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आजादी के बाद से ही यहां आम सहमति से बनते है प्रधान
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सेहरी गांव में स्थित प्राथमिक विद्यालय।
- फोटो : SIDDHARTHNAGAR
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आजादी के बाद से नहीं हुआ पंचायत चुनाव
गांव के लोग आम सहमति से चुन लेते हैं ग्राम प्रधान
मिठवल ब्लॉक का सेहरी गांव आपसी सामंजस्य का है मिसाल
यहां के दो बीडीसी सदस्यों का भी होता है निर्विरोध निर्वाचन
इरफान बाकर/लाल सिंह वर्मा
बांसी (सिद्धार्थनगर)। वर्तमान में गांव की प्रधानी हासिल करने के लिए लोग तरह-तरह के हथकंडे अपना रहे हैं। वहीं जिले के सेहरी बुजुर्ग गांव में आजादी के बाद से अब तक ग्राम प्रधान और क्षेत्र पंचायत सदस्य का चुनाव नहीं हुआ है। यहां बैलेट से नहीं आम सहमति से प्रधान और बीडीसी सदस्य चुने जाते हैं।
जिले में मिसाल कायम करने वाले सेहरी बुजुर्ग गांव के लोग चुनाव का बिगुल बजने के बाद एकत्र होकर ग्राम प्रधान, क्षेत्र पंचायत और ग्राम पंचायत सदस्य का निर्णय लेते हैं। जिसके नाम की आम सहमति बनती है वह जाकर अपने नाम का पर्चा खरीद लेता है और नामांकन दाखिल कर निर्विरोध चुन लिया जाता है। इस गांव के लोगों ने पहला ग्राम प्रधान अकबर मियां को बनाने के बाद सरस्वती लाल और रामआसरे मिश्र को भी प्रधान बनाया। 1968 से 1990 तक कुंवर अजय सिंह, 1995 में जोखन प्रसाद, 2000 में निर्मला सिंह, 2005 में आरती, 2010 और 2015 में निर्मला सिंह निर्विरोध ग्राम प्रधान चुनी गईं। संवाद
आपसी सौहार्द का मिसाल है सेहरी बुजुर्ग गांव
सेहरी बुजुर्ग गांव आपसी सौहार्द का मिसाल है यहां के लोगों ने ब्राह्मण, क्षत्रिय, मुस्लिम, पिछड़ी और अनुसूचित जाति का जनप्रतिनिधि बनाया है। इस गांव की आबादी छह हजार है और सभी जाति-धर्म के लोग निवास करते हैं। इसके बावजूद गांव में कभी कोई विवाद नहीं हुआ है।
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आम सहमति से ही होता है विकास कार्य
ब्लॉक के दूसरे सबसे बड़े गांव में शुमार सेहरी बुजुर्ग में विकास कार्य भी आपसी सहमति से होता है। गांव की सभी सड़के और गलियां पक्की हैं। जलनिकासी, शौचालय, पेयजल की बेहतर व्यवस्था है। गांव में जल संरक्षण और सिंचाई के लिए दस एकड़ के चार तालाब बनाए गए हैं। इन तालाबों में पानी भरने के लिए सोलर लाइट और पंप लगाए गए हैं। गांव में प्राथमिक से इंटर कॉलेज भी हैं। गांव में राशन, किराना और पशु की साप्ताहिक बाजार भी लगती है।
गांव के प्रधान रह चुके जोखन प्रसाद, आरती देवी और निवर्तमान प्रधान निर्मला सिंह का कहना है कि गांव के विकास में सबका सहयोग मिलता है। जो भी विकास का काम होता है वह आम सहमति से होता है। गांव में कोई समस्या नहीं है, गांव का प्रत्येक नागरिक गांव की भलाई के लिए काम करता है।
सेहरी कोठी के उत्तराधिकारी कुंवर विक्रम सिंह का कहना है कि प्रधान पद पिछड़ी जाति और गांव की दो क्षेत्र पंचायत सदस्य में एक अनारक्षित महिला व दूसरा पिछड़े वर्ग के लिए आरक्षित है। अभी तक प्रत्याशियों का चयन नहीं हुआ है। जल्द ही गांववालों की बैठक कर प्रत्याशियों का चयन हो जाएगा ।
गौरवशाली है गांव का इतिहास
सेहरी कोठी परिवार के स्व. मेजर रणजीत सिंह भारत-पाकिस्तान के बीच जंग में शामिल रहे। 1967 के लोकसभा चुनाव में वह खलीलाबाद संसदीय क्षेत्र से जनसंघ पार्टी से सांसद चुने गए थे। इसी परिवार के स्वर्गीय कुंवर अजय सिंह जिला सहकारी बैंक बस्ती के 1979 से 1987 तक उसके बाद 2000 तक 2002 से 2004 तक जिला सहकारी बैंक सिद्धार्थनगर के निर्विरोध अध्यक्ष रहे।
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आजादी के बाद से नहीं हुआ पंचायत चुनाव
गांव के लोग आम सहमति से चुन लेते हैं ग्राम प्रधान
मिठवल ब्लॉक का सेहरी गांव आपसी सामंजस्य का है मिसाल
यहां के दो बीडीसी सदस्यों का भी होता है निर्विरोध निर्वाचन
इरफान बाकर/लाल सिंह वर्मा
बांसी (सिद्धार्थनगर)। वर्तमान में गांव की प्रधानी हासिल करने के लिए लोग तरह-तरह के हथकंडे अपना रहे हैं। वहीं जिले के सेहरी बुजुर्ग गांव में आजादी के बाद से अब तक ग्राम प्रधान और क्षेत्र पंचायत सदस्य का चुनाव नहीं हुआ है। यहां बैलेट से नहीं आम सहमति से प्रधान और बीडीसी सदस्य चुने जाते हैं।
जिले में मिसाल कायम करने वाले सेहरी बुजुर्ग गांव के लोग चुनाव का बिगुल बजने के बाद एकत्र होकर ग्राम प्रधान, क्षेत्र पंचायत और ग्राम पंचायत सदस्य का निर्णय लेते हैं। जिसके नाम की आम सहमति बनती है वह जाकर अपने नाम का पर्चा खरीद लेता है और नामांकन दाखिल कर निर्विरोध चुन लिया जाता है। इस गांव के लोगों ने पहला ग्राम प्रधान अकबर मियां को बनाने के बाद सरस्वती लाल और रामआसरे मिश्र को भी प्रधान बनाया। 1968 से 1990 तक कुंवर अजय सिंह, 1995 में जोखन प्रसाद, 2000 में निर्मला सिंह, 2005 में आरती, 2010 और 2015 में निर्मला सिंह निर्विरोध ग्राम प्रधान चुनी गईं। संवाद
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आपसी सौहार्द का मिसाल है सेहरी बुजुर्ग गांव
सेहरी बुजुर्ग गांव आपसी सौहार्द का मिसाल है यहां के लोगों ने ब्राह्मण, क्षत्रिय, मुस्लिम, पिछड़ी और अनुसूचित जाति का जनप्रतिनिधि बनाया है। इस गांव की आबादी छह हजार है और सभी जाति-धर्म के लोग निवास करते हैं। इसके बावजूद गांव में कभी कोई विवाद नहीं हुआ है।
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आम सहमति से ही होता है विकास कार्य
ब्लॉक के दूसरे सबसे बड़े गांव में शुमार सेहरी बुजुर्ग में विकास कार्य भी आपसी सहमति से होता है। गांव की सभी सड़के और गलियां पक्की हैं। जलनिकासी, शौचालय, पेयजल की बेहतर व्यवस्था है। गांव में जल संरक्षण और सिंचाई के लिए दस एकड़ के चार तालाब बनाए गए हैं। इन तालाबों में पानी भरने के लिए सोलर लाइट और पंप लगाए गए हैं। गांव में प्राथमिक से इंटर कॉलेज भी हैं। गांव में राशन, किराना और पशु की साप्ताहिक बाजार भी लगती है।
गांव के प्रधान रह चुके जोखन प्रसाद, आरती देवी और निवर्तमान प्रधान निर्मला सिंह का कहना है कि गांव के विकास में सबका सहयोग मिलता है। जो भी विकास का काम होता है वह आम सहमति से होता है। गांव में कोई समस्या नहीं है, गांव का प्रत्येक नागरिक गांव की भलाई के लिए काम करता है।
सेहरी कोठी के उत्तराधिकारी कुंवर विक्रम सिंह का कहना है कि प्रधान पद पिछड़ी जाति और गांव की दो क्षेत्र पंचायत सदस्य में एक अनारक्षित महिला व दूसरा पिछड़े वर्ग के लिए आरक्षित है। अभी तक प्रत्याशियों का चयन नहीं हुआ है। जल्द ही गांववालों की बैठक कर प्रत्याशियों का चयन हो जाएगा ।
गौरवशाली है गांव का इतिहास
सेहरी कोठी परिवार के स्व. मेजर रणजीत सिंह भारत-पाकिस्तान के बीच जंग में शामिल रहे। 1967 के लोकसभा चुनाव में वह खलीलाबाद संसदीय क्षेत्र से जनसंघ पार्टी से सांसद चुने गए थे। इसी परिवार के स्वर्गीय कुंवर अजय सिंह जिला सहकारी बैंक बस्ती के 1979 से 1987 तक उसके बाद 2000 तक 2002 से 2004 तक जिला सहकारी बैंक सिद्धार्थनगर के निर्विरोध अध्यक्ष रहे।