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Siddharthnagar News: जेब में बाजार... किस्तों में जिंदगी गांवों तक ‘उधार एप’ का जालन
Sat, 16 May 2026 12:45 AM IST
गोरखपुर ब्यूरो
संवाद न्यूज एजेंसी, सिद्धार्थनगर
संवाद न्यूज एजेंसी, सिद्धार्थनगर
Updated Sat, 16 May 2026 12:45 AM IST
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संवाद न्यूज एजेंसी
सिद्धार्थनगर। गांवों के बाजार अब सिर्फ दुकानों तक सीमित नहीं रहे। मोबाइल स्क्रीन पर सजे ऑनलाइन स्टोर और अभी खरीदो, बाद में चुकाओ जैसे ऑफर युवाओं को तेजी से आकर्षित कर रहे हैं। कपड़े, मोबाइल, ईयरफोन, बाइक एसेसरीज और यहां तक कि रोजमर्रा की जरूरत की चीजें भी अब किस्तों पर खरीदी जा रही हैं। इससे जहां खरीदारी आसान हुई है, वहीं गांवों में धीरे-धीरे कर्ज और फिजूल खर्च की नई आदत भी पनपने लगी है।
जिले के कई गांवों में युवाओं के बीच डिजिटल उधार एप और ‘बाय नाउ पे लेटर’ सेवाओं का चलन तेजी से बढ़ा है। पहले लोग बड़ी जरूरतों के लिए ही उधार लेते थे, लेकिन अब दो से पांच हजार रुपये तक की छोटी खरीदारी भी ईएमआई पर होने लगी है। ऑनलाइन कंपनियों के भारी छूट, आसान किश्त और बिना ज्यादा कागजी प्रक्रिया वाले ऑफर लोगों को लुभा रहे हैं। शोहरतगढ़ क्षेत्र के युवक अमन वर्मा बताते हैं कि मोबाइल और हेडफोन ऑनलाइन किस्तों पर खरीदना आसान लगा। शुरुआत में रकम कम लगी, लेकिन बाद में हर महीने कई किश्तें जुड़ गईं। अब खर्च संभालना मुश्किल हो रहा है। वहीं, बांसी क्षेत्र के छात्र राहुल निषाद कहते हैं कि दोस्त नए गैजेट लेते हैं तो खुद पर भी वैसा सामान लेने का दबाव बनता है। ईएमआई होने से तुरंत पैसा नहीं देना पड़ता, इसलिए लोग जल्दी खरीदारी कर लेते हैं।
स्थानीय दुकानदार भी बाजार के बदलते स्वरूप को महसूस कर रहे हैं। कपड़ा व्यापारी शकील अहमद कहते हैं कि पहले लोग नकद खरीदारी ज्यादा करते थे, लेकिन अब ज्यादातर ग्राहक ऑनलाइन दाम देखकर आते हैं और डिजिटल भुगतान करते हैं। कई बार दुकान से सामान देखने के बाद ऑनलाइन ऑर्डर कर देते हैं। इससे छोटे व्यापारियों की बिक्री प्रभावित हो रही है।
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बैंकिंग और वित्त से जुड़े जानकारों का कहना है कि बिना योजना के लगातार किश्तों पर खरीदारी आर्थिक दबाव बढ़ा सकती है।
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सिद्धार्थनगर। गांवों के बाजार अब सिर्फ दुकानों तक सीमित नहीं रहे। मोबाइल स्क्रीन पर सजे ऑनलाइन स्टोर और अभी खरीदो, बाद में चुकाओ जैसे ऑफर युवाओं को तेजी से आकर्षित कर रहे हैं। कपड़े, मोबाइल, ईयरफोन, बाइक एसेसरीज और यहां तक कि रोजमर्रा की जरूरत की चीजें भी अब किस्तों पर खरीदी जा रही हैं। इससे जहां खरीदारी आसान हुई है, वहीं गांवों में धीरे-धीरे कर्ज और फिजूल खर्च की नई आदत भी पनपने लगी है।
जिले के कई गांवों में युवाओं के बीच डिजिटल उधार एप और ‘बाय नाउ पे लेटर’ सेवाओं का चलन तेजी से बढ़ा है। पहले लोग बड़ी जरूरतों के लिए ही उधार लेते थे, लेकिन अब दो से पांच हजार रुपये तक की छोटी खरीदारी भी ईएमआई पर होने लगी है। ऑनलाइन कंपनियों के भारी छूट, आसान किश्त और बिना ज्यादा कागजी प्रक्रिया वाले ऑफर लोगों को लुभा रहे हैं। शोहरतगढ़ क्षेत्र के युवक अमन वर्मा बताते हैं कि मोबाइल और हेडफोन ऑनलाइन किस्तों पर खरीदना आसान लगा। शुरुआत में रकम कम लगी, लेकिन बाद में हर महीने कई किश्तें जुड़ गईं। अब खर्च संभालना मुश्किल हो रहा है। वहीं, बांसी क्षेत्र के छात्र राहुल निषाद कहते हैं कि दोस्त नए गैजेट लेते हैं तो खुद पर भी वैसा सामान लेने का दबाव बनता है। ईएमआई होने से तुरंत पैसा नहीं देना पड़ता, इसलिए लोग जल्दी खरीदारी कर लेते हैं।
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स्थानीय दुकानदार भी बाजार के बदलते स्वरूप को महसूस कर रहे हैं। कपड़ा व्यापारी शकील अहमद कहते हैं कि पहले लोग नकद खरीदारी ज्यादा करते थे, लेकिन अब ज्यादातर ग्राहक ऑनलाइन दाम देखकर आते हैं और डिजिटल भुगतान करते हैं। कई बार दुकान से सामान देखने के बाद ऑनलाइन ऑर्डर कर देते हैं। इससे छोटे व्यापारियों की बिक्री प्रभावित हो रही है।
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बैंकिंग और वित्त से जुड़े जानकारों का कहना है कि बिना योजना के लगातार किश्तों पर खरीदारी आर्थिक दबाव बढ़ा सकती है।
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