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चप्पल कांड का वीडियो प्रकरण की पुलिस ने शुरू की जांच

Sun, 16 Jan 2022 10:39 PM IST
Gorakhpur Bureau गोरखपुर ब्यूरो
Updated Sun, 16 Jan 2022 10:39 PM IST
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Police started investigation of video episode of sandal incident
चप्पल कांड का वीडियो प्रकरण की पुलिस ने शुरू की जांच
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सिद्धार्थनगर। खुनियांव ब्लॉक के एक प्राथमिक विद्यालय में महिला शिक्षामित्र की ओर से प्रभारी प्रधानाध्यापक को चप्पल से पीटने के वायरल हुए वीडियो के मामले की जांच पुलिस कर रही है। एसपी के निर्देश पर जांच कर रहे सीओ शोहरतगढ़ ने पीड़ित प्रधानाध्यापक का बयान दर्ज किया है।
खुनियांव ब्लॉक के एक प्राथमिक विद्यालय पर तीन अगस्त 2021 को महिला शिक्षामित्र ने प्रभारी प्रधानाध्यापक की बाइक से उतरते ही चप्पल से पिटाई की थी, जिसका वीडियो सोशल मीडिया पर वायरल हुआ था। मामले में प्रभारी प्रधानाध्यापक, एक सहायक अध्यापक और शिक्षामित्र को निलंबित कर दिया गया था।
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बाद में हुई बेसिक शिक्षा विभाग के विभागीय जांच में वीडियो बनाने के मामले में चेतावनी देते हुए सहायक अध्यापक और महिला शिक्षामित्र को भी उसी विद्यालय पर बहाल कर दिया गया, जबकि चप्पल कांड में पीड़ित प्रभारी प्रधानाध्यापक को बहाल करते हुए नौगढ़ ब्लॉक में स्थानांतरित कर दिया गया। घटना से आहत प्रभारी प्रधानाध्यापक ने एसपी से वीडियो बनाने के मामले की जांचकर दोषियों पर कार्रवाई की मांग की है। पुलिस अधीक्षक डॉ. यशवीर सिंह ने बताया कि शिकायत पत्र के अनुसार मामले की जांच की जा रही है।
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अनुशासनहीनता की हुई थी पुष्टि
घटना में वीडियो बनाने समेत लगे विभिन्न आरोपों की विभागीय जांच में सहायक अध्यापक पर अनुशासनहीनता करने की पुष्टि हुई है, साथ ही उस पर प्रधानाध्यापक का सहयोग नहीं करने का भी आरोप पाया गया है। इसके बावजूद उसे उसी विद्यालय पर बहाल कर दिया गया। चप्पल कांड को अंजाम देने वाली महिला शिक्षामित्र भी पूर्ववत उसी विद्यालय पर बहाल कर दी गई है, जबकि घटना में पीड़ित प्रभारी प्रधानाध्यापक को स्थानांतरित कर दिया गया।

न्याय की लगाई गुहार
पीड़ित प्रभारी प्रधानाध्यापक ने एसपी को दिए प्रार्थना पत्र में कहा है कि विभागीय जांच में आरोपितों को बरी कर दिए जाने से वह आहत हैं। साथ ही उन्हें अपमानित करते हुए वीडियो बनाकर वायरल करने से वह और उसकी पत्नी मानसिक तनाव में रहते हैं। उन्हें प्रशासनिक व्यवस्था से न्याय नहीं मिल पाया है। उनसे कहना है कि न्याय नहीं मिलने पर वह मानसिक रूप से प्रताड़ित महसूस करते हैं।
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