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Siddharthnagar News: जांच और इलाज के खेल में कट रही मरीजों की जेब

Sat, 19 Oct 2024 02:34 AM IST
गोरखपुर ब्यूरो संवाद न्यूज एजेंसी, सिद्धार्थनगर
संवाद न्यूज एजेंसी, सिद्धार्थनगर Updated Sat, 19 Oct 2024 02:34 AM IST
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Patients' pockets are being cut in the game of investigation and treatment
मेडिकल कालेज के पैथालॉजी में ब्लड़ जांच कराने के लिए लगी मरीजों की भीड़।
सिद्धार्थनगर। सिस्टम की लाचारी और बाहरियों की सेंधमारी से माधव प्रसाद त्रिपाठी मेडिकल कॉलेज में आने वाले मरीज इलाज और जांच के नाम पर आर्थिक शोषण का शिकार हो रहे हैं। ब्लड से लेकर अल्ट्रासाउंड जांच तक में मरीजों की जेब की कट रही है। कारण हर तीसरे दिन ब्लड जांच करने वाली और अल्ट्रासाउंड मशीन जवाब दे जाती है। मरीजों को बाहर अल्ट्रासाउंड के लिए 700 तो थायराइड और हार्मोन की जांच के लिए 500 से 800 रुपये देने पड़ रहे हैं।
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माधव प्रसाद त्रिपाठी मेडिकल कॉलेज में शुक्रवार को स्वास्थ्य जांच की पड़ताल में एमसीएच बिंग के अल्ट्रासाउंड केंद्र पर ताला लटकता मिला, यहां से लौट रही गर्भवती सुलेखा ने कहा कि डॉक्टर ने अल्ट्रासाउंड जांच के लिए लिखा था, वहां पहुंची तो पता चला कि यह कई दिन से बंद है।
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एक लड़का मिला था, उसने बताया कि शहर में उसका रोड पर एक सेंटर है, वहां पर जांच हो जाएगा। अन्य से 700 लेते हैं हमें बता देना 600 में हो जाएगा। अब वहीं, जा रही हूं।
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वहीं, महिला वार्ड में दिखाने के लिए पहुंचीं नाजमा ने बताया कि उन्हें जांच के लिए छोटे कागज पर लिखकर दिया गया था। उस सेंटर पर गए 700 रुपये में जांच का लगा था। एक स्वास्थ्यकर्मी ने कहा कि यहां की रिपोर्ट सही नहीं होती है। इसलिए बाहर चली गई।
ऐसा एक नहीं बल्कि अनेक मरीजों के साथ नियमित हो रहा है। इसके बाद ब्लड जांच केंद्र पर पहुंचे, यहां पता चला कि थायराइड और हार्मोन की जांच नहीं हो रही है। वार्ड में भर्ती मरीजों की किसी प्रकार से जांच हो रही यह जानने के लिए कुछ तीमारदारों से बात की।
इसमें बर्डपुर नंबर 13 निवासी सहाबुल ने कहा कि भाई की तबीयत खराब थी। खून से संबंधित जांच होना था। कुछ जांच तो हो गया, लेकिन दो जांच नहीं हो पाया। उसे बाहर से करना पड़ा और 300 रुपये लग गए। वहीं, पेट में संक्रमण की समस्या से परेशानी अमेरिका यादव ने बताया कि डॉक्टर ने जांच लिखा था। अस्पताल में जांच हो गया, लेकिन एक कर्मी ने बताया कि यहां की रिपोर्ट सही नहीं है। बाहर से करवा लो, बाहर एक युवक मिला जो सैंपल ले लिया और दो घंटे बाद रिपोर्ट दे दिया, इसके 400 रुपये लगे थे। जब डॉक्टर को दिखाया तो उन्होंने कहा कि बाहर से क्यों करवाए। किसने कहा कि दोनों रिपोर्ट एक है।
यह हाल एक दो नहीं, बल्कि भर्ती और जांच ओपीडी में आने वाले हर पांचवें मरीज के साथ होता है। जाने अनजाने में वह आर्थिक शोषण का शिकार होता है। निजी केंद्र पर जांच कराने की सलाह देते हैं दलाल : मेडिकल कॉलेज में घूमने वाले दलाल मरीजों को निजी केंद्र पर जांच कराने की सलाह दे देते हैं। कहते हैं कि हमारे बताए हुए जगह पर चलो अच्छी जांच हो जाएगी। रिपोर्ट भी समय से मिल जाएगा, भीड़ में परेशान नहीं होना पड़ेगा।

लैब से लेकर भर्ती होने वाले मरीजों तक इनकी पैठ है। कभी कभार बुलाने पर बेड से सैंपल लेते हैं और जांच करके लाकर रिपोर्ट थमा देते हैं। कुछ मरीज इसे सहूलियत मानते हैं तो कुछ सिस्टम की लाचारी। उनका कहना है कि अगर अंदर जांच हो जाए तो बाहर जाना ही क्यों पड़े। अंदर हमेशा मशीन खराब होना, जांच कैमिकल खराब होना आदि बताया जाता है। इसलिए बाहर से जांच करवाना पड़ रहा है।
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