फ्री ई-पेपर
पर्सनलाइज़्ड फ़ीड
पर्सनलाइज़्ड नोटिफ़िकेशन
चलते-फिरते ख़बरें
लॉयल्टी रिवॉर्ड्स
डाउनलोड करें

सब्सक्राइब करें
Hindi News ›   Uttar Pradesh ›   Siddharthnagar News ›   not open meeting in villages

Siddharthnagar News: ग्राम पंचायतों में समाप्त हो रही खुली बैठक की सरकारी परंपरा

Sat, 20 Apr 2024 01:08 AM IST
गोरखपुर ब्यूरो संवाद न्यूज एजेंसी, सिद्धार्थनगर
संवाद न्यूज एजेंसी, सिद्धार्थनगर Updated Sat, 20 Apr 2024 01:08 AM IST
विज्ञापन
not open meeting in villages
फोटो-
विज्ञापन

- कागजों में बैठक दिखाकर मनमाने ढंग से किया जाता है विकास का कार्य
- खुली बैठक न होने से विभिन्न विकास योजनाओं की ग्रामीणों को नहीं हो पाती है जानकारी, शासन की मंशा पर फिर रहा है पानी

संवाद न्यूज एजेंसी
डुमरियागंज। शासनादेश के बावजूद ग्राम पंचायत की खुली बैठक नहीं हो रही है। उच्च अधिकारियों के विशेष ध्यान ना देने के कारण खुली बैठकें सिर्फ कागजी कोरम पूरा करने का जरिया भर बनकर रह गई हैं।
डुमरियागंज ब्लॉक क्षेत्र के अधिकांश गांवों में खुली बैठक नहीं होने की शिकायतें अधिकारियों से की जा रही है। आरोप लग रहे हैं कि ग्राम प्रधान व बहुउद्देशीय कर्मी मनमाने ढंग से प्रस्ताव पास करके अपनी मनमर्जी से मनरेगा सहित सभी विकास का कार्य करवाते हैं।
विज्ञापन

ग्रामीणों को अपनी बात और प्रस्ताव पेश करने का अवसर ही नहीं मिल पाता। ग्राम पंचायतों के वार्ड सदस्य भी अपने आप को ठगा महसूस कर रहे हैं। उनकी कोई उपयोगिता नहीं रह गई हैं। ग्राम प्रधान, ग्राम पंचायत अधिकारी और ग्राम रोजगार सेवक की तिकड़ी पूरे विकास कार्यों का संचालन करती है। यह मामला एक दो गांवों का नहीं बल्कि अधिकांश गांवों का है। ग्रामीणों को याद नहीं है कि उनके गांव में खुली बैठक कब हुई थी।
विज्ञापन
विज्ञापन

जानकारी के अनुसार, डुमरियागंज ब्लॉक क्षेत्र में 115 ग्राम पंचायतें हैं। जहां पर पूर्व में खुली बैठकें होती थीं। इसमें ग्राम प्रधान, ग्राम पंचायत सचिव, रोजगार सेवक सहित जिम्मेदार अधिकारी, कर्मचारी शामिल होते थे। ग्रामीणों और वार्ड सदस्यों की बातों को सुना जाता था और उनके प्रस्ताव को विकास के एजेंडे में शामिल किया जाता था। उसके बाद विकास कार्यों का खाका तैयार होता था, लेकिन यह गुजरे दिनों की बात हो गई। अब अधिकांश ग्राम पंचायतों में खुली बैठक नहीं होती है। बल्कि ग्राम प्रधान, ग्राम पंचायत सचिव और रोजगार सेवक तीनों मनमर्जी से गुपचुप ढंग से प्रस्ताव और कार्य योजना तैयार करके मनमाने पूर्ण ढंग से कार्य कर रहे हैं। इतना ही नहीं ग्राम पंचायत में खुली बैठक न होने से जरूरतमंदों को विभिन्न लाभकारी योजनाओं का लाभ नहीं मिल पा रहा है।
खुली बैठक संबंधित शासनादेश को तो आलम यह है, कि क्षेत्र पंचायत के सक्षम अधिकारी भी इस तरफ पूरी तरह से बेखबर है। ग्राम पंचायत में प्रधानों की मनमानी कार्यशैली, भाई भतीजावाद पर अंकुश लगाने तथा जरूरतमंदों को विभिन्न योजनाओं का लाभ दिलाने के उद्देश्य से ग्राम पंचायत की खुली बैठक का आयोजन करने का उद्देश्य है। खुली पंचायत में बहुउद्देशीय कर्मी ग्राम प्रधान एवं वार्ड पंचायत सदस्यों समेत ग्रामीणों के एकत्रित होकर विकास कार्यों के चयन पर अपनी सहमति जताते हुए एक प्रस्ताव तैयार करते हैं। वही प्रस्ताव मान्य होता है, लेकिन इसके विपरीत ग्राम प्रधान और ग्राम पंचायत अधिकारी बैठकों का आयोजन नहीं करते। कुछ ग्राम प्रधान कभी कभार साल-छह महीने में एक बैठक कर लेते हैं। इस प्रकार निर्देशों की अनदेखी कर ग्राम पंचायत की होने वाली खुली बैठक की सरकारी परंपरा समाप्त होने के कगार पर पहुंच गई है।

------------

ग्राम पंचायत में हर छह महीने पर रोस्टर के तहत खुली बैठकें कराई जाती हैं। सभी ग्राम प्रधानों को हर महीने खुली बैठक करके विकास कार्यों का प्रस्ताव पास करके विकास कार्यों को संचालित किए जाने के निर्देश हैं। अगर इसका कहीं भी अनुपालन नहीं हो रहा है, तो उसकी जांच करके पालन करवाया जाएगा। शासन की मंशा के तहत विकास कार्यों को क्रियान्वित किया जाता रहेगा।
जितेंद्र कुमार त्रिपाठी, एडीओ पंचायत
विज्ञापन
विज्ञापन

रहें हर खबर से अपडेट, डाउनलोड करें Android Hindi News App, iOS Hindi News App और Amarujala Hindi News APP अपने मोबाइल पे|
Get all India News in Hindi related to live update of politics, sports, entertainment, technology and education etc. Stay updated with us for all breaking news from India News and more news in Hindi.

विज्ञापन
विज्ञापन
विज्ञापन

एड फ्री अनुभव के लिए अमर उजाला प्रीमियम सब्सक्राइब करें

Next Article

AU ऐप में पढ़ें

Followed