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Siddharthnagar News: फर्जी भूमि विक्रय प्रकरण में राजस्व निरीक्षक निलंबित
Thu, 02 Apr 2026 11:22 PM IST
गोरखपुर ब्यूरो
संवाद न्यूज एजेंसी, सिद्धार्थनगर
संवाद न्यूज एजेंसी, सिद्धार्थनगर
Updated Thu, 02 Apr 2026 11:22 PM IST
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सिद्धार्थनगर। जनपद में फर्जी तरीके से भूमि विक्रय कराए जाने के मामले में बड़ी कार्रवाई करते हुए जिलाधिकारी शिवशरणप्पा जीएन ने राजस्व निरीक्षक अब्दुल गफ्फार को तत्काल प्रभाव से निलंबित कर दिया है। उनके खिलाफ प्रथम दृष्टया दोषी पाए जाने पर यह कार्रवाई की गई है।
मामला सिविल लाइंस निवासी आरती वर्मा के 15 मई 2025 को दिए गए शिकायती प्रार्थना पत्र से जुड़ा है। अपर जिलाधिकारी (न्यायिक) द्वारा 16 अक्टूबर 2025 को प्रस्तुत जांच आख्या में तत्कालीन क्षेत्रीय लेखपाल रहे अब्दुल गफ्फार (वर्तमान में राजस्व निरीक्षक, तहसील नौगढ़) की भूमिका संदिग्ध पाई गई। जांच में सामने आया कि गाटा संख्या 367 (क्षेत्रफल 0.0510 हेक्टेयर) स्थित राजस्व ग्राम तेतरी की भूमि, जो घनश्याम पुत्र छोटेलाल की नहीं थी, उसे फर्जी तरीके से विक्रय कराने में उनकी संलिप्तता रही।
निलंबन अवधि के दौरान अब्दुल गफ्फार को नियमानुसार जीवन निर्वाह भत्ता (सब्सिस्टेंस अलाउंस) दिया जाएगा, जो अर्द्ध वेतन के बराबर होगा। साथ ही नियमानुसार अन्य भत्ते भी शर्तों के अधीन देय होंगे, बशर्ते संबंधित कर्मचारी यह प्रमाणित करें कि वे किसी अन्य रोजगार या व्यवसाय में संलग्न नहीं हैं।
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प्रकरण की विस्तृत जांच के लिए उपजिलाधिकारी बांसी को जांच अधिकारी नामित किया गया है। उन्हें निर्देश दिए गए हैं कि आरोप पत्र तैयार कर एक सप्ताह के भीतर अनुमोदन हेतु प्रस्तुत करें।
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मामला सिविल लाइंस निवासी आरती वर्मा के 15 मई 2025 को दिए गए शिकायती प्रार्थना पत्र से जुड़ा है। अपर जिलाधिकारी (न्यायिक) द्वारा 16 अक्टूबर 2025 को प्रस्तुत जांच आख्या में तत्कालीन क्षेत्रीय लेखपाल रहे अब्दुल गफ्फार (वर्तमान में राजस्व निरीक्षक, तहसील नौगढ़) की भूमिका संदिग्ध पाई गई। जांच में सामने आया कि गाटा संख्या 367 (क्षेत्रफल 0.0510 हेक्टेयर) स्थित राजस्व ग्राम तेतरी की भूमि, जो घनश्याम पुत्र छोटेलाल की नहीं थी, उसे फर्जी तरीके से विक्रय कराने में उनकी संलिप्तता रही।
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निलंबन अवधि के दौरान अब्दुल गफ्फार को नियमानुसार जीवन निर्वाह भत्ता (सब्सिस्टेंस अलाउंस) दिया जाएगा, जो अर्द्ध वेतन के बराबर होगा। साथ ही नियमानुसार अन्य भत्ते भी शर्तों के अधीन देय होंगे, बशर्ते संबंधित कर्मचारी यह प्रमाणित करें कि वे किसी अन्य रोजगार या व्यवसाय में संलग्न नहीं हैं।
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प्रकरण की विस्तृत जांच के लिए उपजिलाधिकारी बांसी को जांच अधिकारी नामित किया गया है। उन्हें निर्देश दिए गए हैं कि आरोप पत्र तैयार कर एक सप्ताह के भीतर अनुमोदन हेतु प्रस्तुत करें।