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अच्छे काम में सहयोग का पैगाम देता है इस्लाम
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अच्छे काम में सहयोग का पैगाम देता है इस्लाम
डुमरियागंज। तहसील क्षेत्र के कस्बा हल्लौर स्थित इमामबाड़ा हुसैनिया बाबुल में बृहस्पतिवार रात आयोजित मरसिया मजलिस में मौलाना ने लोगों को भलाई के रास्ते पर चलने का पैगाम दिया। कार्यक्रम की शुरुआत में अंबर मेहंदी और उनके साथियों ने मरसियाख्वानी की। उसके बाद मौलाना मोहम्मद मोहसिन ने मजलिस को खिताब किया। कहा कि इस्लाम सभी लोगों को मोहब्बत का संदेश देता है। उन्होंने हजरत इमाम हुसैन की शहादत का जिक्र करते हुए कहा कि जब तक दुनिया कायम है तब तक इमाम हुसैन की शहादत को याद किया जाएगा।
उन्होंने ने कहा की मजहबे इस्लाम का पैगाम है कि दूसरे मजहब के लोगों के साथ मोहब्बत से पेश आओ। इस्लाम हर एक इंसान के अच्छे कामों में साथ देने का संदेश देता है। उन्होंने कहा कि इंसान को बुराइयों से दूर रहकर नेक कामों में इजाफा करते रहना चाहिए। लाख दौलत व ताकत आ जाए, कभी गुरूर (अहंकार) नहीं करना चाहिए। इस दौरान मौलाना मोहम्मद हसन, मौलाना महफूज, मौलाना तफसीर, डॉ. फरीद हैदर रिजवी, हैदर हल्लौरी, जिगर हल्लौरी, काजिम मेहंदी, कसीम रिजवी, आले रजा माले, अकबर मेहंदी, नायाब हुसैन, शादाब हुसैन मुन्ना, मोजिज, अब्बास अली मास्टर, अकबर आलम, शमशाद, फैजी, अहमद रजा मोहम्मद आदि मौजूद रहे।
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डुमरियागंज। तहसील क्षेत्र के कस्बा हल्लौर स्थित इमामबाड़ा हुसैनिया बाबुल में बृहस्पतिवार रात आयोजित मरसिया मजलिस में मौलाना ने लोगों को भलाई के रास्ते पर चलने का पैगाम दिया। कार्यक्रम की शुरुआत में अंबर मेहंदी और उनके साथियों ने मरसियाख्वानी की। उसके बाद मौलाना मोहम्मद मोहसिन ने मजलिस को खिताब किया। कहा कि इस्लाम सभी लोगों को मोहब्बत का संदेश देता है। उन्होंने हजरत इमाम हुसैन की शहादत का जिक्र करते हुए कहा कि जब तक दुनिया कायम है तब तक इमाम हुसैन की शहादत को याद किया जाएगा।
उन्होंने ने कहा की मजहबे इस्लाम का पैगाम है कि दूसरे मजहब के लोगों के साथ मोहब्बत से पेश आओ। इस्लाम हर एक इंसान के अच्छे कामों में साथ देने का संदेश देता है। उन्होंने कहा कि इंसान को बुराइयों से दूर रहकर नेक कामों में इजाफा करते रहना चाहिए। लाख दौलत व ताकत आ जाए, कभी गुरूर (अहंकार) नहीं करना चाहिए। इस दौरान मौलाना मोहम्मद हसन, मौलाना महफूज, मौलाना तफसीर, डॉ. फरीद हैदर रिजवी, हैदर हल्लौरी, जिगर हल्लौरी, काजिम मेहंदी, कसीम रिजवी, आले रजा माले, अकबर मेहंदी, नायाब हुसैन, शादाब हुसैन मुन्ना, मोजिज, अब्बास अली मास्टर, अकबर आलम, शमशाद, फैजी, अहमद रजा मोहम्मद आदि मौजूद रहे।
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