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Siddharthnagar News: खून के अभाव में अब नहीं जाएगी जान

Sun, 22 Jun 2025 11:22 PM IST
Gorakhpur Bureau गोरखपुर ब्यूरो
Updated Sun, 22 Jun 2025 11:22 PM IST
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No longer going to know in the absence of blood
मेडिकल कॉलेज के परिसर में ​स्थित ब्लड़ बैंक। संवाद
श्याम सुंदर तिवारी
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सिद्धार्थनगर। अब ब्लड के अभाव और देरी के कारण प्रसूता और हादसे के शिकार लोगों की सांसें नहींं टूटेंगी। क्योंकि, जनपद में जल्द ही तीन सामुदायिक स्वास्थ्य केंद्रों पर ब्लड बैंक बनेगा।
इससे समय से रक्त मिल जाएगा या अपना कोई तत्काल रक्त दे सकेगा, जिससे जान बचाई जा सके। जबकि, अभी तक हालत यह हैं कि जब तक लोग मेडिकल कॉलेज पहुंचते हैं और ब्लड मिलता व चढ़ता है। देरी के कारण मरीजों की जान चली जाती है।
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इन ब्लड बैंकों के बन जाने से उक्त समस्या दूर हो जाएगी। क्योंकि, तत्काल वहीं पर ब्लड मिल जाएगा या डोनेट करने की व्यवस्था रहेगी तो कोई भी मदद में आ जाएगा। इनके खुलने से जिले में ब्लड बैंकों की संख्या चार हो जाएगी। बैकअप देने का काम मेडिकल कॉलेज का ब्लड बैंक करेगा।
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जिला अस्पताल बनाने के साथ ही ब्लड बैंक की स्थापना हुई थी। कई साल में आबादी बढ़ी, हादसे और कई प्रकार की बीमारियां भी बढ़ीं। इसमें ब्लड की कमी लोगों की जान के लिए खतरनाक साबित हो रही है। खास करके हादसे के शिकार लोगों और प्रसव पूर्व या बाद में ब्लड की कमी या अधिक रक्त गिरने से पीड़ित महिलाओं जान जोखिम में पड़ जाती है।
डुमरियागंज, इटवा, बिस्कोहर बौर बस्ती बाॅर्डर इलाके के मरीजों को पहुंचने में कई बार देर हो जाती है। ऐसे में रक्त की कमी उनकी जान पर बन आती है।
इन समस्याओं को देखते हुए जनपद में तीन और ब्लड बैंक खोले जाने की कवायद शुरू की गई है। इसमें इटवा, मिठवल और उसका सामुदायिक स्वास्थ्य केंद्र को चिह्नित किया गया है। जहां ब्लड बैंक स्थापित होगा। स्वास्थ्य विभाग के मुताबिक कुछ मशीन भी आ चुकी है। जल्द ही इसके बनाने का काम शुरू हो जाएगा। इसमें कम होने पर वहां तय कोटा के अनुसार रखेंगे और जरूरत पड़ने पर वहां से लिया जा सकेगा। जरूरत के अनुसार आदान- प्रदान होता रहे, जिससे सही तरीके से संचालित हो और लोगों को लाभ मिले।
जनपद में होती है इतनी डिलीवरी : स्वास्थ्य विभाग के आंकड़ों के मुताबिक जनपद में हर साल 30 हजार से अधिक डिलीवरी होती है। जिले में गर्भवती महिलाओं में अक्सर ब्लड की कमी की समस्या आती है जो आखिरी समय में उनके लिए जानलेवा साबित हो जाती है। विशेषज्ञ के अनुसार 11 ग्राम हीमोग्लोबिन से कम की गर्भवतियों को एनिमिक-25 प्रतिशत। इसमें कुछ लोगों का इलाज के बाद बढ़ जाता है।

जबकि, अगर बढ़ता नहीं है तो चढ़ाने की स्थिति बन जाती है। हालांकि, इसमें बढ़ने की संभावना अधिक रहता है। सात ग्राम से कम हीमोग्लोबिन वाली गर्भवती महिलाओं को गंभीर एनिमिक करीब 2 प्रतिशत, जिन्हें हर हाल में ब्लड चढ़ाना पड़ता है। संवाद
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