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विश्वविद्यालय में ठप है एनएसएस की गतिविधि
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विश्वविद्यालय में ठप है एनएसएस की गतिविधि
- कार्यक्रम अधिकारी की नियुक्ति के बिना प्रभावित हो रहा है कार्य
संवाद न्यूज एजेंसी
सिद्धार्थनगर। सिद्धार्थ विश्वविद्यालय कपिलवस्तु में राष्ट्रीय सेवा योजना की गतिविधि चार माह से ठप पड़ है, क्योंकि फरवरी के बाद कार्यक्रम अधिकारी को नामित नहीं किया गया है। जुलाई से सत्र शुरू होने वाला है, लेकिन एनएसएस का कार्यक्रम भी नहीं बनाया गया है।
भारत-नेपाल सीमा के समीपवर्ती ग्रामीणों को विश्वविद्यालय के स्वयंसेवक एवं स्वयंसेविकाएं जागरूक करते हैं, लेकिन जागरुकता कार्यक्रम ठप पड़ गया है। हालांकि, उच्च अधिकारियों के निर्देश पर कुछ कार्यक्रम किए गए, लेकिन उन कार्यक्रमों की सूचना भी नाम मात्र है।
पिछले सत्र में एचआरपीजी कॉलेज के डॉ. पूर्णेश नारायण सिंह को राष्ट्रीय सेवा योजना में समन्वयक एवं वाणिज्य संकाय के डॉ. दिनेश प्रसाद को कार्यक्रम अधिकारी बनाया गया था। फरवरी में ही उनके कार्यकाल समाप्त हो गए, उसके बाद इन पदों पर किसी को जिम्मेदारी नहीं सौंपी गई है। विश्वविद्यालय में 100 छात्र-छात्राएं राष्ट्रीय सेवा योजना के अंतर्गत हैं, जबकि एनएसएस की एक और इकाई स्थापित करने की योजना बनाई जा रही है।
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विश्वविद्यालय में 30 जून को ग्रीष्मकालीन अवकाश समाप्त होगा। उसके बाद शिक्षण व अन्य कार्य शुरू होंगे। पांच अगस्त से विश्वविद्यालय में शिक्षण सत्र शुरू करने की योजना है। ग्रीष्मकालीन अवकाश समाप्त होने के बाद राष्ट्रीय सेवा योजना के छात्र-छात्राएं विश्वविद्यालय में आएंगे, लेकिन बिना कार्यक्रम के जागरुकता कार्यक्रमों को कराना संभव नहीं होगा। विश्वविद्यालय के कुलसचिव राकेश कुमार ने बताया कि समन्वयक के लिए विज्ञापन प्रकाशित किया गया है, जबकि कार्यक्रम अधिकारी विश्वविद्यालय स्तर पर ही नामित होंगे। जागरुकता कार्यक्रमों के मामले में जानकारी प्राप्त करेंगे और जल्द ही एनएसएस की गतिविधि तेज हो जाएगी। एनएसएस के कार्यक्रम भी जल्द ही जारी किए जाएंगे।
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- कार्यक्रम अधिकारी की नियुक्ति के बिना प्रभावित हो रहा है कार्य
संवाद न्यूज एजेंसी
सिद्धार्थनगर। सिद्धार्थ विश्वविद्यालय कपिलवस्तु में राष्ट्रीय सेवा योजना की गतिविधि चार माह से ठप पड़ है, क्योंकि फरवरी के बाद कार्यक्रम अधिकारी को नामित नहीं किया गया है। जुलाई से सत्र शुरू होने वाला है, लेकिन एनएसएस का कार्यक्रम भी नहीं बनाया गया है।
भारत-नेपाल सीमा के समीपवर्ती ग्रामीणों को विश्वविद्यालय के स्वयंसेवक एवं स्वयंसेविकाएं जागरूक करते हैं, लेकिन जागरुकता कार्यक्रम ठप पड़ गया है। हालांकि, उच्च अधिकारियों के निर्देश पर कुछ कार्यक्रम किए गए, लेकिन उन कार्यक्रमों की सूचना भी नाम मात्र है।
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पिछले सत्र में एचआरपीजी कॉलेज के डॉ. पूर्णेश नारायण सिंह को राष्ट्रीय सेवा योजना में समन्वयक एवं वाणिज्य संकाय के डॉ. दिनेश प्रसाद को कार्यक्रम अधिकारी बनाया गया था। फरवरी में ही उनके कार्यकाल समाप्त हो गए, उसके बाद इन पदों पर किसी को जिम्मेदारी नहीं सौंपी गई है। विश्वविद्यालय में 100 छात्र-छात्राएं राष्ट्रीय सेवा योजना के अंतर्गत हैं, जबकि एनएसएस की एक और इकाई स्थापित करने की योजना बनाई जा रही है।
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विश्वविद्यालय में 30 जून को ग्रीष्मकालीन अवकाश समाप्त होगा। उसके बाद शिक्षण व अन्य कार्य शुरू होंगे। पांच अगस्त से विश्वविद्यालय में शिक्षण सत्र शुरू करने की योजना है। ग्रीष्मकालीन अवकाश समाप्त होने के बाद राष्ट्रीय सेवा योजना के छात्र-छात्राएं विश्वविद्यालय में आएंगे, लेकिन बिना कार्यक्रम के जागरुकता कार्यक्रमों को कराना संभव नहीं होगा। विश्वविद्यालय के कुलसचिव राकेश कुमार ने बताया कि समन्वयक के लिए विज्ञापन प्रकाशित किया गया है, जबकि कार्यक्रम अधिकारी विश्वविद्यालय स्तर पर ही नामित होंगे। जागरुकता कार्यक्रमों के मामले में जानकारी प्राप्त करेंगे और जल्द ही एनएसएस की गतिविधि तेज हो जाएगी। एनएसएस के कार्यक्रम भी जल्द ही जारी किए जाएंगे।