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Hindi News ›   Uttar Pradesh ›   Siddharthnagar News ›   Over Rs three lakh fake appointment letters

तीन लाख रुपये लेकर फर्जी नियुक्ति पत्र दिया

Thu, 21 Jan 2016 11:31 PM IST
अमर उजाला ब्यूरो/सिद्धार्थनगर
अमर उजाला ब्यूरो/सिद्धार्थनगर Updated Thu, 21 Jan 2016 11:31 PM IST
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सिद्धार्थ यूनिवर्सिटी के गति पकड़ने से पहले ही जालसाजों ने पांव पसारना शुरू कर दिया है। यूनिवर्सिटी में नौकरी दिलाने के नाम पर लाखों रुपये वसूले गए हैं।
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इसका खुलासा तब हुआ जब चतुर्थ श्रेणी के पद का नियुक्ति पत्र लेकर दो अभ्यर्थी ज्वाइनिंग के लिए यूनिवर्सिटी पहुंचे। उन्हें बाकायदे कुलपति के जाली दस्तखत से यूनिवर्सिटी के लेटर पैड पर नियुक्ति पत्र दिया गया था।
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मामला संज्ञान में आने के बाद यूनिवर्सिटी प्रशासन में हड़कंप मच गया। कुलपति ने पुलिस अधीक्षक को पूरे मामले से अवगत कराते हुए कार्रवाई के लिए पत्र लिखा है।
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अक्टूबर 2015 से शुरू हुई यूनिवर्सिटी में क्लर्क और चतुर्थ श्रेणी के पदों पर बड़े पैमाने पर नियुक्तियां होनी हैं। नया शिक्षण सत्र शुरू होने से पहले ही नियुक्ति प्रक्रिया को पूरा करने की तैयारी चल रही है।

इसी मौके का लाभ उठाकर कई लोग नौकरी पाने की फिराक में हैं तो वहीं जालसाजों ने भी पांव पसार लिया है। चतुर्थ श्रेणी के पद पर नौकरी दिलाने के नाम पर वसूली का भंडाफोड़ बुधवार को तब हुआ जब दो अभ्यर्थी (एक महिला, एक पुुरुष) नियुक्ति पत्र लेकर यूनिवर्सिटी पहुंचे।

यूनिवर्सिटी के लेटर पैड पर अपने ही जाली दस्तखत से जारी नियुक्ति पत्र सामने आया तो कुलपति के होश उड़ गए। पूछताछ की तो पता चला कि किसी शख्स ने उनसे तीन-तीन लाख रुपये लिए हैं, इसके बाद उन्हें नियुक्ति पत्र दिया गया है।

इनमें एक अभ्यर्थी उसका बाजार और दूसरी महिला अभ्यर्थी महाराजगंज जिले के बरगदवा की निवासी है। हैरान-परेशान यूनिवर्सिटी प्रशासन ने नाम-पता दर्ज कर दोनों को जाने दिया।

दोनों को छोड़ने से यह आशंका जताई जा रही है कि इस मामले में यूनिवर्सिटी के ही किसी व्यक्ति का हाथ है। बाद में इस मामले की लिखित शिकायत एसपी से की गई।

बताते हैं कि अभ्यर्थियों को जो नियुक्ति पत्र दिए गए थे, वह यूनिवर्सिटी के लेटर पैड पर हैं। वह मूल लेटर पैड से हुबहू मिलता-जुलता है। अंतर दस्तखत का है। नियुक्ति पत्र में दस्तखत की लिखावट थोड़ी भिन्न है।

पहले तो यूनिवर्सिटी के कर्मचारी भी गफलत में आ गए, मगर जब पत्र वरिष्ठ अधिकारियों के पास पहुंचा तो उन्होंने इसे पकड़ लिया।इसी के आधार पर पूछताछ हुई तो सच्चाई खुली।


इस संबंध में सिद्धार्थ यूनिवर्सिटी के कुलपति डॉ. रजनीकांत पांडेय ने बताया कि यूनिवर्सिटी के लेटर पैड और मेरे दस्तखत के दुरुपयोग का बेहद गंभीर मामला है। इसकी जानकारी होते ही तत्काल एसपी को अवगत करा दिया गया है। संभव है कि कुछ और लोगों को भी ऐसा झांसा दिया गया हो। पुलिस को तत्काल कड़े कदम उठाने को कहा गया है।
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