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Siddharthnagar News: रील वाली शादी, रियल खर्च... दिखावे में बिगड़ रहा पारिवारिक बजट
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शहर में स्थित मैरिज हॉल की सजावट। संवाद
संवाद न्यूज एजेंसी
सिद्धार्थनगर। बड़े शहरों तक सीमित रहने वाला शादी का सोशल मीडिया ट्रेंड अब जिले के शहरों और कस्बों में भी तेजी से फैल रहा है।
शादियां अब सिर्फ मंडप और रस्मों तक सीमित नहीं रहीं, बल्कि मोबाइल स्क्रीन, इंस्टाग्राम रील और सोशल मीडिया फीड का अहम हिस्सा बन चुकी हैं। प्री-वेडिंग शूट, स्लो-मोशन एंट्री, थीम डेकोरेशन और कैमरे के सामने परफेक्ट पलों की तैयारी अब शादी के अनिवार्य पैकेज में शामिल हो गई है।
कई परिवारों ने नाम न छापने की शर्त पर बताया कि शादी के कुल बजट का 20 से 30 प्रतिशत हिस्सा केवल सोशल मीडिया कंटेंट-जैसे रील, सिनेमैटिक वीडियो और ड्रोन शूट पर खर्च हो रहा है। कुछ मामलों में इस खर्च को पूरा करने के लिए परिवारों को कर्ज का सहारा भी लेना पड़ा। परंपरागत शादी अब धीरे-धीरे एक सोशल मीडिया इवेंट का रूप लेती जा रही है।
शादी की तैयारियों के बीच यह साफ नजर आने लगा है कि रील के लिए रियल खर्च लगातार बढ़ रहा है। युवा वर्ग शादी को यादगार बनाना चाहता है, जबकि परिवारों का कहना है कि इस ‘यादगारपन’ की कीमत अब हजारों नहीं, बल्कि लाखों रुपये तक पहुंच चुकी है। पहले जहां खर्च का बड़ा हिस्सा मेहमानों, भोजन और रस्मों पर होता था, अब कैमरा, लाइट, एडिटिंग और स्पेशल इफेक्ट पर खर्च तेजी से बढ़ा है।
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शादियों में फोटोग्राफी और वीडियोग्राफी की बुकिंग करने वाले सोनू यादव बताते हैं कि इस सहालग में पारंपरिक फोटो एल्बम की मांग घट गई है। अब ग्राहक रील पैकेज, सिनेमैटिक वीडियो और ड्रोन शॉट की जानकारी सबसे पहले लेते हैं। कई परिवार मानते हैं कि यदि यह सब न कराया जाए तो शादी अधूरी मानी जाती है।
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सिद्धार्थनगर। बड़े शहरों तक सीमित रहने वाला शादी का सोशल मीडिया ट्रेंड अब जिले के शहरों और कस्बों में भी तेजी से फैल रहा है।
शादियां अब सिर्फ मंडप और रस्मों तक सीमित नहीं रहीं, बल्कि मोबाइल स्क्रीन, इंस्टाग्राम रील और सोशल मीडिया फीड का अहम हिस्सा बन चुकी हैं। प्री-वेडिंग शूट, स्लो-मोशन एंट्री, थीम डेकोरेशन और कैमरे के सामने परफेक्ट पलों की तैयारी अब शादी के अनिवार्य पैकेज में शामिल हो गई है।
कई परिवारों ने नाम न छापने की शर्त पर बताया कि शादी के कुल बजट का 20 से 30 प्रतिशत हिस्सा केवल सोशल मीडिया कंटेंट-जैसे रील, सिनेमैटिक वीडियो और ड्रोन शूट पर खर्च हो रहा है। कुछ मामलों में इस खर्च को पूरा करने के लिए परिवारों को कर्ज का सहारा भी लेना पड़ा। परंपरागत शादी अब धीरे-धीरे एक सोशल मीडिया इवेंट का रूप लेती जा रही है।
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शादी की तैयारियों के बीच यह साफ नजर आने लगा है कि रील के लिए रियल खर्च लगातार बढ़ रहा है। युवा वर्ग शादी को यादगार बनाना चाहता है, जबकि परिवारों का कहना है कि इस ‘यादगारपन’ की कीमत अब हजारों नहीं, बल्कि लाखों रुपये तक पहुंच चुकी है। पहले जहां खर्च का बड़ा हिस्सा मेहमानों, भोजन और रस्मों पर होता था, अब कैमरा, लाइट, एडिटिंग और स्पेशल इफेक्ट पर खर्च तेजी से बढ़ा है।
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शादियों में फोटोग्राफी और वीडियोग्राफी की बुकिंग करने वाले सोनू यादव बताते हैं कि इस सहालग में पारंपरिक फोटो एल्बम की मांग घट गई है। अब ग्राहक रील पैकेज, सिनेमैटिक वीडियो और ड्रोन शॉट की जानकारी सबसे पहले लेते हैं। कई परिवार मानते हैं कि यदि यह सब न कराया जाए तो शादी अधूरी मानी जाती है।