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Siddharthnagar News: तीन शुभ योग में मनेगी महाशिवरात्रि
Sun, 03 Mar 2024 01:38 AM IST
गोरखपुर ब्यूरो
संवाद न्यूज एजेंसी, सिद्धार्थनगर
संवाद न्यूज एजेंसी, सिद्धार्थनगर
Updated Sun, 03 Mar 2024 01:38 AM IST
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आठ मार्च को मनाया जाएगा महापर्व, बन रहा है शिव, सिद्ध और चतुग्रही योग
संवाद न्यूज एजेंसी
गोरखपुर। देवों के देव महादेव की आराधना का महापर्व महाशिवरात्रि आठ मार्च को मनाई जाएगी। इस बार महाशिवरात्रि पर 72 वर्ष बाद अद्भुत संयोग बन रहा है। शिवयोग, सिद्ध योग और चतुर्ग्रही योग में महाशिवरात्रि मनाई जाएगी। साथ ही इस दिन शुक्र प्रदोष व्रत भी पड़ रहा है जो मां लक्ष्मी को समर्पित है। इस संयोग में महादेव की पूजन-अर्चन से भक्तों की सभी मनोकामनाएं पूर्ण होंगी।
व्रत का महात्म्य
ज्योतिर्विद पंडित नरेंद्र उपाध्याय के अनुसार, फाल्गुन मास के कृष्ण पक्ष की चतुर्दशी को महाशिवरात्रि मनाई जाती है। शास्त्र के अनुसार जिस दिन अर्द्धरात्रि में चतुदर्शी हो, उसी दिन शिवरात्रि का व्रत करना चाहिए। जो व्यक्ति शिवरात्रि को निर्जला व्रत रहकर जागरण और रात्रि के चारों प्रहरों में चार बार पूजा करता है, वह शिव की कृपा को प्राप्त करता है। शिवरात्रि महात्म्य में लिखा है कि शिवरात्रि से बढ़कर कोई दूसरा व्रत नहीं है।
ऐसे करें पूजन
पंडित शरद चंद्र मिश्र के अनुसार, शिवरात्रि के दिन सुबह स्नानादि से निवृत्त होकर व्रत का संकल्प करें। व्रत रखकर किसी शिव मंदिर या अपने घर में नर्मदेश्वर की मूर्ति या पार्थिव शिवलिंग का निर्माण कर समस्त पूजन सामग्री एकत्र कर आसन पर विराजमान होकर मंत्र जप करते हुए स्थापित शिव मूर्ति की षोड्शोपचार पूजा करें। आक, कनेर, विल्वपत्र और धतूरा, कटेली आदि अर्पित करें। रुद्रीपाठ, शिवपुराण, शिवमहिम्नस्तोत्र, शिव संबंधित अन्य धार्मिक कथा सुनें।
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रुद्राभिषेक करा सकें, तो अत्यंत उत्तम है। रात्रि जागरण कर दूसरे दिन प्रात: काल शिवपूजा के पश्चात जौ, तिल और खीर से यज्ञशाला में 108 आहुतियां दें। ब्राह्मणों या शिवभक्तों को भोजन कराएं और दक्षिणा देकर विदा करें फिर स्वयं भोजन कर व्रत का पारण करें।
तीर्थजल से रुद्राभिषेक करने से मिलता है मोक्ष
ज्योतिर्विद मनीष मोहन के अनुसार, महाशिवरात्रि पर भगवान शिव की विविध नैवेद्यों से पूजा होती है। जिन्हें राशि का ज्ञान नहीं है, वह अपनी कामना के अनुसार रुद्राभिषेक करा सकते हैं। दूध से अभिषेक कराने पर पुत्र की, गन्ने से यश की, मधु से लक्ष्मी की, तीर्थ जल से मोक्ष की प्राप्ति की प्राप्ति होती है। जल से अभिषेक करने पर ज्वर आदि रोगों से शांति मिलती है।
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संवाद न्यूज एजेंसी
गोरखपुर। देवों के देव महादेव की आराधना का महापर्व महाशिवरात्रि आठ मार्च को मनाई जाएगी। इस बार महाशिवरात्रि पर 72 वर्ष बाद अद्भुत संयोग बन रहा है। शिवयोग, सिद्ध योग और चतुर्ग्रही योग में महाशिवरात्रि मनाई जाएगी। साथ ही इस दिन शुक्र प्रदोष व्रत भी पड़ रहा है जो मां लक्ष्मी को समर्पित है। इस संयोग में महादेव की पूजन-अर्चन से भक्तों की सभी मनोकामनाएं पूर्ण होंगी।
व्रत का महात्म्य
ज्योतिर्विद पंडित नरेंद्र उपाध्याय के अनुसार, फाल्गुन मास के कृष्ण पक्ष की चतुर्दशी को महाशिवरात्रि मनाई जाती है। शास्त्र के अनुसार जिस दिन अर्द्धरात्रि में चतुदर्शी हो, उसी दिन शिवरात्रि का व्रत करना चाहिए। जो व्यक्ति शिवरात्रि को निर्जला व्रत रहकर जागरण और रात्रि के चारों प्रहरों में चार बार पूजा करता है, वह शिव की कृपा को प्राप्त करता है। शिवरात्रि महात्म्य में लिखा है कि शिवरात्रि से बढ़कर कोई दूसरा व्रत नहीं है।
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ऐसे करें पूजन
पंडित शरद चंद्र मिश्र के अनुसार, शिवरात्रि के दिन सुबह स्नानादि से निवृत्त होकर व्रत का संकल्प करें। व्रत रखकर किसी शिव मंदिर या अपने घर में नर्मदेश्वर की मूर्ति या पार्थिव शिवलिंग का निर्माण कर समस्त पूजन सामग्री एकत्र कर आसन पर विराजमान होकर मंत्र जप करते हुए स्थापित शिव मूर्ति की षोड्शोपचार पूजा करें। आक, कनेर, विल्वपत्र और धतूरा, कटेली आदि अर्पित करें। रुद्रीपाठ, शिवपुराण, शिवमहिम्नस्तोत्र, शिव संबंधित अन्य धार्मिक कथा सुनें।
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रुद्राभिषेक करा सकें, तो अत्यंत उत्तम है। रात्रि जागरण कर दूसरे दिन प्रात: काल शिवपूजा के पश्चात जौ, तिल और खीर से यज्ञशाला में 108 आहुतियां दें। ब्राह्मणों या शिवभक्तों को भोजन कराएं और दक्षिणा देकर विदा करें फिर स्वयं भोजन कर व्रत का पारण करें।
तीर्थजल से रुद्राभिषेक करने से मिलता है मोक्ष
ज्योतिर्विद मनीष मोहन के अनुसार, महाशिवरात्रि पर भगवान शिव की विविध नैवेद्यों से पूजा होती है। जिन्हें राशि का ज्ञान नहीं है, वह अपनी कामना के अनुसार रुद्राभिषेक करा सकते हैं। दूध से अभिषेक कराने पर पुत्र की, गन्ने से यश की, मधु से लक्ष्मी की, तीर्थ जल से मोक्ष की प्राप्ति की प्राप्ति होती है। जल से अभिषेक करने पर ज्वर आदि रोगों से शांति मिलती है।