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ग्राम पंचायतें खरीद सकेंगी पराली निस्तारण के लिए यंत्र
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ग्राम पंचायतें खरीद सकेंगी पराली निस्तारण के लिए यंत्र
किसानों को मिलेगी सहूलियत, 80 प्रतिशत सरकार देगी अनुदान
संवाद न्यूज एजेंसी
सिद्धार्थनगर। अब ग्राम पंचायतें पराली निस्तारण के लिए यंत्र खरीद सकेंगी। इसके लिए उन्हें सिर्फ 20 प्रतिशत रकम खर्च करनी होगी। 80 प्रतिशत अनुदान कृषि विभाग देगा। इसके लिए ग्राम पंचायतों को आवेदन के साथ ही कृषि विभाग के पोर्टल पर पंजीकरण भी कराना होगा।
खेत में पराली जलाने से बढ़ते वायु प्रदूषण को रोकने के लिए कठोर कानून बना दिया गया। ऐसे में नियमानुसार, पराली जलाने पर किसानाें के खिलाफ कार्रवाई का नियम है। रबी के सीजन में कम, लेकिन खरीफ के सीजन में धान की पराली निस्तारण के लिए संसाधन न होने से किसान पराली को मजबूर होकर जलाता है। ठंड का सीजन होने से पराली से निकलने वाले धुएं से धुंध जैसी स्थिति बन जाती है। मगर अब इन समस्याओं से जल्द ही किसानों को निजात मिलेगा। पराली निस्तारण के लिए ग्राम पंचायतें कृषियंत्र खरीद सकेंगी। पांच लाख रुपये तक के यंत्र खरीद पर 80 प्रतिशत धनराशि अनुदान रहेगा, जबकि 20 प्रतिशत धनराशि ग्राम पंचायत की ओर से जमा करना होगा। कृषियंत्र की खरीद के बाद विभाग की ओर से दर निर्धारित किया जाएगा कि किस दर पर प्रति बीघा के दर से मशीन किसानों के खेतों में चले। माना जा रहा है कि इससे किसानों को सहूलियत मिलेगी। जिला कृषि अधिकारी सीपी सिंह ने बताया कि ग्राम पंचायतों के चयन का जिम्मा पंचायत राज विभाग तय करेगा। इसके बाद कागजात पूरा होने के बाद अनुदान राशि कृषि विभाग भुगतान करेगा।
खेत की बढ़ेगी उवर्रा शक्ति, कम होगा प्रदूषण
पराली निस्तारण के लिए सुपर सीडर यंत्र, फसल अवशेष काटने वाले विभिन्न प्रकार के यंत्र का प्रयोग होने से अवशेष निस्तारण हो जाएगा। आग से भूमि जलने से उवर्राशक्ति कम हो जाती थी। मगर जब फसल के अवशेष न जलेंगे तो खाद के रूप में प्रयोग होंगे और वायु प्रदूषण कम होगा।
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किसानों को मिलेगी सहूलियत, 80 प्रतिशत सरकार देगी अनुदान
संवाद न्यूज एजेंसी
सिद्धार्थनगर। अब ग्राम पंचायतें पराली निस्तारण के लिए यंत्र खरीद सकेंगी। इसके लिए उन्हें सिर्फ 20 प्रतिशत रकम खर्च करनी होगी। 80 प्रतिशत अनुदान कृषि विभाग देगा। इसके लिए ग्राम पंचायतों को आवेदन के साथ ही कृषि विभाग के पोर्टल पर पंजीकरण भी कराना होगा।
खेत में पराली जलाने से बढ़ते वायु प्रदूषण को रोकने के लिए कठोर कानून बना दिया गया। ऐसे में नियमानुसार, पराली जलाने पर किसानाें के खिलाफ कार्रवाई का नियम है। रबी के सीजन में कम, लेकिन खरीफ के सीजन में धान की पराली निस्तारण के लिए संसाधन न होने से किसान पराली को मजबूर होकर जलाता है। ठंड का सीजन होने से पराली से निकलने वाले धुएं से धुंध जैसी स्थिति बन जाती है। मगर अब इन समस्याओं से जल्द ही किसानों को निजात मिलेगा। पराली निस्तारण के लिए ग्राम पंचायतें कृषियंत्र खरीद सकेंगी। पांच लाख रुपये तक के यंत्र खरीद पर 80 प्रतिशत धनराशि अनुदान रहेगा, जबकि 20 प्रतिशत धनराशि ग्राम पंचायत की ओर से जमा करना होगा। कृषियंत्र की खरीद के बाद विभाग की ओर से दर निर्धारित किया जाएगा कि किस दर पर प्रति बीघा के दर से मशीन किसानों के खेतों में चले। माना जा रहा है कि इससे किसानों को सहूलियत मिलेगी। जिला कृषि अधिकारी सीपी सिंह ने बताया कि ग्राम पंचायतों के चयन का जिम्मा पंचायत राज विभाग तय करेगा। इसके बाद कागजात पूरा होने के बाद अनुदान राशि कृषि विभाग भुगतान करेगा।
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खेत की बढ़ेगी उवर्रा शक्ति, कम होगा प्रदूषण
पराली निस्तारण के लिए सुपर सीडर यंत्र, फसल अवशेष काटने वाले विभिन्न प्रकार के यंत्र का प्रयोग होने से अवशेष निस्तारण हो जाएगा। आग से भूमि जलने से उवर्राशक्ति कम हो जाती थी। मगर जब फसल के अवशेष न जलेंगे तो खाद के रूप में प्रयोग होंगे और वायु प्रदूषण कम होगा।
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