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वाहन घपलेबाजी में कई सीडीपीओ भी शामिल
ब्यूरो/अमर उजाला सिद्धार्थनगर
Updated Wed, 20 Jul 2016 10:43 PM IST
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जिला पंचायत सभागार में शुक्रवार को जिला योजना की बैठक लेते सपा के प्रभारी मंत्री रामसकल गुर्जर व डीएम।
- फोटो : अमर उजाला
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सिद्धार्थनगर। अनुबंधित वाहनों के नाम पर लाखों की घपलेबाजी के मामले में जिला कार्यक्रम अधिकारी कार्यालय उलझता जा रहा है। डीपीओ और सीडीपीओ के दावे एक-दूसरे के ठीक उलट हैं। डीपीओ जहां नए नंबर वाले बोलेरो-स्कार्पियो के इस्तेमाल के दावे कर रहे हैं, वहीं सभी सीडीपीओ ने स्वीकार किया है कि उन्हें प्रस्तावित नंबर वाले वाहन ही भ्रमण के लिए दिए गए थे, जो बोलेरो थे।
वर्ष 2014-15 में अनुबंध के आधार पर डीपीओ कार्यालय ने नगर से सटे हुसैनगंज के राज ट्रेवेल एजेंसी से अधिकारियों के भ्रमण के लिए बोलेरो-स्कार्पियो जैसे लग्जरी वाहनों का अनुबंध किया था। जिन वाहनों से विभाग का अनुबंध हुआ था, उनके नंबर ट्रक, टेंपो जैसे मालवाहक के थे।
आरटीआई से मामला उजागर होने के बाद डीपीओ अजय कुमार त्रिपाठी की दलील थी कि ट्रेवेल एजेंसी ने भूलवश मालवाहक वाहनों के नंबर दे दिए थे, जिस पर आदेश जारी हो गया। बाद में चूक की जानकारी होने पर उसने स्वीकृत नंबरों की बजाए नए नंबर के बोलेरो उपलब्ध कराए थे।
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डीपीओ के इस दावे को खुद छह ब्लाकों के सीडीपीओ ने झुठला दिया है। वाहनों का इस्तेमाल करने वाले डुमरियागंज, बांसी, इटवा, मिठवल, बढ़नी के सीडीपीओ ने 20 जून को प्रस्तुत अपने लिखित बयान में साफ कहा है कि उन्हें अनुबंधित नंबर वाले वाहन ही मिले थे।
लॉग बुक पर इसका विवरण अंकित किए जाने का भी दावा किया है। सवाल यह है कि जब ट्रेवेल एजेंसी ने खुद माना है कि उसने अनुबंधित नंबर वाले वाहन अधिकारियों को दिए ही नहीं तो फिर सीडीपीओ ने उन वाहनों का इस्तेमाल कैसे कर लिया। पूरे मामले में जिम्मेदार अफसरों की मिलीभगत उजागर हो रही है। बावजूद वह इसे छिपाने की कोशिश में जुटे हुए हैं।
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वर्ष 2014-15 में अनुबंध के आधार पर डीपीओ कार्यालय ने नगर से सटे हुसैनगंज के राज ट्रेवेल एजेंसी से अधिकारियों के भ्रमण के लिए बोलेरो-स्कार्पियो जैसे लग्जरी वाहनों का अनुबंध किया था। जिन वाहनों से विभाग का अनुबंध हुआ था, उनके नंबर ट्रक, टेंपो जैसे मालवाहक के थे।
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आरटीआई से मामला उजागर होने के बाद डीपीओ अजय कुमार त्रिपाठी की दलील थी कि ट्रेवेल एजेंसी ने भूलवश मालवाहक वाहनों के नंबर दे दिए थे, जिस पर आदेश जारी हो गया। बाद में चूक की जानकारी होने पर उसने स्वीकृत नंबरों की बजाए नए नंबर के बोलेरो उपलब्ध कराए थे।
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डीपीओ के इस दावे को खुद छह ब्लाकों के सीडीपीओ ने झुठला दिया है। वाहनों का इस्तेमाल करने वाले डुमरियागंज, बांसी, इटवा, मिठवल, बढ़नी के सीडीपीओ ने 20 जून को प्रस्तुत अपने लिखित बयान में साफ कहा है कि उन्हें अनुबंधित नंबर वाले वाहन ही मिले थे।
लॉग बुक पर इसका विवरण अंकित किए जाने का भी दावा किया है। सवाल यह है कि जब ट्रेवेल एजेंसी ने खुद माना है कि उसने अनुबंधित नंबर वाले वाहन अधिकारियों को दिए ही नहीं तो फिर सीडीपीओ ने उन वाहनों का इस्तेमाल कैसे कर लिया। पूरे मामले में जिम्मेदार अफसरों की मिलीभगत उजागर हो रही है। बावजूद वह इसे छिपाने की कोशिश में जुटे हुए हैं।