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Siddharthnagar News: विजिलेंस पहुंची तो जांच से पहले बंद हो गया टिकट मशीन का सर्वर
Tue, 05 Dec 2023 02:01 AM IST
गोरखपुर ब्यूरो
संवाद न्यूज एजेंसी, सिद्धार्थनगर
संवाद न्यूज एजेंसी, सिद्धार्थनगर
Updated Tue, 05 Dec 2023 02:01 AM IST
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रंलवे स्टेशन सिद्धार्थनगर पर टिकट के लिए कतार में खडे़ यात्री।
सिद्धार्थनगर। रेलवे स्टेशन सिद्धार्थनगर में सोमवार सुबह 10 बजे टिकट दलाली की जांच करने गोरखपुर की विजिलेंस पहुंची तो काउंटर पर लगी टिकट मशीन का सर्वर ही बंद हो गया, जबकि टीम के सदस्य यात्रियों में घुल मिलकर दलालों को पकड़ने की कोशिश में आए थे। मशीन बंद थी तो लोगों को बाहर से टिकट खरीदना पड़ रहा था। हालांकि, टीम ने पांच लाेगों से बातचीत करके जानकारी लेने की कोशिश की।
सिद्धार्थनगर रेलवे स्टेशन पर मुंबई सहित अन्य शहरों को जाने वाली ट्रेन में तत्काल टिकट बुकिंग के लिए अलग से काउंटर आरक्षित किया गया है, लेकिन दलालों का यहां पर इतना तगड़ा नेटवर्क है कि शायद ही किसी को टिकट मिल पाए। अगर किसी को टिकट मिल जाए तो समझिए की वह जंग जीत गया। कारण हर दिन यही होता है कि टिकट के लिए रात में ही नंबर लगा दिए और जब सुबह बारी आई तो पता चला कि टिकट बुक हो चुका है। लेना हो तो वेटिंग लीजिए, ऐसा लोगों के साथ हर दिन होता है।
टिकट बुकिंग मेें दलालों की दखल को लेकर किसी यात्री ने शिकायत दर्ज कराई थी। मिली शिकायत के बाद सोमवार को गोरखपुर रेलवे विजिलेंस के दो निरीक्षक सिद्धार्थनगर रेलवे स्टेशन पहुंचे। यहां वह यात्रियों के बीच में गए और टिकट के बारे में एक-एक लोगों से बात की। इसी बीच तीन अलग-अलग लोगों ने शिकायत की कि कोई दो रात से तो कोई तीन रात से मुंबई के टिकट के लिए प्लेटफाॅर्म पर सोकर लाइन में लग रहा है। पहले और दूसरे नंबर पर होने के बाद भी जब काउंटर पर पहुंच रहे हैं तो बताया जा रहा है कि टिकट बुक हो चुका है। वेटिंग टिकट ले लो।
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यह खेल मात्र 10 मिनट में होता है। कभी सर्वर डाउन को कभी खिड़की बंद करके टिकट बेच देते हैं। इसके बाद टीम ने तीनों यात्रियों से बारी-बारी करके बात की और नाम-पता नोट किए। लेकिन जब मशीन की जांच करने की कोशिश की तो पता चला कि सर्वर डाउन है और मशीन 10:30 बजे से फेल बता रही है। जिसकी वजह से टीम जांच कर पाने में विफल रही। अगर जांच होती तो गड़बड़ी का खेल उजागर हो पाता। नाम नहीं छापने की शर्त पर जांच टीम ने बताया कि वह जांच करके उच्चाधिकारियों को रिपोर्ट कर देंगे। अगर मशीन चलती तो जांच हो जाती है। कई घंटे टीम के लोग जमे रहे।
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दो रात सोया, जब बारी आई तो बुक हो चुका था टिकट
उसका बाजार निवासी सत्तर की उम्र लगभग (60) वर्ष होगी। वह हाथ में झोली और चद्दर लिए हुए थे। उन्होंने बताया कि मुंबई का टिकट बुक करना है। दो दिन से रात में ही वह आ जाते हैं कि उनका नंबर पहले रहे और बुकिंग हो जाए। ठंड में सोते हैं, दो रात में टिकट बुक नहीं हुआ। जब बारी आई तो 10 मिनट में काउंटर बंद हो गया बोला गया टिकट बुक हो चुका है। टिकट दलालों के हाथ बेचने का कार्य चल रहा है।
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तीन रात जागने के बाद भी नहीं मिला टिकट
नगर के आजाद नगर निवासी साहेब आलम ने बताया कि दो दिसंबर की रात से मुंबई का टिकट बुक करने के लिए पूरी रात जाग रहे हैं। तीन और चार नंबर पर होने के बाद भी टिकट नहीं मिल रहा है। यहां बुकिंग में बड़ा खेल हो रहा है। सर्वर डाउन बताकर टिकट बेच लिया जा रहा है। जिसकी वजह से लाइन में लगे लोगों को टिकट नहीं मिल पा रहा है।
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तीन बजे रात में पहुंचा, फिर भी नहीं मिला टिकट
बांसी कस्बा निवासी रविंद्र ने बताया कि उन्हें मुंबई जाना है। चालू में जाने पर बहुत कठिनाई होती है। इसलिए सोंचा की टिकट बुक कर लें। लेकिन यहां तीन बजे रात में आने के बाद भी टिकट नहीं मिला। जबकि चार नंबर पर लाइन में थे। काउंटर बंद कर दिया गया। 10 मिनट में खुला तो पता चला कि टिकट बुक हो चुका है। यहां टिकट में बड़ा खेल हो रहा है।
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विजिलेंस की टीम जांच करने के लिए समय-समय पर आती रहती है। इस बार भी आए हैं। वह अपने स्तर से जांच करके कार्रवाई करते हैं।
-डीके उपाध्याय, अधीक्षक सिद्धार्थनगर रेलवे स्टेशन
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सिद्धार्थनगर रेलवे स्टेशन पर मुंबई सहित अन्य शहरों को जाने वाली ट्रेन में तत्काल टिकट बुकिंग के लिए अलग से काउंटर आरक्षित किया गया है, लेकिन दलालों का यहां पर इतना तगड़ा नेटवर्क है कि शायद ही किसी को टिकट मिल पाए। अगर किसी को टिकट मिल जाए तो समझिए की वह जंग जीत गया। कारण हर दिन यही होता है कि टिकट के लिए रात में ही नंबर लगा दिए और जब सुबह बारी आई तो पता चला कि टिकट बुक हो चुका है। लेना हो तो वेटिंग लीजिए, ऐसा लोगों के साथ हर दिन होता है।
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टिकट बुकिंग मेें दलालों की दखल को लेकर किसी यात्री ने शिकायत दर्ज कराई थी। मिली शिकायत के बाद सोमवार को गोरखपुर रेलवे विजिलेंस के दो निरीक्षक सिद्धार्थनगर रेलवे स्टेशन पहुंचे। यहां वह यात्रियों के बीच में गए और टिकट के बारे में एक-एक लोगों से बात की। इसी बीच तीन अलग-अलग लोगों ने शिकायत की कि कोई दो रात से तो कोई तीन रात से मुंबई के टिकट के लिए प्लेटफाॅर्म पर सोकर लाइन में लग रहा है। पहले और दूसरे नंबर पर होने के बाद भी जब काउंटर पर पहुंच रहे हैं तो बताया जा रहा है कि टिकट बुक हो चुका है। वेटिंग टिकट ले लो।
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यह खेल मात्र 10 मिनट में होता है। कभी सर्वर डाउन को कभी खिड़की बंद करके टिकट बेच देते हैं। इसके बाद टीम ने तीनों यात्रियों से बारी-बारी करके बात की और नाम-पता नोट किए। लेकिन जब मशीन की जांच करने की कोशिश की तो पता चला कि सर्वर डाउन है और मशीन 10:30 बजे से फेल बता रही है। जिसकी वजह से टीम जांच कर पाने में विफल रही। अगर जांच होती तो गड़बड़ी का खेल उजागर हो पाता। नाम नहीं छापने की शर्त पर जांच टीम ने बताया कि वह जांच करके उच्चाधिकारियों को रिपोर्ट कर देंगे। अगर मशीन चलती तो जांच हो जाती है। कई घंटे टीम के लोग जमे रहे।
दो रात सोया, जब बारी आई तो बुक हो चुका था टिकट
उसका बाजार निवासी सत्तर की उम्र लगभग (60) वर्ष होगी। वह हाथ में झोली और चद्दर लिए हुए थे। उन्होंने बताया कि मुंबई का टिकट बुक करना है। दो दिन से रात में ही वह आ जाते हैं कि उनका नंबर पहले रहे और बुकिंग हो जाए। ठंड में सोते हैं, दो रात में टिकट बुक नहीं हुआ। जब बारी आई तो 10 मिनट में काउंटर बंद हो गया बोला गया टिकट बुक हो चुका है। टिकट दलालों के हाथ बेचने का कार्य चल रहा है।
तीन रात जागने के बाद भी नहीं मिला टिकट
नगर के आजाद नगर निवासी साहेब आलम ने बताया कि दो दिसंबर की रात से मुंबई का टिकट बुक करने के लिए पूरी रात जाग रहे हैं। तीन और चार नंबर पर होने के बाद भी टिकट नहीं मिल रहा है। यहां बुकिंग में बड़ा खेल हो रहा है। सर्वर डाउन बताकर टिकट बेच लिया जा रहा है। जिसकी वजह से लाइन में लगे लोगों को टिकट नहीं मिल पा रहा है।
तीन बजे रात में पहुंचा, फिर भी नहीं मिला टिकट
बांसी कस्बा निवासी रविंद्र ने बताया कि उन्हें मुंबई जाना है। चालू में जाने पर बहुत कठिनाई होती है। इसलिए सोंचा की टिकट बुक कर लें। लेकिन यहां तीन बजे रात में आने के बाद भी टिकट नहीं मिला। जबकि चार नंबर पर लाइन में थे। काउंटर बंद कर दिया गया। 10 मिनट में खुला तो पता चला कि टिकट बुक हो चुका है। यहां टिकट में बड़ा खेल हो रहा है।
विजिलेंस की टीम जांच करने के लिए समय-समय पर आती रहती है। इस बार भी आए हैं। वह अपने स्तर से जांच करके कार्रवाई करते हैं।
-डीके उपाध्याय, अधीक्षक सिद्धार्थनगर रेलवे स्टेशन