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Siddharthnagar News: रडार पर मरीजों के ‘सौदागर’ निजी एंबुलेंस पर कसेगा शिकंजा

Sat, 30 May 2026 01:49 AM IST
गोरखपुर ब्यूरो संवाद न्यूज एजेंसी, सिद्धार्थनगर
संवाद न्यूज एजेंसी, सिद्धार्थनगर Updated Sat, 30 May 2026 01:49 AM IST
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Private ambulances, the 'traders' of patients, are on the radar and the noose will be tightened.
सिद्धार्थनगर। अवैध रूप से बिना पंजीकरण और मानक पूरा किए संचालित की जा रही एंबुलेंस के संचालकों पर अब कार्रवाई होगी। बिना सुविधाओं और ऑक्सीजन के मरीजों की जान जोखिम में डालकर दौड़ रही इन गाड़ियों पर शिकंजा कसा जाएगा।
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खासतौर पर मरीजों को बहकाकर सरकारी से निजी अस्पताल तक ले जाने और अस्पताल से सड़क तक दौड़ने वाली सभी एंबुलेंस की संभागीय परिवहन विभाग जांच करेगा और कमी पाए जाने पर सीज करने के साथ संचालकों पर भी कार्रवाई की जाएगी। इसकी तैयारी शुरू हो चुकी है।
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जनपद में मरीजों को निजी अस्पतालों तक पहुंचाने के नाम पर मनमानी और कथित सौदेबाजी करने का भी मामला सामने आ चुका है, जहां अस्पताल और एंबुलेंस माफिया के गठजोड़ से मरीजों को बेचने का खुलासा हुआ था। परिवहन विभाग ऐसे मामलों में सख्ती बरतेगा, जिससे गाड़ियों पर कार्रवाई तो होगी ही।
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इससे इनका नेटवर्क टूटेगा और मरीजों को शोषण बंद होगा। जनपद में संचालित कुछ निजी अस्पताल में यह खेल चल रहा है। एंबुलेंस संचालित करने के लिए वह किसी को भी लगा देते हैं जो मरीजों को उनके अस्पताल तक पहुंचाने के साथ ही मनमाना किराया भी वसूल करते हैं।
जनपद में बड़े पैमाने पर निजी अस्पताल संचालित हो रहे हैं। अस्पतालों के पास एंबुलेंस भी हैं। इनमें से कुछ एंबुलेंस सरकारी अस्पतालों के पास भी मंडराते नजर आ जाएंगे, जो मरीजों के रेफर होते ही सरकारी के अस्पताल के बजाय बेहतर इलाज का झांसा देकर निजी और अपने तय अस्पताल तक पहुंचा देते हैं, जहां पर उनकी कमाई तो सेट होती ही है।

वहीं, लखनऊ, गोरखपुर और अन्य शहरों के लिए रेफर होने वाले मरीजों से मनमाना किराया भी वसूला जाता है। जांच में कई बार यह बात सामने आ चुकी है कि इन एंबुलेंस में सुविधाओं का अभाव रहता है। जैसे की ऑक्सीजन, एक एक्सपर्ट स्वास्थ्यकर्मी जो मरीज के हालात बिगड़ने के साथ उसे संभाल सके और भेजे गए अस्पताल पहुंचने तक उसके स्वास्थ्य की देखभाल कर सके, वे मौजूद नहीं रहते हैं। कई बार इस लापरवाही में मरीजों की जान चली जाती और तीमारदार गंभीर होना मानकर बैठ जाता है। ऐसे एंबुलेंस बिना सुविधा संचालित होने वाली निजी एंबुलेंसों पर कार्रवाई के निर्देश दिए हैं।
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