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किसानों के लिए सरसों का विकल्प बनी सूर्यमुखी
ब्यूरो/अमर उजाला सिद्धार्थनगर
Updated Mon, 18 Apr 2016 10:46 PM IST
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किसान अब सूर्यमुखी की खेती करने लगा है।
- फोटो : अमर उजाला ब्यूरो
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सिद्धार्थनगर जिला पर्वतीय क्षेत्र होने के कारण जिस तरह से मौसम की मार से तेलहन की फसल कई वर्षों से बर्बाद होने के कारण इससे मुंह मोड़ चुके हैं। अब उनका विकल्प सूर्यमुखी की खेती बन रही है। लोटन क्षेत्र के कई किसानों ने सूर्यमुखी की अच्छी खेती कर किसानों को यह नया विकल्प दिया है।
विकास खंड लोटन के ग्राम पननी के शारदा पांडेय दो वर्षों से सूर्यमुखी की खेती कर रहे हैं। उनके मुताबिक एक एकड़ की खेती में पंद्रह क्विंटल प्रति एकड़ का मुनाफा हो जाता है। अगर दाने को बाजार में बेचा जाए तो यह मुनाफा अलग है।
इनकी फसल देख उसी गांव के गया प्रसाद पांडेय ने भी इस वर्ष एक एकड़ की खेती की है। उन्होंने बताया कि अगर कृषि विभाग से अनुदान की व्यवस्था हो तो किसानों का रुझान और बढ़ेगा। इसी विकास खंड के ग्राम चौदहवा के पटेसर यादव का कहना है कि पांच साल से सूर्यमुखी की खेती कर रहा हूं।
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इससे खाद्य तेल के साथ ही अच्छा मुनाफा भी मिल रहा है। गांव के नेवास यादव, शंकर यादव, रामदेव यादव सहित कई किसान इस बार सूर्यमुखी की खेती से जुड़े हैं। उसी से सटे गांव फुलवरिया के राजकुमार, राजेंद्र, पल्टू आदि सूर्यमुखी की खेती कर लाभ उठा रहे हैं।
इस संबंध में जिला कृषि अधिकारी एसएन चौधरी ने बताया कि कई वर्षों से मौसम सही न होने के कारण इस क्षेत्र में सरसों की पैदावार अच्छी नहीं मिल पा रही। ऐसे में सूरजमुखी की खेती किसान तेल उत्पादन कर सकते हैं।
सरकार की ओर से तिलहन व दलहन पर 75 प्रतिशत तक सब्सिडी भी दिया जा रहा है, लेकिन यह सुविधा उन किसानों को ही मिल पाता है जिनका कृषि विभाग में रजिस्ट्रेशन होता है। ज्यादा से ज्यादा लोग रजिस्टे्रशन करवा कर सब्सिडी का लाभ ले सकते हैं। विभाग चयनित किसानों को बीज देकर प्रचार-प्रसार में लगा है, जिससे ज्यादा लोग सूरजमुखी की खेती कर सकें।
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विकास खंड लोटन के ग्राम पननी के शारदा पांडेय दो वर्षों से सूर्यमुखी की खेती कर रहे हैं। उनके मुताबिक एक एकड़ की खेती में पंद्रह क्विंटल प्रति एकड़ का मुनाफा हो जाता है। अगर दाने को बाजार में बेचा जाए तो यह मुनाफा अलग है।
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इनकी फसल देख उसी गांव के गया प्रसाद पांडेय ने भी इस वर्ष एक एकड़ की खेती की है। उन्होंने बताया कि अगर कृषि विभाग से अनुदान की व्यवस्था हो तो किसानों का रुझान और बढ़ेगा। इसी विकास खंड के ग्राम चौदहवा के पटेसर यादव का कहना है कि पांच साल से सूर्यमुखी की खेती कर रहा हूं।
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इससे खाद्य तेल के साथ ही अच्छा मुनाफा भी मिल रहा है। गांव के नेवास यादव, शंकर यादव, रामदेव यादव सहित कई किसान इस बार सूर्यमुखी की खेती से जुड़े हैं। उसी से सटे गांव फुलवरिया के राजकुमार, राजेंद्र, पल्टू आदि सूर्यमुखी की खेती कर लाभ उठा रहे हैं।
इस संबंध में जिला कृषि अधिकारी एसएन चौधरी ने बताया कि कई वर्षों से मौसम सही न होने के कारण इस क्षेत्र में सरसों की पैदावार अच्छी नहीं मिल पा रही। ऐसे में सूरजमुखी की खेती किसान तेल उत्पादन कर सकते हैं।
सरकार की ओर से तिलहन व दलहन पर 75 प्रतिशत तक सब्सिडी भी दिया जा रहा है, लेकिन यह सुविधा उन किसानों को ही मिल पाता है जिनका कृषि विभाग में रजिस्ट्रेशन होता है। ज्यादा से ज्यादा लोग रजिस्टे्रशन करवा कर सब्सिडी का लाभ ले सकते हैं। विभाग चयनित किसानों को बीज देकर प्रचार-प्रसार में लगा है, जिससे ज्यादा लोग सूरजमुखी की खेती कर सकें।