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94 करोड़ का नया बाईपास : जाम से निजात मिलने की जगी उम्मीद

Thu, 12 Feb 2026 12:12 AM IST
गोरखपुर ब्यूरो संवाद न्यूज एजेंसी, सिद्धार्थनगर
संवाद न्यूज एजेंसी, सिद्धार्थनगर Updated Thu, 12 Feb 2026 12:12 AM IST
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New bypass worth Rs 94 crore: Hope of getting rid of traffic jams raised
संवाद न्यूज एजेंसी
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सिद्धार्थनगर। शहर के सिद्धार्थ तिराहा और स्टेशन रोड पर लगने वाले भीषण जाम से जल्द ही लोगों को निजात मिल सकती है। शहर के बाहर सोहांस-लोटन मार्ग से बर्डपुर मार्ग को पुराने नौगढ़ के पास जोड़ने के लिए 93.99 करोड़ रुपये से 2.15 किमी लंबा बाईपास बनेगा।
इससे सोहांस, पकड़ी और सनई चौराहे की तरफ से आने वाले वाहन बिना शहर में प्रवेश किए ही बाईपास होकर निकल जाएंगे। इससे उनकों जाम में फंसना नहीं पड़ेगा। पीडब्लूडी की तरफ से शासन को भेजे कार्ययोजना के अनुसार बाईपास निर्माण के लिए दो गांवों के किसानों की 7.88 हेक्टेयर भूमि अधिग्रहण पर 25 करोड़ रुपये खर्च होंगे।
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शहर के पकड़ी चौराहा, शोहरतगढ़ व बांसी से आने वाले वाहन चालकों को सिद्धार्थ तिराहा व स्टेशन रोड होते हुए सोहांस लोटन जाना पड़ता है। इन वाहनों के प्रवेश के दौरान शहर में भीषण जाम की स्थिति उत्पन्न हो जाती है, जिसमें लोग घंटों फंसे रहते हैं। इसको देखते हुए विधायक श्यामधनी राही के प्रस्ताव पर पीडब्ल्यूडी ने शहर के बाहर नए बाईपास निर्माण की कार्ययोजना तैयार कर शासन को भेजा है। जिसके तहत पुरानी नौगढ़ के पास जमुआर नाला के जलभराव वाले निचले क्षेत्र में बाईपास का निर्माण होगा।
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इसके लिए नौगढ़ तहसील क्षेत्र के ग्राम धौरीकुइंया और बर्डपुर नंबर-14 के 110 से अधिक किसानों की भूमि चिह्नित हुई है। जमुआर नाला के किनारे बनने वाला यह बाईपास पुरानी नौगढ़ पुल के पास एनएच-28 से जुड़ेगा, जिससे शहरियों समेत बाहर से आने वाले वाहन चालकों को जाम से जूझना नहीं पड़ेगा।
पीडब्ल्यूडी प्रांतीय खंड के अधिशासी अभियंता कमल किशोर ने कार्ययोजना तैयार कर स्वीकृति के लिए 10 फरवरी को शासन में भेजा है।
बाईपास वाले क्षेत्र में रहता है जलभराव : बाईपास निर्माण स्थल निचली भूमि में है, जहां बारिश के मौसम में जलभराव रहता है। जिससे इस क्षेत्र में आने-जाने के लिए लोगों को नाव का सहारा लेना पड़ता है। वर्तमान में यहां पर खेती की जा रही है। बाईपास के निर्माण के लिए किसानों की कृषि भूमि अधिग्रहीत की जाएगी।

वहीं बाईपास निर्माण से इसके उत्तर तरफ स्थित सैंकड़ों हेक्टेयर निचली भूमि खेती करने और मकान बनाने के लिए सुरक्षित हो जाएगी। अभी तक बारिश के मौसम में जलभराव होने से इस क्षेत्र में खेती करना अथवा भवन बनान संभव नहीं था। इससे एक नई रोड बनने से इसके आसपास व्यवसायिक गतिविधियां भी संचालित होगी, जिससे लोगों को रोजगार मिलेगा।
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