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कई विद्यालय जलमग्न, पहले दिन नहीं हो सकी पढ़ाई
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डुमरियागंज के प्राथमिक विद्यालय तेनुहार नवीन के परिसर में भरा बाढ़ का पानी।
- फोटो : SIDDHARTHNAGAR
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कई विद्यालय जलमग्न, पहले दिन नहीं हो सकी पढ़ाई
डुमरियागंज। डुमरियागंज ब्लॉक क्षेत्र के 214 प्राथमिक विद्यालयों में से 22 में बुधवार को पठन-पाठन नहीं हो सका। बाढ़ और बारिश का पानी भरे होने के चलते बच्चे स्कूल में नहीं आए। कुछ जगहों पर अध्यापक पानी के बाहर ही बच्चों को होमवर्क देकर घर भेजा। कई स्कूलों में तो बड़े लोगों की कमर तक पानी भरा है।
परिषदीय स्कूलों में शिक्षा को गुणवत्तापरक बनाने के लिए सरकार जोर दे रही। स्कूलों में कान्वेंट जैसी पढ़ाई देने का दावा कर रही है। कई स्कूलों को मॉडल स्कूल बनाने की योजनाएं भी फाइलों में है। यूनीफार्म, पुस्तकें, बैग, मिड डे मील आदि पर बजट प्रतिवर्ष खर्च हो रहा है। इसके बाद भी यह विद्यालय मूलभूत सुविधाओं के लिए ग्राम पंचायतों के भरोसे हैं। शिक्षा विभाग के पास स्कूलों को सुविधा संपन्न बनाने के लिए बजट नहीं है। बरसात में क्षेत्र के कई स्कूूूलों में जलभराव इस कदर हो जाता है कि कई दिनों के लिए बच्चों की पढ़ाई बंद करनी पड़ती है।
बुधवार को भी यही हाल दिखा। डेढ़ वर्ष बाद शासन के निर्देश पर विद्यालय खोल दिए गए। मगर क्षेत्र के कई प्राथमिक विद्यालय बाढ़ से घिरे होने कारण नहीं खुल सके। इसके लिए बच्चे चाहते हुए भी विद्यालय तक नहीं जा सके। इस संबंध में खंड शिक्षा अधिकारी श्याम प्रताप सिंह ने बताया कि जिन स्कूलों में पानी भरा है, वहां के अध्यापकों से किसी दूसरी जगह पर बच्चों को पढ़ाने के लिए निर्देशित किया गया था। शिक्षण कार्य में अगर कहीं लापरवाही बरती गई होगी, तो पता करवा कर कार्रवाई की जाएगी।
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संक्रामक बीमारी फैलने का खतरा
ब्लॉक क्षेत्र में 22 स्कूल जलमग्न हैं। इससेे पानी के सड़ांध के दुर्गंध और तेज धूप से संक्रामक रोग फैलने का खतरा बढ़ सकता है।
इन विद्यालयों में नहीं हुई पढ़ाई
ब्लॉक क्षेत्र के प्राथमिक विद्यालय खम्हरिया, सीर मझारी, चकमझारी, रसूलपुर सोनखर, बहेरिया, कादिराबाद, वीरपुर, महोखवां, जिमड़ी, उपधी, अल्लापुर, तेनुहार, नवीन मदारा सहित 22 स्कूलों में पानी भरा है।
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डुमरियागंज। डुमरियागंज ब्लॉक क्षेत्र के 214 प्राथमिक विद्यालयों में से 22 में बुधवार को पठन-पाठन नहीं हो सका। बाढ़ और बारिश का पानी भरे होने के चलते बच्चे स्कूल में नहीं आए। कुछ जगहों पर अध्यापक पानी के बाहर ही बच्चों को होमवर्क देकर घर भेजा। कई स्कूलों में तो बड़े लोगों की कमर तक पानी भरा है।
परिषदीय स्कूलों में शिक्षा को गुणवत्तापरक बनाने के लिए सरकार जोर दे रही। स्कूलों में कान्वेंट जैसी पढ़ाई देने का दावा कर रही है। कई स्कूलों को मॉडल स्कूल बनाने की योजनाएं भी फाइलों में है। यूनीफार्म, पुस्तकें, बैग, मिड डे मील आदि पर बजट प्रतिवर्ष खर्च हो रहा है। इसके बाद भी यह विद्यालय मूलभूत सुविधाओं के लिए ग्राम पंचायतों के भरोसे हैं। शिक्षा विभाग के पास स्कूलों को सुविधा संपन्न बनाने के लिए बजट नहीं है। बरसात में क्षेत्र के कई स्कूूूलों में जलभराव इस कदर हो जाता है कि कई दिनों के लिए बच्चों की पढ़ाई बंद करनी पड़ती है।
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बुधवार को भी यही हाल दिखा। डेढ़ वर्ष बाद शासन के निर्देश पर विद्यालय खोल दिए गए। मगर क्षेत्र के कई प्राथमिक विद्यालय बाढ़ से घिरे होने कारण नहीं खुल सके। इसके लिए बच्चे चाहते हुए भी विद्यालय तक नहीं जा सके। इस संबंध में खंड शिक्षा अधिकारी श्याम प्रताप सिंह ने बताया कि जिन स्कूलों में पानी भरा है, वहां के अध्यापकों से किसी दूसरी जगह पर बच्चों को पढ़ाने के लिए निर्देशित किया गया था। शिक्षण कार्य में अगर कहीं लापरवाही बरती गई होगी, तो पता करवा कर कार्रवाई की जाएगी।
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संक्रामक बीमारी फैलने का खतरा
ब्लॉक क्षेत्र में 22 स्कूल जलमग्न हैं। इससेे पानी के सड़ांध के दुर्गंध और तेज धूप से संक्रामक रोग फैलने का खतरा बढ़ सकता है।
इन विद्यालयों में नहीं हुई पढ़ाई
ब्लॉक क्षेत्र के प्राथमिक विद्यालय खम्हरिया, सीर मझारी, चकमझारी, रसूलपुर सोनखर, बहेरिया, कादिराबाद, वीरपुर, महोखवां, जिमड़ी, उपधी, अल्लापुर, तेनुहार, नवीन मदारा सहित 22 स्कूलों में पानी भरा है।