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68 हजार बच्चे कुपोषित, डेढ़ साल में इलाज को पहुंचे 124

Wed, 30 Oct 2019 10:06 PM IST
Gorakhpur Bureau गोरखपुर ब्यूरो
Updated Wed, 30 Oct 2019 10:06 PM IST
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malnutrition problem
जिला अस्पताल का एनआरसी कक्ष - फोटो : SIDDHARTHNAGAR
फोटो-
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सुविधाएं उपलब्ध, पर नहीं पहुंच रहे कुपोषित बच्चे
68 हजार बच्चे कुपोषित, जिला अस्पताल में पोषण पुनर्वास केंद्र पर डेढ़ साल में इलाज को पहुंचे 124
आंगनबाड़ी कार्यकर्ताओं की शिथिलता उजागर
संतोष श्रीवास्तव
सिद्धार्थनगर। जिले में 0-5 वर्ष के बीच 68 हजार बच्चे कुपोषित हैं। पोषाहार के साथ ही बेहतर इलाज के लिए जिला अस्पताल में पोषण पुनर्वास केंद्र भी स्थापित किया गया है। केंद्र पर आंगनबाड़ी कार्यकर्ताओं को कुपोषित बच्चों को पहुंचाने की जिम्मेदारी दी गई है, पर संचालन के डेढ़ सालों में केवल 124 बच्चे ही पहुंचे। इनमें आंगनबाड़ी केंद्रों से आने वाले बच्चों की संख्या सिर्फ 60 है। सुविधाएं मिलने के साथ ही जिलाधिकारी के सख्त तेवर के बाद भी आंगनबाड़ी और आशा कार्यकर्ता बच्चों को वार्ड में नहीं पहुंचा पा रही हैं।
बाल विकास एवं पुष्टाहार विभाग के आंकड़ों पर नजर दौड़ाएं तो 3112 आंगनबाड़ी केंद्रों पर 3 लाख 75 हजार 609 बच्चों का वजन कराए जाने पर 68 हजार बच्चे कुपोषित पाए गए। इनमें 17 हजार 466 बच्चे अति कुपोषित हैं। इन आंकड़ों से एक तरफ जहां विभागीय योजनाओं, कार्यक्रमों की सार्थकता पर सवाल उठना स्वाभाविक है, वहीं, स्थानीय स्तर पर इलाज की बेहतर व्यवस्था के बावजूद कुपोषित बच्चों को पोषित करने की दिशा में लापरवाही व शिथिलता सामने आई है। जून 2018 से संयुक्त जिला चिकित्सालय में 10 पोषण पुनर्वास केंद्र का संचालन शुरू किया। जहां बच्चों को 14 दिन तक रहने व भोजन इत्यादि की व्यवस्था है। बाल रोग विशेषज्ञों की देखरेख में इलाज कराने के लिए आंगनबाड़ी व आशा कार्यकर्ताओं को विशेष रूप से निर्देश दिए गए हैं। एनआरसी में उपलब्ध आंकड़ों के मुताबिक डेढ़ वर्षों में भर्ती 124 में आंगनबाड़ी कार्यकर्ताओं के माध्यम से सिर्फ 60, आशा कार्यकर्ताओं ने नौ बच्चों को इलाज के लिए पहुंचाया। जबकि जिला अस्पताल की ओपीडी व अन्य स्रोतों के माध्यम से भर्ती बच्चों की संख्या 55 है। मौजूदा समय में एक बच्चा भर्ती है, नौ बेड खाली पड़े हैं। डीएम दीपक मीणा ने बताया कि मामले की रिपोर्ट प्रतिदिन मंगाई जा रही है। समीक्षा की जा रही है। शिथिलता मिलने पर संबंधित को दिशा निर्देश दिए जा रहे हैं। लापरवाही पर कार्रवाई की जाएगी।
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भर्ती होने वालों में बच्चियां अधिक
संयुक्त जिला चिकित्सालय में स्थापित पोषण पुनर्वास केंद्र में अब तक भर्ती 124 मासूमों में सर्वाधिक 69 की संख्या बच्चियों की है। बच्चों की संख्या 54 है। यह आंकड़ा निश्चय ही चौंकाने वाला है। एक तरफ जहां बेटी पढ़ाओ, बेटी बचाओ और मुख्यमंत्री कन्या सुमंगला योजना लागू की गई हैं, वहीं यह आंकड़ा भयावह और चिंताजनक है।
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तीन ब्लॉकों से भर्ती नहीं हुए बच्चे
बाल विकास एवं पुष्टाहार विभाग की प्रगति पुस्तिका के मुताबिक जिला अस्पताल में स्थापित एनआरसी में जुलाई 2019 से अब तक तीन ब्लॉक बढ़नी, खुनियांव व लोटन से एक भी बच्चे भर्ती नहीं हुए हैं। जबकि बढ़नी में कुपोषित 7511, अति कुपोषित, 2295, खुनियांव में कुपोषित 3939, अति कुपोषित 1196, लोटन में कुपोषित 508 व अतिकुपोषित 159 बच्चे पहले से ही चिह्नित हैं। डुमरियागंज, शोहरतगढ़ व शहर से एक-एक बच्चे शामिल हैं।

गोद लेने वाले अफसर भी मौन
कुपोषित बच्चों को पोषित करने की दिशा में 92 गांवों को अफसरों ने गोद ले रखा हैं। इनमें डीएम, सीडीओ समेत अन्य विभागों के अधिकारी हैं। ऐसे में उपरोक्त गांवों में कुपोषित बच्चों को पोषित करने की गरज से एनआरसी में पहुंचाने की दिशा में कोई सार्थक प्रयास नहीं किया जा रहा है।
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