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Siddharthnagar News: लाल निशान के करीब पहुंची राप्ती, 400 गांवों पर मंडराया खतरा

Sat, 12 Aug 2023 12:57 AM IST
गोरखपुर ब्यूरो संवाद न्यूज एजेंसी, सिद्धार्थनगर
संवाद न्यूज एजेंसी, सिद्धार्थनगर Updated Sat, 12 Aug 2023 12:57 AM IST
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Rapti reached close to red mark, 400 villages in danger
गागापुर गांव के पास शाहपुर सिंगारजोत रोड के तरफ कटान करती राप्ती
सिद्धार्थनगर। इस मानसून में पहली बार चेतावनी स्तर पार चुके राप्ती नदी के जलस्तर से इसकी जद में आने वाले चार सौ से अधिक गांवों पर खतरा मंडराने लगा है। धीरे-धीरे बढ़ रहे राप्ती का जलस्तर खतरे के लाल निशान से करीब आधे मीटर दूर रह गया है। जिससे बांध किनारे बसे इन गांवों के लोगों को पिछले वर्ष की भयावह बाढ़ की विभीषिका याद आने लगी है। पिछले वर्ष भयावह बाढ़ से राप्ती और बूढ़ी राप्ती किनारे बांध के टूटने के चलते 600 गांवों में तबाही मची थी।
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बाढ़ के लिहाज से जिले की सबसे खतरनाक नदी में शामिल राप्ती का जलस्तर बढ़ने के साथ ही इसकी जद में आने वाले चार सौ गांवों पर खतरा मंडराने लगा है। राप्ती किनारे बने बंधों में अधिकांश के जर्जर होने से लोग सहमे हुए है। शुक्रवार को राप्ती नदी चेतावनी स्तर 83.900 से ऊपर पहुंच 84.060 मीटर पर बह रही है। यह खतरे के लाल निशान 84.900 मीटर से मात्र 80 सेंटीमीटर नीचे है। वहीं बूढ़ी राप्ती नदी का जलस्तर उसके चेतावनी स्तर 84.650 मीटर से ऊपर 84.690 मीटर तक पहुंच वापस नीचे आ गया है जो खतरे के निशान 85.650 मीटर से एक मीटर से भी कम है।
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ग्रामीणों का कहना है कि राप्ती नदी के बारे में कहावत है कि वह जल्दी बढ़ती नहीं और जब चढ़ती है तो तबाही मचाकर ही उतरती है। राप्ती नदी के बढ़ते जलस्तर से डुमरियागंज और बांसी क्षेत्र के लोगों को तबाही का डर सता रहा है। बांसी नगर में स्थित राप्ती नदी पुल के दक्षिणी पश्चिमी छोरपर स्थित जर्जर जमींदारी बांध में हर कदम पर बारिश से गड्ढे व होल बन गए है। इसे देख बांध के तट पर बसे गरगजवा, पिपरहिया व खरिका सहित आसपास के गांव के लोग काफी चिंतित है।
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क्षेत्र निवासी आकाश, दीपक व राकेश निषाद का कहना है कि बांध काफी जर्जर है नदी का जल स्तर पिछले वर्ष की तरह बढ़ा तो यह पानी के दबाव को नहीं झेल पाएगा। बंधो पर मंडरा रहे खतरे के कारण जोगिया, लोटन, उसका, शोहरतगढ़, बांसी और डुमरियागंज क्षेत्र में नदी किनारे स्थित गांव के लोग सहमे हुए हैं।
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पिछले वर्ष बांध टूटने से मची थी तबाही
पिछले वर्ष सितंबर और अक्टूबर माह में आई बाढ़ से राप्ती और बूढ़ी राप्ती नदी किनारे स्थित बांधें में चार स्थानों पर टूटने से जिले में भयावह तबाही मची थी। इससे 600 से अधिक जलमग्न हो गए थे, 19 लोगों की मौत हुई और 60 हजार हेक्टेयर फसल डूबने से नष्ट हो गई थी। इससे पांच लाख आबादी प्रभावित हुई थी, जिन्हें महीनों सांसत झेलनी पड़ी थी। यहां तक कि कई मकान गिरने से कई लोग अब भी बाढ़ का दंश झेलने को मजबूर है। विभाग का कहना है कि पिछले वर्षों में नदियों में इतना पानी कभी नहीं आया था, जितना पिछले वर्ष आया था, जिस कारण बांध टूट गए थे।
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इन गांवों पर भी मंडराया खतरा
राप्ती नदी में आए उफान से डुमरियागंज व भनवापुर क्षेत्र में वीरपुर एहतमाली, वीरपुर कोहल, पिकौरा, बामदेई ,राउतडीला गांवों पर खतरा मंडराने लगा है। यहां के किसानों के सैकड़ों बीघा धान की फसल बाढ़ के पानी में डूब चुकी है। पिकौरा वीरपुर मार्ग पर करीब तीन फीट पानी चढ़ गया हैं। वीरपुर एहतमाली गांव के पश्चिम राप्ती की कटान से प्राचीन शिव मंदिर खतरे में है। बामदेई गांव के पास राप्ती के कटान से लोग दहशत में है। वहीं बूढ़ी राप्ती नदी किनारे दलपतपुर, डेगहर, परसोहन, देवीपुर, सिकरा बुजुर्ग, मुडिला, बुड्ढी, छगड़िहवा, बैरिहवां, केरवनिया समेत कई गांवों पर खतरा मंडरा रहा है।

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बांधों की कर रहे निगरानी
सिंचाई विभाग के अधिकारी एवं कर्मचारी लगातार बांधों की निगरानी कर रहे है। ड्रेनेज खंड के जेई संजय कुमार, अभिजीत सिंह ने कूड़ा नदी किनारे बांधों की निगरानी कर स्थिति का जायजा लिया। जेई मुनीब कुमार का कहना है कि विभाग की तरफ से बांधों की सुरक्षा के मद्देनजर लगातार निगरानी की जा रही है।
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नदियां का जलस्तर (मीटर में)
नदी खतरे का स्तर बृहस्पतिवार शुक्रवार

राप्ती 84.900 83.890 84.060

बूढ़ी राप्ती 85.650 84.690 84.150

कूड़ा 83.520 81.310 81.480

घोघी 87.000 85.00 85.10

बानगंगा 93.420 93.20 93.20

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बाढ़ से बचाव की सभी तैयारियां पूर्ण कर ली गई हैं। विभागीय अधिकारियों को लगातार निगरानी का निर्देश दिए गए हैं। प्रशासन बाढ़ को लेकर अलर्ट है।
-उमाशंकर, एडीएम
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