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घर-घर पूजे गए नागदेव
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इटवा क्षेत्र के कटेश्वरनाथ स्थित शिव मंदिर पर नागपंचमी के अवसर पर पूजा अर्चना करते श्रद्धालु। स?
- फोटो : SIDDHARTHNAGAR
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घर-घर पूजे गए नागदेव
शहर से गांव तक दूध और लावा चढ़ाकर लोगों ने परंपरागत ढंग से की पूजा
संवाद न्यूज एजेंसी
सिद्धार्थनगर/बांसी। नागपंचमी का पर्व शुक्रवार को परंपरागत तरीके से मनाया गया। घरों-मंदिरों में दूध-लावा चढ़ाकर श्रद्धालुओं ने नाग देवता की विधि-विधान से पूजा की। घर-घर में इस मौके पर पकवान भी बनाए गए। ग्रामीण क्षेत्र में कई जगहों पर दंगल व कबड्डी का भी आयोजन हुआ।
श्रावण मास के शुक्ल पक्ष की पंचमी को नागपंचमी का पर्व मनाया जाता है। इस दिन नागों की पूजा की जाती है तथा नागों का दर्शन करने को पुण्य माना जाता है। सावन में इस पर्व के पड़ने के चलते यह भी मान्यता रही है कि नागदेवता की पूजा करने से व्यक्ति व उसके परिजन सर्पों के डंसने से बचे रहते हैं। इस पर्व की तैयारियां सुबह से ही घरों में चलती रही। घर के हर कोने की साफ-सफाई की गई।
नाग पंचमी के दिन शहर एवं ग्रामीण क्षेत्रों में लोगों ने हर्षोल्लास से पर्व मनाया। शहर समेत गांव में स्थित शिवालयों एवं अन्य मंदिरों के साथ ही घर पर और सामूहिक स्थलों पर नाग देवता के चित्र पर दूध और लावा चढ़ाकर पूजन हुआ। कई गांवों में आल्हा के आयोजन हुए जिसे सुनने के लिए लोगों की भीड़ जुटी।
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वहीं गांव में स्थित खेल के मैदान, खलिहान एवं बाग आदि में युवाओं ने कबड्डी और कुश्ती प्रतियोगिता में भाग लिया। बांसी प्रतिनिधि के अनुसार, क्षेत्र में लोगों ने घर में नाग देवता की पूजा की और शाम के समय परंपरा के अनुसार राप्ती पुल पर लोग पहुंचे। जहां मेले जैसा माहौल रहा। बच्चों ने राप्ती पुल पर खुशी पूर्वक गुड़िया पीटकर परंपरा का निर्वहन किया। इस दौरान नगर पालिका परिषद की तरफ से राप्ती पुल पर साफ -सफाई की व्यापक व्यवस्था की गई थी।
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शहर से गांव तक दूध और लावा चढ़ाकर लोगों ने परंपरागत ढंग से की पूजा
संवाद न्यूज एजेंसी
सिद्धार्थनगर/बांसी। नागपंचमी का पर्व शुक्रवार को परंपरागत तरीके से मनाया गया। घरों-मंदिरों में दूध-लावा चढ़ाकर श्रद्धालुओं ने नाग देवता की विधि-विधान से पूजा की। घर-घर में इस मौके पर पकवान भी बनाए गए। ग्रामीण क्षेत्र में कई जगहों पर दंगल व कबड्डी का भी आयोजन हुआ।
श्रावण मास के शुक्ल पक्ष की पंचमी को नागपंचमी का पर्व मनाया जाता है। इस दिन नागों की पूजा की जाती है तथा नागों का दर्शन करने को पुण्य माना जाता है। सावन में इस पर्व के पड़ने के चलते यह भी मान्यता रही है कि नागदेवता की पूजा करने से व्यक्ति व उसके परिजन सर्पों के डंसने से बचे रहते हैं। इस पर्व की तैयारियां सुबह से ही घरों में चलती रही। घर के हर कोने की साफ-सफाई की गई।
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नाग पंचमी के दिन शहर एवं ग्रामीण क्षेत्रों में लोगों ने हर्षोल्लास से पर्व मनाया। शहर समेत गांव में स्थित शिवालयों एवं अन्य मंदिरों के साथ ही घर पर और सामूहिक स्थलों पर नाग देवता के चित्र पर दूध और लावा चढ़ाकर पूजन हुआ। कई गांवों में आल्हा के आयोजन हुए जिसे सुनने के लिए लोगों की भीड़ जुटी।
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वहीं गांव में स्थित खेल के मैदान, खलिहान एवं बाग आदि में युवाओं ने कबड्डी और कुश्ती प्रतियोगिता में भाग लिया। बांसी प्रतिनिधि के अनुसार, क्षेत्र में लोगों ने घर में नाग देवता की पूजा की और शाम के समय परंपरा के अनुसार राप्ती पुल पर लोग पहुंचे। जहां मेले जैसा माहौल रहा। बच्चों ने राप्ती पुल पर खुशी पूर्वक गुड़िया पीटकर परंपरा का निर्वहन किया। इस दौरान नगर पालिका परिषद की तरफ से राप्ती पुल पर साफ -सफाई की व्यापक व्यवस्था की गई थी।