{"_id":"64bc2c368a795fd03008855c","slug":"make-an-offering-the-date-of-birth-will-be-changed-in-the-records-of-archives-your-name-will-be-registered-on-others-land-siddharthnagar-news-c-208-1-sgkp1009-2010-2023-07-23","type":"story","status":"publish","title_hn":"Siddharthnagar News: चढ़ावा दीजिए... अभिलेखागार के रिकॉर्ड में बदल जाएगी जन्म तिथि, दूसरे की जमीन पर दर्ज हो जाएगा आपका नाम","category":{"title":"City & states","title_hn":"शहर और राज्य","slug":"city-and-states"}}
Siddharthnagar News: चढ़ावा दीजिए... अभिलेखागार के रिकॉर्ड में बदल जाएगी जन्म तिथि, दूसरे की जमीन पर दर्ज हो जाएगा आपका नाम
Sun, 23 Jul 2023 12:51 AM IST
गोरखपुर ब्यूरो
संवाद न्यूज एजेंसी, सिद्धार्थनगर
संवाद न्यूज एजेंसी, सिद्धार्थनगर
Updated Sun, 23 Jul 2023 12:51 AM IST
विज्ञापन
कलेक्ट्रेट स्थित अभिलेखागार ।संवाद
देवरिया। अभिलेखागार के रिकॉर्ड में जन्म-मृत्यु रजिस्टर में तिथि परिवर्तित करानी हो, या किसी और की जमीन अपने नाम पर दर्ज करानी हो, चढ़ावा दीजिए तो सबकुछ संभव है। मंडलायुक्त के निर्देश पर एसडीएम तमकुहीराज की जांच में रजिस्टर का पन्ना फाडकर जन्म तिथि में हेरफेर का मामला सामने आया है। इसके बाद एक बार फिर अभिलेखागार के कर्मचारियों की मिलीभगत से अभिलेखों में फेरबदल का खेल सामने आया है। मामले में मंडलायुक्त रवि कुमार एनजी ने दोषी कर्मचारियों के विरुद्ध कार्रवाई का आदेश दिया है। इससे पहले भी अभिलेखागार में कागजों में हेरफेर के मामले सामने आ चुके हैं। जिनमें जमीन का मालिकाना हक ही बदल दिया गया था।
कुशीनगर जिले की गड़हिया निवासी शांति देवी पत्नी राजकिशोर ने मंडलायुक्त से शिकायत की थी। आरोप लगाया था कि इसी गांव के रहने वाले देवनारायण की जन्म तिथि कर्मचारियों की मिलीभगत से जन्म-मृत्यु रजिस्टर में 1964 से बदल कर 1965 कर दी गई है। मंडलायुक्त के निर्देश पर एसडीएम तमकुहीराज ने पूरे मामले की जांच की तो जन्म और मृत्यु रजिस्टर में कूटरचना की पुष्टि हुई। महिला की शिकायत पर दो सदस्यीय समिति ने जांच में पाया कि अभिलेखागार के कर्मचारियों की मिलीभगत से ऐसा किया गया है। जांच के दौरान पाया गया कि रजिस्टर का पन्ना फाड़कर गडबड़ी की गई है। इस मामले में अपर आयुक्त रामआसरे और एसडीएम विकास चंद्र की जांच आख्या में जिम्मेदार कर्मचारियों के खिलाफ कार्रवाई के लिए जिलाधिकारी को पत्र भेजा गया है।
-- -- -- -- -- -- -- -- --
दस रुपये के काम के लिए खर्च करने पड़ते हैं पांच सौ रुपये
देवरिया। अभिलेखागार का हाल यह है कि पांच से दस रुपये शुल्क पर मिलने वाले कागजातों के लिए अगर पांच सौ रुपये नहीं दिए, तो रिकाॅर्ड के लिए कई दिनों तक चक्कर काटने पड़ेंगे। जबकि नियमानुसार राजस्व अभिलेखागार से पुष्टिकृत मानचित्र, फाइनल नक्शा, पुरानी खतौनी सहित विभिन्न प्रकार के भूमि के रिकाॅर्ड पाने का आमजन को हक है, लेकिन सच तो यह है कि सीधे तौर लोगों को यह कागजात मिलना मुश्किल है। कचहरी में घुसते ही विभिन्न नामों से प्रचलित व्यक्तियों का सहारा लेना पड़ता है। इसके बाद सेटिंग का खेल शुरू हो जाता है। जैसा काम, वैसा दाम लगता है। महज दो रुपये की फोटो काॅपी के बदले सौ रुपये की मांग की जाती है। आंकड़ों के अनुसार प्रतिदिन करीब 50 लोग विभिन्न कागजातों के लिए अभिलेखागार पहुंचते हैं। इनमें रोज सिर्फ तीन से चार लोगों को ही नक्शा मिल पाता है। नयपुर गांव निवासी बालेंद्र कुमार ने बताया कि मानचित्र के लिए एक व्यक्ति को पांच सौ रुपये दिए, तब जाकर एक माह में नक्शा मिला। भलुअनी निवासी विनोद ने बताया कि जाति प्रमाण पत्र के लिए तीन सौ रुपये दिए। इसके बीस दिन बाद भी प्रमाणपत्र नहीं मिल सका है। सिलहटा निवासी प्रभावती पांडेय ने बताया कि आठ माह से मानचित्र के लिए परेशान हूं। पर अभिलेखागार से मानचित्र गायब है। इसके कारण खेत का सीमांकन नहीं हो पा रहा है।
विज्ञापन
कोट
अभिलेखागार को लेकर कई बार शिकायत कर चुका हूं। इसके बाद भी कार्रवाई नहीं होती है। सरकारी दर पर रिकार्ड नहीं दिया जाता है। इसके लिए अलग से चढ़ावा लिया जाता है।
- उमेश मिश्र, अध्यक्ष, जिला कलेक्ट्रेट बार एसोसिएशन
-- -- -- -- --
कोट
- अभिलेखागार में गड़बड़ी का मामला कई बार प्रकाश में आ चुका है। मुकदमे भी दर्ज हाे चुके हैं। इसके बाद भी गलत तरीके से कागजातों में कूटरचना का खेल अभी भी जारी है।
- बृज बांके तिवारी, पूर्व अध्यक्ष, जिला कलेक्ट्रेट बार एसोसिएशन
-- -- -- -- -- --
केस- एक
शहर के रामगुलाम टोला निवासी सुनील पाठक की तहरीर पर अभिलेखागार के कर्मचारी, लेखपाल सहित अन्य पर आठ साल पहले मुकदमा दर्ज हुआ था। उन्होंने बताया कि अभिलेखागार की मिलीभगत से जालसाजी की गई है। एक व्यक्ति की भूमि पर दूसरे का नाम दर्ज कर दिया गया था।
-- -- -- -- --
केस-दो
2021 में सदर कोतवाली पुलिस ने तत्कालीन लेखपाल, राजस्व अभिलेखागार के बाबू सहित अन्य पर धोखाधड़ी समेत विभिन्न धाराओं में मुकदमा दर्ज किया था। भाटपाररानी तहसील के सरया गांव निवासी निर्भय नारायण सिंह ने बताया था कि उनके खेत को फर्जी तरीके से दूसरे के नाम दर्ज कर दिया गया था।
-- -- -- -- -- -- --
केस- तीन
2015 में अभिलेखागार से गायब अभिलेखों के मामले में कुछ कर्मचारियों और अन्य पर सदर कोतवाली में मुकदमा दर्ज हुआ था। इसमें आरोप था कि कुछ लोगों की मिलीभगत से कागजातों में जमकर हेरफेर की गई है।
-- -- -- -- -- -- -- -
कोट:
- जांच आख्या के आधार पर आगे की कार्रवाई की जाएगी। अगर कोई सरकारी शुल्क के अलावा अधिक मांगता है तो उसकी शिकायत करें। जिन गांवों के मानचित्र नहीं हैं। उसके लिए राजस्व परिषद को पत्र भेजा गया है।
- रजनीश राय, मुख्य राजस्व अधिकारी
विज्ञापन
कुशीनगर जिले की गड़हिया निवासी शांति देवी पत्नी राजकिशोर ने मंडलायुक्त से शिकायत की थी। आरोप लगाया था कि इसी गांव के रहने वाले देवनारायण की जन्म तिथि कर्मचारियों की मिलीभगत से जन्म-मृत्यु रजिस्टर में 1964 से बदल कर 1965 कर दी गई है। मंडलायुक्त के निर्देश पर एसडीएम तमकुहीराज ने पूरे मामले की जांच की तो जन्म और मृत्यु रजिस्टर में कूटरचना की पुष्टि हुई। महिला की शिकायत पर दो सदस्यीय समिति ने जांच में पाया कि अभिलेखागार के कर्मचारियों की मिलीभगत से ऐसा किया गया है। जांच के दौरान पाया गया कि रजिस्टर का पन्ना फाड़कर गडबड़ी की गई है। इस मामले में अपर आयुक्त रामआसरे और एसडीएम विकास चंद्र की जांच आख्या में जिम्मेदार कर्मचारियों के खिलाफ कार्रवाई के लिए जिलाधिकारी को पत्र भेजा गया है।
विज्ञापन
दस रुपये के काम के लिए खर्च करने पड़ते हैं पांच सौ रुपये
देवरिया। अभिलेखागार का हाल यह है कि पांच से दस रुपये शुल्क पर मिलने वाले कागजातों के लिए अगर पांच सौ रुपये नहीं दिए, तो रिकाॅर्ड के लिए कई दिनों तक चक्कर काटने पड़ेंगे। जबकि नियमानुसार राजस्व अभिलेखागार से पुष्टिकृत मानचित्र, फाइनल नक्शा, पुरानी खतौनी सहित विभिन्न प्रकार के भूमि के रिकाॅर्ड पाने का आमजन को हक है, लेकिन सच तो यह है कि सीधे तौर लोगों को यह कागजात मिलना मुश्किल है। कचहरी में घुसते ही विभिन्न नामों से प्रचलित व्यक्तियों का सहारा लेना पड़ता है। इसके बाद सेटिंग का खेल शुरू हो जाता है। जैसा काम, वैसा दाम लगता है। महज दो रुपये की फोटो काॅपी के बदले सौ रुपये की मांग की जाती है। आंकड़ों के अनुसार प्रतिदिन करीब 50 लोग विभिन्न कागजातों के लिए अभिलेखागार पहुंचते हैं। इनमें रोज सिर्फ तीन से चार लोगों को ही नक्शा मिल पाता है। नयपुर गांव निवासी बालेंद्र कुमार ने बताया कि मानचित्र के लिए एक व्यक्ति को पांच सौ रुपये दिए, तब जाकर एक माह में नक्शा मिला। भलुअनी निवासी विनोद ने बताया कि जाति प्रमाण पत्र के लिए तीन सौ रुपये दिए। इसके बीस दिन बाद भी प्रमाणपत्र नहीं मिल सका है। सिलहटा निवासी प्रभावती पांडेय ने बताया कि आठ माह से मानचित्र के लिए परेशान हूं। पर अभिलेखागार से मानचित्र गायब है। इसके कारण खेत का सीमांकन नहीं हो पा रहा है।
विज्ञापन
कोट
अभिलेखागार को लेकर कई बार शिकायत कर चुका हूं। इसके बाद भी कार्रवाई नहीं होती है। सरकारी दर पर रिकार्ड नहीं दिया जाता है। इसके लिए अलग से चढ़ावा लिया जाता है।
- उमेश मिश्र, अध्यक्ष, जिला कलेक्ट्रेट बार एसोसिएशन
कोट
- अभिलेखागार में गड़बड़ी का मामला कई बार प्रकाश में आ चुका है। मुकदमे भी दर्ज हाे चुके हैं। इसके बाद भी गलत तरीके से कागजातों में कूटरचना का खेल अभी भी जारी है।
- बृज बांके तिवारी, पूर्व अध्यक्ष, जिला कलेक्ट्रेट बार एसोसिएशन
केस- एक
शहर के रामगुलाम टोला निवासी सुनील पाठक की तहरीर पर अभिलेखागार के कर्मचारी, लेखपाल सहित अन्य पर आठ साल पहले मुकदमा दर्ज हुआ था। उन्होंने बताया कि अभिलेखागार की मिलीभगत से जालसाजी की गई है। एक व्यक्ति की भूमि पर दूसरे का नाम दर्ज कर दिया गया था।
केस-दो
2021 में सदर कोतवाली पुलिस ने तत्कालीन लेखपाल, राजस्व अभिलेखागार के बाबू सहित अन्य पर धोखाधड़ी समेत विभिन्न धाराओं में मुकदमा दर्ज किया था। भाटपाररानी तहसील के सरया गांव निवासी निर्भय नारायण सिंह ने बताया था कि उनके खेत को फर्जी तरीके से दूसरे के नाम दर्ज कर दिया गया था।
केस- तीन
2015 में अभिलेखागार से गायब अभिलेखों के मामले में कुछ कर्मचारियों और अन्य पर सदर कोतवाली में मुकदमा दर्ज हुआ था। इसमें आरोप था कि कुछ लोगों की मिलीभगत से कागजातों में जमकर हेरफेर की गई है।
कोट:
- जांच आख्या के आधार पर आगे की कार्रवाई की जाएगी। अगर कोई सरकारी शुल्क के अलावा अधिक मांगता है तो उसकी शिकायत करें। जिन गांवों के मानचित्र नहीं हैं। उसके लिए राजस्व परिषद को पत्र भेजा गया है।
- रजनीश राय, मुख्य राजस्व अधिकारी