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मनरेगा में सामग्री का भुगतान नहीं होने से गांवों में विकास कार्य ठप
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मनरेगा में सामग्री का भुगतान नहीं होने से गांवों में विकास कार्य ठप
: ग्राम पंचायतों में 42 करोड़ से कराए गए पक्के कार्य का एक वर्ष से नहीं हुआ भुगतान
ग्राम प्रधानों ने बंद किया इंटरलॉकिंग और नाली आदि निर्माण कार्य
संवाद न्यूज एजेंसी
सिद्धार्थनगर। मनरेगा के तहत गांवों में कराए गए पक्के कार्य का एक वर्ष से भुगतान नहीं होने के कारण प्रधानों ने नाली, इंटरलॉकिंग आदि विकास कार्य करने से हाथ खड़ा कर दिया है। हालत यह है कि कई गांवों में 10 से 50 लाख तक के पक्के निर्माण कार्य का भुगतान लंबित है। एक वर्ष से इंतजार के बाद तीन दिन पहले मनरेगा के तहत कुछ गांवों के सामग्री का भुगतान हुआ लेकिन अधिकांश गांव वंचित रह गए। जिससे नाराज होकर प्रधानों ने मिठवल व बर्डपुर में प्रदर्शन भी किया था।
मनरेगा से जिले के 14 ब्लॉकों के 1,136 गांवों में मनरेगा के तहत 60 प्रतिशत मजदूरी कार्य के सापेक्ष 40 प्रतिशत पक्के कार्य का प्रावधान है। इसके तहत कराए गए कच्चे कार्य के मजदूरी का भुगतान हो रहा है लेकिन शासन स्तर से एक वर्ष से पक्के कार्य का भुगतान नहीं हो रहा है। नतीजा यह है जिले के कई गांवों में 10 से 50 लाख रुपये तक के लागत से कराए गए इंटरलॉकिंग व नाली समेत पक्के कार्यों के सामग्री का भुगतान नहीं हो पाया है। इन गांवों का 60 करोड़ रुपये सामग्री का भुगतान एक वर्ष से बकाया है। तीन दिन पहले शासन से सामग्री भुगतान की तिथि निर्धारित थी, जिसके लिए सभी ब्लॉकों पर प्रधान अपनी बारी का इंतजार कर रहे थे, लेकिन चार ब्लॉकों में कुछ गांवों का बकाया 18 करोड़ रुपये सामग्री की धनराशि का भुगतान हो सका। इससे अन्य गांवों के प्रधानों में नाराजगी नजर आई। यहां तक कि बर्डपुर और मिठवल ब्लॉक में नाराज प्रधानों ने ब्लॉक कार्यालय का गेट बंद कर प्रदर्शन कर जल्द भुगतान की मांग की।
ग्राम प्रधान शैलेश, दीनदयाल और रामप्रसाद का कहना है कि एक वर्ष से मनरेगा के तहत कराए गए पक्के कार्य की सामग्री का भुगतान नहीं होने के कारण गांव के जलनिकासी के लिए जरूरी नाली एवं इंटरलॉकिंग निर्माण समेत दूसरे पक्के कार्य कराना असंभव है। उन्होंने कहा कि जब तक पुराना बकाया भुगतान नहीं होता तब तक नए कार्य नहीं करा सकेंगे। डीसी मनरेगा संजय शर्मा का कहना है कि उच्चस्तरीय अधिकारियों को अवगत कराया गया है, जल्द ही सामग्री भुगतान कराया जाएगा, जिससे विकास कार्य बाधित नहीं होगा।
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प्रधानों से बकाया मांग रहे दुकानदार
प्रधानों का आरोप है कि मनरेगा के तहत कराए गए इंटरलॉकिंग, नाली व पुलिया आदि पक्के कार्य के लिए जिन दुकानों से ईंट, सीमेंट, बालू, सरिया आदि सामग्री ली गई थी, भुगतान नहीं होने पर बकाया के लिए लगातार मांग कर रहे हैं। उनका कहना है कि कभी-कभी बकाया मांगने की तकरार में मारपीट की स्थिति उत्पन्न हो जा रही है, जिससे घर से निकलना मुश्किल हो जा रहा है।
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: ग्राम पंचायतों में 42 करोड़ से कराए गए पक्के कार्य का एक वर्ष से नहीं हुआ भुगतान
ग्राम प्रधानों ने बंद किया इंटरलॉकिंग और नाली आदि निर्माण कार्य
संवाद न्यूज एजेंसी
सिद्धार्थनगर। मनरेगा के तहत गांवों में कराए गए पक्के कार्य का एक वर्ष से भुगतान नहीं होने के कारण प्रधानों ने नाली, इंटरलॉकिंग आदि विकास कार्य करने से हाथ खड़ा कर दिया है। हालत यह है कि कई गांवों में 10 से 50 लाख तक के पक्के निर्माण कार्य का भुगतान लंबित है। एक वर्ष से इंतजार के बाद तीन दिन पहले मनरेगा के तहत कुछ गांवों के सामग्री का भुगतान हुआ लेकिन अधिकांश गांव वंचित रह गए। जिससे नाराज होकर प्रधानों ने मिठवल व बर्डपुर में प्रदर्शन भी किया था।
मनरेगा से जिले के 14 ब्लॉकों के 1,136 गांवों में मनरेगा के तहत 60 प्रतिशत मजदूरी कार्य के सापेक्ष 40 प्रतिशत पक्के कार्य का प्रावधान है। इसके तहत कराए गए कच्चे कार्य के मजदूरी का भुगतान हो रहा है लेकिन शासन स्तर से एक वर्ष से पक्के कार्य का भुगतान नहीं हो रहा है। नतीजा यह है जिले के कई गांवों में 10 से 50 लाख रुपये तक के लागत से कराए गए इंटरलॉकिंग व नाली समेत पक्के कार्यों के सामग्री का भुगतान नहीं हो पाया है। इन गांवों का 60 करोड़ रुपये सामग्री का भुगतान एक वर्ष से बकाया है। तीन दिन पहले शासन से सामग्री भुगतान की तिथि निर्धारित थी, जिसके लिए सभी ब्लॉकों पर प्रधान अपनी बारी का इंतजार कर रहे थे, लेकिन चार ब्लॉकों में कुछ गांवों का बकाया 18 करोड़ रुपये सामग्री की धनराशि का भुगतान हो सका। इससे अन्य गांवों के प्रधानों में नाराजगी नजर आई। यहां तक कि बर्डपुर और मिठवल ब्लॉक में नाराज प्रधानों ने ब्लॉक कार्यालय का गेट बंद कर प्रदर्शन कर जल्द भुगतान की मांग की।
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ग्राम प्रधान शैलेश, दीनदयाल और रामप्रसाद का कहना है कि एक वर्ष से मनरेगा के तहत कराए गए पक्के कार्य की सामग्री का भुगतान नहीं होने के कारण गांव के जलनिकासी के लिए जरूरी नाली एवं इंटरलॉकिंग निर्माण समेत दूसरे पक्के कार्य कराना असंभव है। उन्होंने कहा कि जब तक पुराना बकाया भुगतान नहीं होता तब तक नए कार्य नहीं करा सकेंगे। डीसी मनरेगा संजय शर्मा का कहना है कि उच्चस्तरीय अधिकारियों को अवगत कराया गया है, जल्द ही सामग्री भुगतान कराया जाएगा, जिससे विकास कार्य बाधित नहीं होगा।
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प्रधानों से बकाया मांग रहे दुकानदार
प्रधानों का आरोप है कि मनरेगा के तहत कराए गए इंटरलॉकिंग, नाली व पुलिया आदि पक्के कार्य के लिए जिन दुकानों से ईंट, सीमेंट, बालू, सरिया आदि सामग्री ली गई थी, भुगतान नहीं होने पर बकाया के लिए लगातार मांग कर रहे हैं। उनका कहना है कि कभी-कभी बकाया मांगने की तकरार में मारपीट की स्थिति उत्पन्न हो जा रही है, जिससे घर से निकलना मुश्किल हो जा रहा है।