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Siddharthnagar News: प्रसूता की मौत के बाद अस्पताल का बोर्ड उखाड़कर फरार हो गया संचालक
Wed, 18 Oct 2023 11:18 PM IST
गोरखपुर ब्यूरो
संवाद न्यूज एजेंसी, सिद्धार्थनगर
संवाद न्यूज एजेंसी, सिद्धार्थनगर
Updated Wed, 18 Oct 2023 11:18 PM IST
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लोटन में निजी अस्पताल में ऑपरेशन के बाद प्रसूता की मौत के बाद फरार हो गए डॉक्टर, कर्मचारी
स्वास्थ्य विभाग की टीम ने अस्पताल पर चस्पा किया नोटिस, पहले भी इलाज में लापरवाही से हो गई थी तीन मरीजों की मौत
संवाद न्यूज एजेंसी
सिद्धार्थनगर। शहर से कस्बे तक के सरकारी अस्पतालों में मरीज माफिया की घुसपैठ की वजह से मरीजों की जान खतरे में पड़ रही है। सरकारी अस्पतालों में सांठगांठ से ये माफिया मरीजों को बिना मानक के निजी अस्पताल में पहुंचा दे रहे हैं।
लोटन के निजी अस्पताल में ऑपरेशन के बाद महिला मरीज की मौत के बाद जांच में पता चला कि अस्पताल अवैध रूप से संचालित हो रहा था। हंगामा हुआ, पुलिस पहुंची तो अस्पताल का बोर्ड उखाड़कर संचालक, डॉक्टर और कर्मचारी फरार हो गए।
लोटन के आर्यन हॉस्पिटल में इलाज के दौरान महिला की मौत हुई है। अब स्वास्थ्य विभाग के अधिकारी भी नहीं बता पा रहे हैं कि अस्पताल संचालक कौन है, उसमें योग्य डॉक्टर थे या नहीं। यह अस्पताल बिना पंजीयन के संचालित हो रहा था और पंजीयन के लिए उसका आवेदन भी नहीं जमा है।
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सीएचसी लोटन में मरीज पहुंचा ताे सिजेरियन डिलीवरी का केस बताकर मरीज को माधव प्रसाद त्रिपाठी मेडकल कॉलेज रेफर कर दिया गया। मौके पर मौजूद एक व्यक्ति की सलाह से परिजन गर्भवती महिला को निजी अस्पताल ले गए, जहां अधिक रक्तस्राव होने के बाद महिला ने दम तोड़ दिया, जबकि बच्चा जीवित है। सीएचसी के अधीक्षक डाॅ. संतोष गुप्ता ने बताया कि सिजेरियन डिलीवरी की सुविधा नहीं होने के कारण मरीज को रेफर किया गया। इस मामले में पुलिस पहुंची थी, लेकिन परिवार के लोगों ने तहरीर नहीं दी है।
स्वास्थ्य विभाग की टीम ने अवैध रूप से निजी अस्पताल के संचालन के मामले में बंद हो गए निजी अस्पताल पर नोटिस चस्पा किया। डिप्टी सीएमओ एवं नोडल अफसर प्राइवेट हॉस्पिटल डॉ. संजय गुप्ता ने बताया कि परिजनों ने शिकायत नहीं की है। अवैध रूप से अस्पताल संचालन के मामले में कार्रवाई की जाएगी।
शोहरतगढ़ में भी रेफर मरीज की हुई थी मौत
29 जुलाई को शोहरतगढ़ थाना क्षेत्र महमुदवा ग्रांट निवासी नीलम उर्फ रीमा (27) पत्नी बृजलाल को प्रसव पीड़ा होने पर परिजन उसे पहले शोहरतगढ़ सीएचसी ले गए थे। वहां चिकित्सक की ओर से उसे रेफर कर दिया गया था। उसके बाद सीएचसी से उसे किसी ने एक प्राइवेट हॉस्पिटल पहुंचाया। जहां सामान्य प्रसव होने के बाद महिला की तबीयत बिगड़ गई थी। वहां से मेडिकल कॉलेज ले जाते समय मरीज की मौत हो गई। इस मामले में परिजनों ने केस दर्ज कराया है।
पुलिस अधीक्षक अभिषेक अग्रवाल के पत्र पर सीएमओ ने चिकित्सकीय लापरवाही की जांच के लिए तीन चिकित्सकों की टीम बनाई है। इस मामले में विधायक विनय वर्मा ने डिप्टी सीएम एवं स्वास्थ्य मंत्री ब्रजेश पाठक से शिकायत की। डिप्टी सीएम के निर्देश पर जांच शुरू हुई तो 19 निजी अस्पताल एवं जांच सेंटर सील किए गए।
पेट में छोड़ दिया था स्पंज तो जांच से पहले उखाड़ लिया था बोर्ड
दो माह पहले उसका क्षेत्र के नव जीवन हॉस्पिटल में महिला के ऑपरेशन के दौरान डॉक्टर व स्वास्थ्य की लापरवाही उसके पेट में स्पंज (खून सूखाने वाला कपड़े का टुकड़ा) छूट गया था। इस कारण महिला की तबीयत बिगड़ती गई और शोहरतगढ़ के एक निजी अस्पताल में इलाज के दौरान मौत हो गई। संचालक स्वास्थ्य विभाग की टीम के पहुंचने से पहले ही अस्पताल का बोर्ड उखाड़कर फरार हो गया था। शबनम याहिया हॉस्पिटल इटवा में प्रसव के बाद मरीज के पास डॉक्टर मौजूद नहीं थीं। तबीयत बिगड़ने पर जज्जा-बच्चा ने दम तोड़ दिया। इस मामले में स्वास्थ्य विभाग ने केस दर्ज कराया है।
खून दिया, फिर भी भेज दिया बाहर
शहर के बेलसड़ निवासी रघुनाथ ने बताया कि उनकी पत्नी खुशबू को प्रसव पीड़ा होने पर उन्हाेंने माधव प्रसाद त्रिपाठी मेडिकल कॉलेज में भर्ती कराया था। डॉक्टर के अनुसार खून की कमी थी। उन्होंने खून दिया और ऑपरेशन की तैयारी में जुटे थे। इसी बीच एक महिला कर्मी ने बताया कि अपना मरीज यहां से ले जाओ स्थिति गंभीर है। उसी दौरान उस महिला कर्मी ने खून की रफ्तार बढ़ा दी तो कहासुनी भी हुई, लेकिन वह डॉक्टर को नहीं ढूंढ पाए। रेफर की पर्ची भी नहीं मिली और वे किसी की सलाह पर अपनी मरीज को शहर के एक निजी अस्पताल ले गए। जहां जच्चा-बच्चा की जान बच गई। रघुनाथ ने बताया कि निजी अस्पताल में करीब 35 हजार रुपये खर्च हुए, लेकिन जच्चा-बच्चा सुरक्षित हैं। वह मुंबई में कमाते हैं। शिकायत करते तो जांच में जाना जरूरी होता, इसलिए शिकायत नहीं की।
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लोटन में निजी अस्पताल में ऑपरेशन के बाद प्रसूता की मौत के बाद फरार हो गए डॉक्टर, कर्मचारी
स्वास्थ्य विभाग की टीम ने अस्पताल पर चस्पा किया नोटिस, पहले भी इलाज में लापरवाही से हो गई थी तीन मरीजों की मौत
संवाद न्यूज एजेंसी
सिद्धार्थनगर। शहर से कस्बे तक के सरकारी अस्पतालों में मरीज माफिया की घुसपैठ की वजह से मरीजों की जान खतरे में पड़ रही है। सरकारी अस्पतालों में सांठगांठ से ये माफिया मरीजों को बिना मानक के निजी अस्पताल में पहुंचा दे रहे हैं।
लोटन के निजी अस्पताल में ऑपरेशन के बाद महिला मरीज की मौत के बाद जांच में पता चला कि अस्पताल अवैध रूप से संचालित हो रहा था। हंगामा हुआ, पुलिस पहुंची तो अस्पताल का बोर्ड उखाड़कर संचालक, डॉक्टर और कर्मचारी फरार हो गए।
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लोटन के आर्यन हॉस्पिटल में इलाज के दौरान महिला की मौत हुई है। अब स्वास्थ्य विभाग के अधिकारी भी नहीं बता पा रहे हैं कि अस्पताल संचालक कौन है, उसमें योग्य डॉक्टर थे या नहीं। यह अस्पताल बिना पंजीयन के संचालित हो रहा था और पंजीयन के लिए उसका आवेदन भी नहीं जमा है।
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सीएचसी लोटन में मरीज पहुंचा ताे सिजेरियन डिलीवरी का केस बताकर मरीज को माधव प्रसाद त्रिपाठी मेडकल कॉलेज रेफर कर दिया गया। मौके पर मौजूद एक व्यक्ति की सलाह से परिजन गर्भवती महिला को निजी अस्पताल ले गए, जहां अधिक रक्तस्राव होने के बाद महिला ने दम तोड़ दिया, जबकि बच्चा जीवित है। सीएचसी के अधीक्षक डाॅ. संतोष गुप्ता ने बताया कि सिजेरियन डिलीवरी की सुविधा नहीं होने के कारण मरीज को रेफर किया गया। इस मामले में पुलिस पहुंची थी, लेकिन परिवार के लोगों ने तहरीर नहीं दी है।
स्वास्थ्य विभाग की टीम ने अवैध रूप से निजी अस्पताल के संचालन के मामले में बंद हो गए निजी अस्पताल पर नोटिस चस्पा किया। डिप्टी सीएमओ एवं नोडल अफसर प्राइवेट हॉस्पिटल डॉ. संजय गुप्ता ने बताया कि परिजनों ने शिकायत नहीं की है। अवैध रूप से अस्पताल संचालन के मामले में कार्रवाई की जाएगी।
शोहरतगढ़ में भी रेफर मरीज की हुई थी मौत
29 जुलाई को शोहरतगढ़ थाना क्षेत्र महमुदवा ग्रांट निवासी नीलम उर्फ रीमा (27) पत्नी बृजलाल को प्रसव पीड़ा होने पर परिजन उसे पहले शोहरतगढ़ सीएचसी ले गए थे। वहां चिकित्सक की ओर से उसे रेफर कर दिया गया था। उसके बाद सीएचसी से उसे किसी ने एक प्राइवेट हॉस्पिटल पहुंचाया। जहां सामान्य प्रसव होने के बाद महिला की तबीयत बिगड़ गई थी। वहां से मेडिकल कॉलेज ले जाते समय मरीज की मौत हो गई। इस मामले में परिजनों ने केस दर्ज कराया है।
पुलिस अधीक्षक अभिषेक अग्रवाल के पत्र पर सीएमओ ने चिकित्सकीय लापरवाही की जांच के लिए तीन चिकित्सकों की टीम बनाई है। इस मामले में विधायक विनय वर्मा ने डिप्टी सीएम एवं स्वास्थ्य मंत्री ब्रजेश पाठक से शिकायत की। डिप्टी सीएम के निर्देश पर जांच शुरू हुई तो 19 निजी अस्पताल एवं जांच सेंटर सील किए गए।
पेट में छोड़ दिया था स्पंज तो जांच से पहले उखाड़ लिया था बोर्ड
दो माह पहले उसका क्षेत्र के नव जीवन हॉस्पिटल में महिला के ऑपरेशन के दौरान डॉक्टर व स्वास्थ्य की लापरवाही उसके पेट में स्पंज (खून सूखाने वाला कपड़े का टुकड़ा) छूट गया था। इस कारण महिला की तबीयत बिगड़ती गई और शोहरतगढ़ के एक निजी अस्पताल में इलाज के दौरान मौत हो गई। संचालक स्वास्थ्य विभाग की टीम के पहुंचने से पहले ही अस्पताल का बोर्ड उखाड़कर फरार हो गया था। शबनम याहिया हॉस्पिटल इटवा में प्रसव के बाद मरीज के पास डॉक्टर मौजूद नहीं थीं। तबीयत बिगड़ने पर जज्जा-बच्चा ने दम तोड़ दिया। इस मामले में स्वास्थ्य विभाग ने केस दर्ज कराया है।
खून दिया, फिर भी भेज दिया बाहर
शहर के बेलसड़ निवासी रघुनाथ ने बताया कि उनकी पत्नी खुशबू को प्रसव पीड़ा होने पर उन्हाेंने माधव प्रसाद त्रिपाठी मेडिकल कॉलेज में भर्ती कराया था। डॉक्टर के अनुसार खून की कमी थी। उन्होंने खून दिया और ऑपरेशन की तैयारी में जुटे थे। इसी बीच एक महिला कर्मी ने बताया कि अपना मरीज यहां से ले जाओ स्थिति गंभीर है। उसी दौरान उस महिला कर्मी ने खून की रफ्तार बढ़ा दी तो कहासुनी भी हुई, लेकिन वह डॉक्टर को नहीं ढूंढ पाए। रेफर की पर्ची भी नहीं मिली और वे किसी की सलाह पर अपनी मरीज को शहर के एक निजी अस्पताल ले गए। जहां जच्चा-बच्चा की जान बच गई। रघुनाथ ने बताया कि निजी अस्पताल में करीब 35 हजार रुपये खर्च हुए, लेकिन जच्चा-बच्चा सुरक्षित हैं। वह मुंबई में कमाते हैं। शिकायत करते तो जांच में जाना जरूरी होता, इसलिए शिकायत नहीं की।