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Siddharthnagar News: पालतू जानवर भी घातक... साथ रखें पर रहें सतर्क
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श्याम सुंदर तिवारी
सिद्धार्थनगर। सिर्फ कुत्ते के काटने से पागल हो जाना या जान जाने का खतरा नहीं है। बल्कि आपके घर में और बीच में रहने वाली बिल्ली आप और आपके बच्चों के लिए जान खतरा बन सकती है। इनके पंजा मारने व काटने से पागल होने के साथ ही जान चली जाएगी।
ऐसी ही एक घटना तीन दिन पहले बरेली में सामने आई है। जहां पालतू बिल्ली की खरोंच से बच्चे की जान चली गई। जिले में बिल्ली के काटने से अभी तक मौत का मामले सामने नहीं आया है, लेकिन इससे इन्कार नहीं किया जा सकता है।
पशु विशेषज्ञों का कहना है कि कुत्ता, बिल्ली, बंदर, सियार सहित कुछ अन्य प्रजाति के जानवर में रैबीज मौजूदा होता है। घुमंतू की बात दूर, पालतू तक को लोग एंटी रैबीज नहीं लगवाते हैं। ऐसे में इनके खरोंचने और काटने पर व्यक्ति को एंटी रैबीज का इंजेक्शन जरूर लगवाएं।
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अन्यथा छह माह से दस साल के भीतर कभी भी सिम्टम आ सकते हैं। अगर आ गया तो कोई दवा नहीं है। ऐसे में इन जानवरों से बचना बेहद जरूरी है।
एक साल में इतने लोग बने इन जानवरों के आक्रोश का शिकार : जानवरों के हमले की बात करें तो वर्ष 2024 में कुत्ते, बिल्ली और बंदर ने 13258 लोगों को काटा। वहीं, वर्ष 2023 में 9239 लोगों को शिकार बनाया, जबकि 2022 में 6000 लोगों को काटा। आंकड़े बता रहे हैं कि जानवरों का इंसान के प्रति आक्रोश बढ़ रहा है।
इसलिए काटने के मामले में हर साल इजाफा हुआ है। यह वे आंकड़े हैं, जिनमें अस्पताल पहुंचकर एंटी रैबीज का इंजेक्शन लगवाया। न जाने कितने ऐसे लोग होंगे जो अस्पताल तक पहुंचते ही नहीं होंगे, नहीं तो आंकड़ा और बढ़ सकता है। (संवाद)
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सिद्धार्थनगर। सिर्फ कुत्ते के काटने से पागल हो जाना या जान जाने का खतरा नहीं है। बल्कि आपके घर में और बीच में रहने वाली बिल्ली आप और आपके बच्चों के लिए जान खतरा बन सकती है। इनके पंजा मारने व काटने से पागल होने के साथ ही जान चली जाएगी।
ऐसी ही एक घटना तीन दिन पहले बरेली में सामने आई है। जहां पालतू बिल्ली की खरोंच से बच्चे की जान चली गई। जिले में बिल्ली के काटने से अभी तक मौत का मामले सामने नहीं आया है, लेकिन इससे इन्कार नहीं किया जा सकता है।
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पशु विशेषज्ञों का कहना है कि कुत्ता, बिल्ली, बंदर, सियार सहित कुछ अन्य प्रजाति के जानवर में रैबीज मौजूदा होता है। घुमंतू की बात दूर, पालतू तक को लोग एंटी रैबीज नहीं लगवाते हैं। ऐसे में इनके खरोंचने और काटने पर व्यक्ति को एंटी रैबीज का इंजेक्शन जरूर लगवाएं।
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अन्यथा छह माह से दस साल के भीतर कभी भी सिम्टम आ सकते हैं। अगर आ गया तो कोई दवा नहीं है। ऐसे में इन जानवरों से बचना बेहद जरूरी है।
एक साल में इतने लोग बने इन जानवरों के आक्रोश का शिकार : जानवरों के हमले की बात करें तो वर्ष 2024 में कुत्ते, बिल्ली और बंदर ने 13258 लोगों को काटा। वहीं, वर्ष 2023 में 9239 लोगों को शिकार बनाया, जबकि 2022 में 6000 लोगों को काटा। आंकड़े बता रहे हैं कि जानवरों का इंसान के प्रति आक्रोश बढ़ रहा है।
इसलिए काटने के मामले में हर साल इजाफा हुआ है। यह वे आंकड़े हैं, जिनमें अस्पताल पहुंचकर एंटी रैबीज का इंजेक्शन लगवाया। न जाने कितने ऐसे लोग होंगे जो अस्पताल तक पहुंचते ही नहीं होंगे, नहीं तो आंकड़ा और बढ़ सकता है। (संवाद)