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राप्ती और बूढ़ी राप्ती के किनारे तेज हुई कटान, अब भी कई गांव बाढ़ से घिरे
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शोहरतगढ़ के खैरी शीतल गांव में भरे बाढ़ के पानी में आवागमन करते लोग।
- फोटो : SIDDHARTHNAGAR
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राप्ती और बूढ़ी राप्ती के किनारे तेज हुई कटान, अब भी कई गांव बाढ़ से घिरे
सिद्धार्थनगर। जलस्तर घटने के छठे दिन भी राप्ती और बूढ़ी राप्ती नदी खतरे के लाल निशान से ऊपर बनी हुई है। इससे किनारे के गांवों के पास कटान तेज हो गई है। मकान, बाग और खेत के पास हो रही कटान से ग्रामीण भयभीत हैं। वहीं कुछ गांव अब भी बाढ़ के पानी से घिरे हुए हैं।
कई दिनों से राप्ती, बूढ़ी राप्ती और कूड़ा आदि नदियों में आई बाढ़ से परेशान रहे पीड़ितों की मुश्किलें कम होती नहीं दिख रही हैं। नदियों का जलस्तर घटने के साथ किनारों पर शुरू हुई कटान से लोगों की चिंता बढ़ गई है। जलस्तर घटने के बावजूद राप्ती 21वें दिन खतरे के लाल निशान से 46 सेमी ऊपर बह रही है, जबकि बूढ़ी राप्ती का जलस्तर लाल निशान से 54 सेमी ऊपर बना हुआ है। वहीं कूड़ा नदी, घोघी, जमुआर, बानगंगा, तेलार आदि लाल निशान से नीचे चली गई हैं।
नदियों का जलस्तर घटने से जहां लोगों में बांधों के टूटने का खतरा टलने और जलभराव में कमी आने से राहत महसूस की, वहीं पर जोगिया के फत्तेपुर और उसका के हथिवड़ताल, छितरापार आदि क्षेत्रों में नदियों किनारे कटान शुरू होने से लोग भयभीत हैं। उसका क्षेत्र के तिवारीपुर समेत कई गांव अभी भी बाढ़ के पानी से घिरे हुए हैं, जिससे इन गांवों के लोगों की मुश्किलें कम नहीं हुई हैं।
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सिद्धार्थनगर। जलस्तर घटने के छठे दिन भी राप्ती और बूढ़ी राप्ती नदी खतरे के लाल निशान से ऊपर बनी हुई है। इससे किनारे के गांवों के पास कटान तेज हो गई है। मकान, बाग और खेत के पास हो रही कटान से ग्रामीण भयभीत हैं। वहीं कुछ गांव अब भी बाढ़ के पानी से घिरे हुए हैं।
कई दिनों से राप्ती, बूढ़ी राप्ती और कूड़ा आदि नदियों में आई बाढ़ से परेशान रहे पीड़ितों की मुश्किलें कम होती नहीं दिख रही हैं। नदियों का जलस्तर घटने के साथ किनारों पर शुरू हुई कटान से लोगों की चिंता बढ़ गई है। जलस्तर घटने के बावजूद राप्ती 21वें दिन खतरे के लाल निशान से 46 सेमी ऊपर बह रही है, जबकि बूढ़ी राप्ती का जलस्तर लाल निशान से 54 सेमी ऊपर बना हुआ है। वहीं कूड़ा नदी, घोघी, जमुआर, बानगंगा, तेलार आदि लाल निशान से नीचे चली गई हैं।
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नदियों का जलस्तर घटने से जहां लोगों में बांधों के टूटने का खतरा टलने और जलभराव में कमी आने से राहत महसूस की, वहीं पर जोगिया के फत्तेपुर और उसका के हथिवड़ताल, छितरापार आदि क्षेत्रों में नदियों किनारे कटान शुरू होने से लोग भयभीत हैं। उसका क्षेत्र के तिवारीपुर समेत कई गांव अभी भी बाढ़ के पानी से घिरे हुए हैं, जिससे इन गांवों के लोगों की मुश्किलें कम नहीं हुई हैं।
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