीं कोई हादसा न हो जाए। विद्यालय में छात्रों की संख्या 55 है। अभिभावक बच्चों को विद्यालय भेजते समय भयभीत रहते हैं, कि जर्जर भवन गिरने से कहीं कोई हादसा न हो जाए।
इस संबंध में बीएसए देवेंद्र कुमार पांडेय ने बताया कि रिपोर्ट मंगवाकर आगे की कार्रवाई की जाएगी।
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-कई बार पत्राचार के बाद भी नहीं दिखाया गया भवन
-खेसरहा और बंसी ब्लॉक क्षेत्र के हैं विद्यालय
संवाद न्यूज एजेंसी
सकारपार। बेसिक शिक्षा विभाग की ओर से निष्प्रयोज्य हो चुके भवनों का कोई ध्यान देने वाला नहीं है। विद्यालय में पढ़ने वाले बच्चे मध्यावकाश में खेलकूद करते समय जर्जर भवन के इर्दगिर्द घूमते हैं, जिससे खतरे का डर बना है। जबकि विद्यालय के जर्जर भवन होने की सूचना देने के बावजूद विभागीय शिथिलता का परिणाम है कि अब तक इन भवनों को जमींदोज नहीं करवाया जा रहा है। जो कभी भी बड़ी दुर्घटना का कारण बन सकते हैं।
यह हाल तब है जब विद्यालयों के कायाकल्प के साथ ही अतिरिक्त भवन के लिए योजना चल रही है। जिम्मेदारों की उदासीनता बच्चों पर भारी पड़ सकताी है। बांसी क्षेत्र के गोनहा डीह गांव में लगभग पांच दशक पूर्व प्राथमिक विद्यालय भवन का निर्माण हुआ। जो अब पूर्ण रूप से निष्प्रयोज्य हो चुका है। भवन जर्जर होने के बाद विभाग ने लगभग एक दशक पूर्व बगल में नया भवन बना दिया, लेकिन पुराने भवन का ध्वस्तीकरण अभी तक नहीं कराया गाया, जबकि जर्जर भवन अपने आप गिर रहा है। विद्यालय में कुल नामांकित विद्यार्थियों की संख्या 110 है। विद्यालय का किचन सेड जर्जर भवन के समीप है। इससे मध्यावकाश में बच्चे भोजन करने के लिए जर्जर भवन के इर्द गिर्द घूमते रहते हैं।
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प्रधानाचार्य चंद्र प्रकाश राय ने बताया कि बच्चों को सुरक्षित रखने के लिए मध्यावकाश में विद्यालय में तैनात स्टॉप की बाकायदा ड्यूटी लगती है, ताकि कोई छात्र जर्जर भवन के आसपास न जाने पाए।
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इसी तरह खेसरहा के कंपोजिट विद्यालय बिशुनपुर मुस्तहकम में लगभग चार दशक पहले विभाग ने बच्चों की पढ़ाई के लिए भवन का निर्माण कराया था। जो अब जर्जर हो चुका है। भवन कभी भी गिर सकता है, जिससे बड़ा हादसा होने से इनकार नहीं किया जा सकता। प्रधानाचार्य नीरज कुमार मिश्र ने बताया कि जर्जर भवन के संबंध में उच्च अधिकारियों को पत्र के माध्यम से अवगत कराया गया है। लेकिन ध्यान नहीं दिया जा रहा है।
वहीं, खेसरहा के पिपरा फरदंग में 1975 में प्राथमिक विद्यालय का निर्माण करवाया गया। जो ढहने की कगार पर है। विद्यालय के प्रभारी मोइनुद्दीन अंसारी ने बताया कि मध्यावकाश में बच्चे जर्जर भवन के समीप पहुंच जाते हैं। इसको लेकर हमेशा यह भय रहता है कि कहीं कोई हादसा न हो जाए। विद्यालय में छात्रों की संख्या 55 है। अभिभावक बच्चों को विद्यालय भेजते समय भयभीत रहते हैं, कि जर्जर भवन गिरने से कहीं कोई हादसा न हो जाए।
इस संबंध में बीएसए देवेंद्र कुमार पांडेय ने बताया कि रिपोर्ट मंगवाकर आगे की कार्रवाई की जाएगी।