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रामलीला मंचन से अभिभूत हुए श्रद्धालु
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रामलीला मंचन देखकर अभिभूत हुए श्रद्धालु
औदही कलां की रामलीला देखने कई गांवों से पहुंचे श्रद्धालु
संवाद न्यूज एजेंसी
परसा। रामलीला सिर्फ मनोरंजन का साधन नहीं है बल्कि यह हमें आदर्श जीवन जीने की राह दिखाती है। हमें अपने जीवन में भगवान राम के आदर्शों का पालन करना चाहिए। यह बातें हियुवा नेता सुभाष गुप्ता ने कहीं। वह बढ़नी ब्लॉक के औदही कलां गांव में रामलीला उद्घाटन के वक्त लोगों को संबोधित कर रहे थे।
उन्होंने रामलीला के माध्यम से दिखाए गए आदर्शों से सीख लेने का आह्वान करते हुए कहा कि श्रीराम ने भगवान होते हुए भी तमाम बाधाओं को सहन किया। उन्होंने अपनी लीला के माध्यम से संसार को संदेश दिया कि यदि मानव में धैर्य, त्याग, धर्म और संस्कार है तो वह जीवन के तमाम दुखों को सहन कर एक आदर्श स्थापित कर सकता है। सपा एसटी प्रकोष्ठ के प्रदेश महासचिव प्रदीप कुमार पथरकट्ट ने कहा अनादि काल से भारत में चित्र की नहीं, चरित्र की उपासना की जाती रही है। प्रभु श्रीराम ही इस राष्ट्र का चरित्र हैं। भगवान श्रीराम सामाजिक समरसता के सबसे बड़े ध्वजवाहक हैं। रामलीला में पहले दिन नारद मोह, दशरथ-संताप, पुत्रेष्टि यज्ञ व राम-जन्म तक के प्रसंग को गांव के ही कलाकारों ने बड़े ही मनोरम तरीके से प्रस्तुत किया। रामलीला पंडाल में मौजूद महिलाओं ने राम-जन्म होते ही सोहर गीत गाया और पुष्प-वर्षा की। इस दौरान समिति के अध्यक्ष गंगाराम तिवारी, अनिल अग्रहरि, सोनू, शहंशाह आलम, रविकांत प्रजापति, कौशल गुप्ता, श्रवण तिवारी, विजय गुप्ता, संदीप वरुण, अतीकुर्रहमान, विनय शुक्ल, रमेश गुप्ता, रामकुमार गुप्ता, रामनरेश गौड़, विष्णु गुप्ता, बृजेश, मुकेश और गोलू आदि लोग मौजूद थे।
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औदही कलां की रामलीला देखने कई गांवों से पहुंचे श्रद्धालु
संवाद न्यूज एजेंसी
परसा। रामलीला सिर्फ मनोरंजन का साधन नहीं है बल्कि यह हमें आदर्श जीवन जीने की राह दिखाती है। हमें अपने जीवन में भगवान राम के आदर्शों का पालन करना चाहिए। यह बातें हियुवा नेता सुभाष गुप्ता ने कहीं। वह बढ़नी ब्लॉक के औदही कलां गांव में रामलीला उद्घाटन के वक्त लोगों को संबोधित कर रहे थे।
उन्होंने रामलीला के माध्यम से दिखाए गए आदर्शों से सीख लेने का आह्वान करते हुए कहा कि श्रीराम ने भगवान होते हुए भी तमाम बाधाओं को सहन किया। उन्होंने अपनी लीला के माध्यम से संसार को संदेश दिया कि यदि मानव में धैर्य, त्याग, धर्म और संस्कार है तो वह जीवन के तमाम दुखों को सहन कर एक आदर्श स्थापित कर सकता है। सपा एसटी प्रकोष्ठ के प्रदेश महासचिव प्रदीप कुमार पथरकट्ट ने कहा अनादि काल से भारत में चित्र की नहीं, चरित्र की उपासना की जाती रही है। प्रभु श्रीराम ही इस राष्ट्र का चरित्र हैं। भगवान श्रीराम सामाजिक समरसता के सबसे बड़े ध्वजवाहक हैं। रामलीला में पहले दिन नारद मोह, दशरथ-संताप, पुत्रेष्टि यज्ञ व राम-जन्म तक के प्रसंग को गांव के ही कलाकारों ने बड़े ही मनोरम तरीके से प्रस्तुत किया। रामलीला पंडाल में मौजूद महिलाओं ने राम-जन्म होते ही सोहर गीत गाया और पुष्प-वर्षा की। इस दौरान समिति के अध्यक्ष गंगाराम तिवारी, अनिल अग्रहरि, सोनू, शहंशाह आलम, रविकांत प्रजापति, कौशल गुप्ता, श्रवण तिवारी, विजय गुप्ता, संदीप वरुण, अतीकुर्रहमान, विनय शुक्ल, रमेश गुप्ता, रामकुमार गुप्ता, रामनरेश गौड़, विष्णु गुप्ता, बृजेश, मुकेश और गोलू आदि लोग मौजूद थे।
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