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जातिगत सर्वे से शिया समुदाय का कोई नफा-नुकसान नहीं : मौलाना कल्वे जव्वाद

Wed, 06 Oct 2021 10:51 PM IST
Gorakhpur Bureau गोरखपुर ब्यूरो
Updated Wed, 06 Oct 2021 10:51 PM IST
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No profit or loss to Shia community due to caste survey: Maulana Kalve Jawwad
हल्लौर में मजलिस को संबोधित करते शिया धर्मगुरु मौलाना कल्वे जव्वाद। - फोटो : SIDDHARTHNAGAR
जातिगत सर्वे से शिया समुदाय का कोई नफा-नुकसान नहीं : मौलाना कल्वे जव्वाद
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डुमरियागंज (सिद्धार्थनगर)। शिया धर्मगुरु मौलाना कल्वे जव्वाद ने कहा है कि शिया समुदाय अल्पसंख्यकों में भी अल्पसंख्यक है। ऐसे में उसे जातिगत सर्वे से कोई भी नफा-नुकसान होने वाला नहीं है। उन्होंने चिंता व्यक्त करते हुए कहा कि अन्य बोर्ड के अध्यक्ष का चुनाव और गठन का कार्य पूरा हो चुका है, लेकिन अब तक सरकार की ओर से शिया वक्फ बोर्ड के लिए अधिसूचना जारी नहीं की गई है।
उनकी मांग है कि सरकार कोरम पूरा कर बोर्ड अध्यक्ष का चुनाव कराकर काम शुरू कराए। वह तहसील क्षेत्र के हल्लौर कस्बा में मंगलवार को मजहबी कार्यक्रम में शामिल होने आए थे। उन्होंने में कहा कि यह युग आधुनिक और कंप्यूटर, इंटरनेट का है। ऐसे में जमाने के साथ चलने के लिए शिया समुदाय के साथ-साथ सभी कौम और समुदायों के लोगों को अपना पूरा जोर साइंस और टेक्नोलॉजी की तालीम हासिल करने पर देना चाहिए, जिससे उनकी जिंदगी संवर सके।
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उन्होंने शिक्षा की अहमियत पर रोशनी डालते हुए कहा कि इंसान की जिंदगी में इल्म का बड़ा अहम रोल है। चाहे नौकरी हासिल करनी हो या कोई बिजनेस, बिना तालीम के बगैर दुनियावी जरूरत और तरक्की को पूरा नहीं किया जा सकता। तालीम तरक्की के साथ-साथ इंसान की जिंदगी को भी खूबसूरत बनाती है।
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मानवता का दिया पैगाम
हल्लौर कस्बा में मंगलवार की रात इमामबाड़ा कला में अंजुमन गुलदस्ता मातम की ओर से आयोजित अशरे की सातवीं मजलिस को संबोधित करते हुए शिया धर्मगुरु मौलाना कल्वे जव्वाद ने दीन-ए-इस्लाम और पैगंबर मोहम्मद साहब की जिंदगी व किरदार पर विस्तार से प्रकाश डालते हुए लोगों से इस्लाम की ओर से बताए गए अमन, शांति और मानवता के रास्ते पर चलने का पैगाम दिया।

उन्होंने मजलिस के आखिर में पैगंबर हजरत मोहम्मद और उनके नवासे इमाम हसन की शहादत को बयां किया। मजलिस के बाद मौलाना ने लोगों से देश और दुनिया से आतंकवाद के खात्मे और कोरोना वायरस से निजात के लिए अल्लाह से दुआ कराई। मजलिस से पहले मरसिया ख्वानी हैदरे कर्रार और उनके सहयोगी ने की। इस दौरान मौलाना मोहम्मद हसन, नफीस हल्लौरी, समाजसेवी नवेद रिजवी, वजाहत हुसैन, शबाहत हुसैन रिजवी, कसीम रिजवी, गुलरेज रिजवी, अख्तर रजा जावेद, काजिम रजा, अकबर मेंहदी, ताकीब रिजवी, नजर अब्बास, अजीम हैदर, मेहंदी हैदर, महफूज, अब्बास एचएनएफ, शाहनवाज लल्ला, आबिद आदि मौजूद रहे।
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