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रक्षाबंधन : घर पहुंचने की होड़, ट्रेनों-बसों में बढ़ी भीड़
Sat, 22 Aug 2026 12:22 AM IST
गोरखपुर ब्यूरो
संवाद न्यूज एजेंसी, सिद्धार्थनगर
संवाद न्यूज एजेंसी, सिद्धार्थनगर
Updated Sat, 22 Aug 2026 12:22 AM IST
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संवाद न्यूज एजेंसी
सिद्धार्थनगर। रक्षाबंधन का त्योहार नजदीक आते ही परदेस में रहकर रोजी-रोटी कमाने वालों की घर वापसी शुरू हो गई है। दिल्ली, मुंबई, गाजियाबाद, नोएडा, लखनऊ और कानपुर समेत बड़े शहरों में काम करने वाले सिद्धार्थनगर के प्रवासी ट्रेनों और बसों से घर लौट रहे हैं। स्टेशन से लेकर बस अड्डों तक यात्रियों की भीड़ बढ़ गई है।
हाथों में बैग, बच्चों के साथ सफर और अपनों से मिलने की उत्सुकता के बीच त्योहार का माहौल साफ दिखाई देने लगा है। आरक्षित सीट नहीं मिलने पर कई लोग सामान्य कोच और बसों से सफर कर रहे हैं।
दिल्ली में काम करने वाले बढ़नी क्षेत्र के अरविंद कुमार ने बताया कि रक्षाबंधन पर हर साल घर आने की कोशिश करते हैं। बहन कई दिन से आने के लिए कह रही थी, इसलिए काम से छुट्टी लेकर घर लौट रहे हैं। नोएडा में नौकरी करने वाले विनय यादव ने बताया कि इस बार बहन के लिए उसकी पसंद का उपहार लेकर आए हैं। त्योहार पर परिवार के साथ बैठकर खाना खाने और कुछ समय साथ बिताने की खुशी अलग है।
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मुंबई में काम करने वाले डुमरियागंज के सुरेश प्रजापति भी त्योहार से पहले घर पहुंचने की तैयारी में हैं।
उन्होंने बताया कि लंबी दूरी की यात्रा में परेशानी होती है, लेकिन रक्षाबंधन पर घर पहुंचने का उत्साह सारी थकान दूर कर देता है। वहीं इटवा के अभिषेक पांडेय, जो नोएडा में काम करते हैं, कहते हैं कि बहन से राखी बंधवाने के लिए घर आने का इंतजार पूरे परिवार को रहता है।
गांवों में लौटने लगे परदेसी, घरों में बढ़ी रौनक : प्रवासियों के घर लौटने से गांवों में भी रौनक बढ़ने लगी है। जिन घरों में महीनों से बेटे या भाई के आने का इंतजार था, वहां तैयारियां शुरू हो गई हैं। बहनें राखी और मिठाई की खरीदारी कर रही हैं।
कई परिवारों में बाहर से आने वाले भाई की पसंद का खाना बनाने की तैयारी है। शगुन सिंह बताती हैं कि उनका भाई लखनऊ में नौकरी करता है और रक्षाबंधन पर घर आ रहा है। राखी बांधने के साथ बचपन की यादें भी ताजा होंगी।
वहीं पूजा यादव का कहना है कि भाई सालभर बाहर रहता है। त्योहार पर उसके घर आने से परिवार पूरा लगता है।
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सिद्धार्थनगर। रक्षाबंधन का त्योहार नजदीक आते ही परदेस में रहकर रोजी-रोटी कमाने वालों की घर वापसी शुरू हो गई है। दिल्ली, मुंबई, गाजियाबाद, नोएडा, लखनऊ और कानपुर समेत बड़े शहरों में काम करने वाले सिद्धार्थनगर के प्रवासी ट्रेनों और बसों से घर लौट रहे हैं। स्टेशन से लेकर बस अड्डों तक यात्रियों की भीड़ बढ़ गई है।
हाथों में बैग, बच्चों के साथ सफर और अपनों से मिलने की उत्सुकता के बीच त्योहार का माहौल साफ दिखाई देने लगा है। आरक्षित सीट नहीं मिलने पर कई लोग सामान्य कोच और बसों से सफर कर रहे हैं।
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दिल्ली में काम करने वाले बढ़नी क्षेत्र के अरविंद कुमार ने बताया कि रक्षाबंधन पर हर साल घर आने की कोशिश करते हैं। बहन कई दिन से आने के लिए कह रही थी, इसलिए काम से छुट्टी लेकर घर लौट रहे हैं। नोएडा में नौकरी करने वाले विनय यादव ने बताया कि इस बार बहन के लिए उसकी पसंद का उपहार लेकर आए हैं। त्योहार पर परिवार के साथ बैठकर खाना खाने और कुछ समय साथ बिताने की खुशी अलग है।
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मुंबई में काम करने वाले डुमरियागंज के सुरेश प्रजापति भी त्योहार से पहले घर पहुंचने की तैयारी में हैं।
उन्होंने बताया कि लंबी दूरी की यात्रा में परेशानी होती है, लेकिन रक्षाबंधन पर घर पहुंचने का उत्साह सारी थकान दूर कर देता है। वहीं इटवा के अभिषेक पांडेय, जो नोएडा में काम करते हैं, कहते हैं कि बहन से राखी बंधवाने के लिए घर आने का इंतजार पूरे परिवार को रहता है।
गांवों में लौटने लगे परदेसी, घरों में बढ़ी रौनक : प्रवासियों के घर लौटने से गांवों में भी रौनक बढ़ने लगी है। जिन घरों में महीनों से बेटे या भाई के आने का इंतजार था, वहां तैयारियां शुरू हो गई हैं। बहनें राखी और मिठाई की खरीदारी कर रही हैं।
कई परिवारों में बाहर से आने वाले भाई की पसंद का खाना बनाने की तैयारी है। शगुन सिंह बताती हैं कि उनका भाई लखनऊ में नौकरी करता है और रक्षाबंधन पर घर आ रहा है। राखी बांधने के साथ बचपन की यादें भी ताजा होंगी।
वहीं पूजा यादव का कहना है कि भाई सालभर बाहर रहता है। त्योहार पर उसके घर आने से परिवार पूरा लगता है।