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भटके मानसून ने किसानों की मुश्किलें बढ़ी
ब्यूरो/अमर उजाला ,सिद्धार्थनगर
Updated Wed, 13 Jul 2016 11:08 PM IST
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फसल सूख रही है।
- फोटो : अमर उजाला
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एक तरफ मौसम विज्ञानी जहां अच्छी बारिश की संभावना जता रहे हैं। वहीं झलक दिखलाने के बाद गायब हुए मानसून ने किसानों की मुश्किलों को बढ़ा दिया है। सूख रही फसलों को बचाने की चुनौती किसानों के सामने खड़ी हो गई है।
मौसम विज्ञानियों की बातों पर विश्वास कर भारत-नेपाल के सीमाई क्षेत्र के परसा, सिसवा, औदही कलां, परसोहिया, मानपुर, तालकुंडा, अहिरौला, तुलसियापुर, झिंगहा, बसंतपुर, चरिहवा समेत कई गांवों के किसानों ने बहुत पहले ही धान की नर्सरी डाल दी थी। जैसे ही पहली बारिश हुई किसानों को लगा कि मानसून आ गया। किसानों ने खेेतों में धान की रोपाई शुरू कर दी, मगर सही ढंग से बारिश न होने के कारण रोपी गई धान की फसल सूख रही है। जिनके पास अपने सिंचाई के साधन हैं, वे तो किसी प्रकार खेतों में फसल सूखने से बचाने के लिए पानी का इंतजाम कर ले रहे हैं, लेकिन साधन विहिन किसान सूखती फसलों को निहारने को मजबूर हैं। वैसे भी बढ़नी ब्लॉक का इस ग्रामीण क्षेत्र में नहर न होने के कारण सिंचाई के साधन की कमी है। सरकारी नलकूप कुछ गांवों में लगे भी हैं तो या वे खराब हैं या ऑपरेटर के न आने से बंद पड़े हैं।
बहुत से किसान धान की रोपाई कर भी चुके हैं, लेेकिन दो दिन हल्की बारिश के बाद मानसून तो जैसे रास्ते से ही भटक गया। हालत यह हो गई है किसानों के खेत में बड़ी-बड़ी दरारें पड़ गई हैं। -मयंक शुक्ला, औदही कलां।
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किसान अपनी गाड़ी कमाई को इस तरह से सूखता देख परेशान है। फसल को बचाने के लिए किसान निजी साधनों से खेतों में पानी चलाने में लगा हुआ है। पर्याप्त बिजली न मिलने से इसमें भी सफलता नहीं मिल पा रही। -गिरिजा चौधरी, तुलसियापुर।
अगर बारिश नहीं हुई तो फसल बचाना मुश्किल होगा। विगत कई वर्षों से हुई कम बारिश से जलस्तर काफी नीचे चला गया है। इसके कारण खेतों में लगे निजी बोरिंग भी पानी छोड़ रहे हैं। स्थिति विकट होती जा रही है। -विश्वनाथ यादव, चरिहवा।
बारिश न होने से फसल बर्बाद हो रही है। इनके पास सिंचाई का साधन है वह अपने खेतों में ही पानी चला रहे हैं। जब उनके खेत में सिंचाई हो जाएगी तब वह दूसरों को देंगे। असमंजस की स्थिति बनी हुई है। समझ नहीं आ रही कि अब क्या होगा। -रामकुमार, तालकुंडा।
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मौसम विज्ञानियों की बातों पर विश्वास कर भारत-नेपाल के सीमाई क्षेत्र के परसा, सिसवा, औदही कलां, परसोहिया, मानपुर, तालकुंडा, अहिरौला, तुलसियापुर, झिंगहा, बसंतपुर, चरिहवा समेत कई गांवों के किसानों ने बहुत पहले ही धान की नर्सरी डाल दी थी। जैसे ही पहली बारिश हुई किसानों को लगा कि मानसून आ गया। किसानों ने खेेतों में धान की रोपाई शुरू कर दी, मगर सही ढंग से बारिश न होने के कारण रोपी गई धान की फसल सूख रही है। जिनके पास अपने सिंचाई के साधन हैं, वे तो किसी प्रकार खेतों में फसल सूखने से बचाने के लिए पानी का इंतजाम कर ले रहे हैं, लेकिन साधन विहिन किसान सूखती फसलों को निहारने को मजबूर हैं। वैसे भी बढ़नी ब्लॉक का इस ग्रामीण क्षेत्र में नहर न होने के कारण सिंचाई के साधन की कमी है। सरकारी नलकूप कुछ गांवों में लगे भी हैं तो या वे खराब हैं या ऑपरेटर के न आने से बंद पड़े हैं।
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बहुत से किसान धान की रोपाई कर भी चुके हैं, लेेकिन दो दिन हल्की बारिश के बाद मानसून तो जैसे रास्ते से ही भटक गया। हालत यह हो गई है किसानों के खेत में बड़ी-बड़ी दरारें पड़ गई हैं। -मयंक शुक्ला, औदही कलां।
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किसान अपनी गाड़ी कमाई को इस तरह से सूखता देख परेशान है। फसल को बचाने के लिए किसान निजी साधनों से खेतों में पानी चलाने में लगा हुआ है। पर्याप्त बिजली न मिलने से इसमें भी सफलता नहीं मिल पा रही। -गिरिजा चौधरी, तुलसियापुर।
अगर बारिश नहीं हुई तो फसल बचाना मुश्किल होगा। विगत कई वर्षों से हुई कम बारिश से जलस्तर काफी नीचे चला गया है। इसके कारण खेतों में लगे निजी बोरिंग भी पानी छोड़ रहे हैं। स्थिति विकट होती जा रही है। -विश्वनाथ यादव, चरिहवा।
बारिश न होने से फसल बर्बाद हो रही है। इनके पास सिंचाई का साधन है वह अपने खेतों में ही पानी चला रहे हैं। जब उनके खेत में सिंचाई हो जाएगी तब वह दूसरों को देंगे। असमंजस की स्थिति बनी हुई है। समझ नहीं आ रही कि अब क्या होगा। -रामकुमार, तालकुंडा।