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वाहनों की कागजी दौड़ में फंसा लाभार्थियों का हक
ब्यूरो/अमर उजाला सिद्धार्थनगर
Updated Tue, 19 Jul 2016 11:18 PM IST
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जिला पंचायत सभागार में शुक्रवार को जिला योजना की बैठक लेते सपा के प्रभारी मंत्री रामसकल गुर्जर व डीएम।
- फोटो : अमर उजाला
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सिद्धार्थनगर। जिले के ब्लाक स्तरीय अफसरों के क्षेत्र भ्रमण से महिलाओं और बच्चों को घर बैठे सरकारी योजनाओं का लाभ देने के लिए अनुबंधित वाहनों का सच कुछ और निकलने से जहां सरकारी फंड के घपले का संकेत मिल रहा है, वहीं लाभार्थियों तक लाभ पहुंचाने के लिए बाल विकास एवं महिला कल्याण विभाग के अफसरों के दावे पर संदेह भी बढ़ गया है। कुछ गांव से इस तरह का भ्रमण न होने की शिकायतें भी सामने आई हैं।
आरटीआई के जरिए देवेश मणि द्वारा जुटाई गई जानकारी से यह साफ हो गया है कि जिला कार्यक्रम अधिकारी के दफ्तर से बोलेरो या स्कार्पियो दर्शाकर जिन आठ गाड़ियों को अनुबंधित किया था, उनके रजिस्ट्रेशन नंबर पर लोगों के ट्रक, टेंपो, मैजिक सरीखे वाहन चल रहे हैं। विभागीय अफसर इसे ट्रेवल एजेंसी की कागजी चूक बताकर सुधार लेने और बोलेरो की मदद से लाभार्थियों तक योजना का लाभ पहुंचाने का दावा भी कर रहे हैं लेकिन रिकॉर्ड में टेंपो, ट्रक आदि के ही नंबर दर्ज होने से इस दावे पर भी संदेह खड़ा हो रहा है।
इनमें से अधिकांश गाड़ियां दूसरे जिलों में पंजीकृत हैं। कई के इंश्योरेंस पेपर और चेसिस नंबर भी अलग-अलग है। संदेह गहाने पर डीएम ने हर पहलू की बारीकी से जांच कराने की बात कही है।
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आरटीआई के जरिए देवेश मणि द्वारा जुटाई गई जानकारी से यह साफ हो गया है कि जिला कार्यक्रम अधिकारी के दफ्तर से बोलेरो या स्कार्पियो दर्शाकर जिन आठ गाड़ियों को अनुबंधित किया था, उनके रजिस्ट्रेशन नंबर पर लोगों के ट्रक, टेंपो, मैजिक सरीखे वाहन चल रहे हैं। विभागीय अफसर इसे ट्रेवल एजेंसी की कागजी चूक बताकर सुधार लेने और बोलेरो की मदद से लाभार्थियों तक योजना का लाभ पहुंचाने का दावा भी कर रहे हैं लेकिन रिकॉर्ड में टेंपो, ट्रक आदि के ही नंबर दर्ज होने से इस दावे पर भी संदेह खड़ा हो रहा है।
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इनमें से अधिकांश गाड़ियां दूसरे जिलों में पंजीकृत हैं। कई के इंश्योरेंस पेपर और चेसिस नंबर भी अलग-अलग है। संदेह गहाने पर डीएम ने हर पहलू की बारीकी से जांच कराने की बात कही है।
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