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रचना धर्मिता शिक्षक की पहचान होनी चाहिए : कुलपति
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रचना धर्मिता शिक्षक की पहचान होनी चाहिए : कुलपति
- सिद्धार्थ विश्वविद्यालय में नारी विमर्श एवं यथार्थ पुस्तक का विमोचन
संवाद न्यूज एजेंसी
सिद्धार्थनगर। सिद्धार्थ विश्वविद्यालय में कुलपति प्रो. हरि बहादुर श्रीवास्तव ने शुक्रवार को पं. दीनदयाल उपाध्याय शोध पीठ की निदेशक प्रो. मंजु द्विवेदी की नारी विमर्श एवं यथार्थ विषय पर आधारित पुस्तक का विमोचन किया। इस मौके पर कुलपति ने कहा कि किसी भी शिक्षक के जीवन में पुस्तक लेखन और समाज तक उसकी पहुंच का बहुत ही मूल्य होता है। रचना धर्मिता शिक्षक की स्वाभाविक पहचान होनी चाहिए।
कुलपति ने कहा कि प्रो. मंजु द्विवेदी ने शोध पीठ में अल्प समय में पुस्तक की रचना करना और उसका प्रकाशन करा लेना यह उनकी क्षमता का परिचायक है। पुस्तक का विषय भी बहुत समचीन है। आज पूरी दुनिया स्त्री विमर्श पर चर्चा कर रही है।
भारत की ऋषि परंपरा में नारी देवी स्वरूप में स्वीकार की गई है। आज भी परिवार में नारी का सर्वोच्च स्थान है। आज नारी सभी क्षेत्रों में परचम लहरा रही हैं। यह पुस्तक केवल विद्यार्थियों और शिक्षण संस्थाओं के लिए नहीं, बल्कि समाज के प्रत्येक व्यक्ति के लिए अत्यंत महत्वपूर्ण है।
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पुस्तक की लेखिका एवं शोध की निदेशक प्रो. मंजु द्विवेदी ने कहा कि उनका प्रयास रहा है कि प्रति वर्ष किसी ऐसे समसामयिक मुद्दों को लेकर एक पुस्तक लिखी जाए। उसी का सकारात्मक परिणाम है कि आज कुलपति के हाथों पुस्तक लोकार्पित हो रही है। नारी समाज का सशक्त होना आत्मनिर्भर होना चिंतनशील होना सशक्त भारत की पर्याय है। इसलिए मैंने इस पुस्तक का लेखन किया है।
पुस्तक की भूमिका एमबीए विभाग के प्रो. सौरव ने प्रस्तुत किया। इस दौरान कुलसचिव डॉ अमरेंद्र कुमार सिंह, प्रो. दीपक बाबू, प्रो. देवेश कुमार, प्रो हरीश कुमार शर्मा, प्रो. प्रकृति राय, वित्त अधिकारी अजय सोनकर उपस्थित रहे।
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- सिद्धार्थ विश्वविद्यालय में नारी विमर्श एवं यथार्थ पुस्तक का विमोचन
संवाद न्यूज एजेंसी
सिद्धार्थनगर। सिद्धार्थ विश्वविद्यालय में कुलपति प्रो. हरि बहादुर श्रीवास्तव ने शुक्रवार को पं. दीनदयाल उपाध्याय शोध पीठ की निदेशक प्रो. मंजु द्विवेदी की नारी विमर्श एवं यथार्थ विषय पर आधारित पुस्तक का विमोचन किया। इस मौके पर कुलपति ने कहा कि किसी भी शिक्षक के जीवन में पुस्तक लेखन और समाज तक उसकी पहुंच का बहुत ही मूल्य होता है। रचना धर्मिता शिक्षक की स्वाभाविक पहचान होनी चाहिए।
कुलपति ने कहा कि प्रो. मंजु द्विवेदी ने शोध पीठ में अल्प समय में पुस्तक की रचना करना और उसका प्रकाशन करा लेना यह उनकी क्षमता का परिचायक है। पुस्तक का विषय भी बहुत समचीन है। आज पूरी दुनिया स्त्री विमर्श पर चर्चा कर रही है।
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भारत की ऋषि परंपरा में नारी देवी स्वरूप में स्वीकार की गई है। आज भी परिवार में नारी का सर्वोच्च स्थान है। आज नारी सभी क्षेत्रों में परचम लहरा रही हैं। यह पुस्तक केवल विद्यार्थियों और शिक्षण संस्थाओं के लिए नहीं, बल्कि समाज के प्रत्येक व्यक्ति के लिए अत्यंत महत्वपूर्ण है।
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पुस्तक की लेखिका एवं शोध की निदेशक प्रो. मंजु द्विवेदी ने कहा कि उनका प्रयास रहा है कि प्रति वर्ष किसी ऐसे समसामयिक मुद्दों को लेकर एक पुस्तक लिखी जाए। उसी का सकारात्मक परिणाम है कि आज कुलपति के हाथों पुस्तक लोकार्पित हो रही है। नारी समाज का सशक्त होना आत्मनिर्भर होना चिंतनशील होना सशक्त भारत की पर्याय है। इसलिए मैंने इस पुस्तक का लेखन किया है।
पुस्तक की भूमिका एमबीए विभाग के प्रो. सौरव ने प्रस्तुत किया। इस दौरान कुलसचिव डॉ अमरेंद्र कुमार सिंह, प्रो. दीपक बाबू, प्रो. देवेश कुमार, प्रो हरीश कुमार शर्मा, प्रो. प्रकृति राय, वित्त अधिकारी अजय सोनकर उपस्थित रहे।