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Siddharthnagar News: माफिया ने लिए खोद डाला संरक्षित टीला, प्रशासन को भनक भी नहीं लगी
Thu, 18 May 2023 03:03 PM IST
गोरखपुर ब्यूरो
संवाद न्यूज एजेंसी, सिद्धार्थनगर
संवाद न्यूज एजेंसी, सिद्धार्थनगर
Updated Thu, 18 May 2023 03:03 PM IST
सार
एसडीएम नौगढ़ डॉ. ललित मिश्रा ने कहा कि कपिलवस्तु क्षेत्र में पुराने टीले में खुदाई हो रही है तो इसे रोका जाएगा। इस मामले में सख्त कार्रवाई की जाएगी। प्राचीन टीले को खोदकर कोई मिट्टी नहीं बेच सकेगा। मौके पर राजस्व विभाग की टीम जाएगी और कार्रवाई करेगी।
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सिद्धार्थनगर के कपिलवस्तु के चैनपुर नोनहवा मार्ग पर पिपरासन में मिट्टी माफिया द्वारा खोदा गया स
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विस्तार
भगवान बुद्ध की क्रीड़ास्थली कपिलवस्तु के आसपास के क्षेत्रों में अवैध खनन करके प्राचीन टीलों का अस्तित्व समाप्त किया जा रहा है। मिट्टी का धंधा करने वाले माफिया ने पिपरासन के संरक्षित टीले को खोदकर मिट्टी बेच दी और प्रशासन को भनक तक नहीं लगी। संरक्षित स्थान पर खुदाई में मिट्टी के बीच से निकल रही ईंटें दो से तीन हजार वर्ष पुरानी बताई जा रहीं हैं।
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डेढ़ साल पहले कपिलवस्तु से तीन किमी दूर लाला पंचगवां में टीले की खुदाई के शिकायत पर प्रशासन जागा था तो प्राचीन टीले को खोदने पर अंकुश लगा था। सिद्धार्थ विश्वविद्यालय कपिलवस्तु के प्राचीन इतिहास, संस्कृति व पुरातत्व विभाग की एसोसिएट प्रोफेसर डॉ. नीता यादव ने पीएमओ को ई-मेल भेेजा था। पीएमओ ने इसका संज्ञान लिया और केंद्रीय पुरातत्व सर्वेक्षण विभाग लखनऊ से रिपोर्ट मांगी थी, उसके बाद जिले के सभी गांवों में पुरातात्विक सर्वेक्षण करने का आदेश हुआ।
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यह सर्वेक्षण पूरा नहीं हुआ, जबकि इसी बीच दूसरे टीले में खुदाई हो रही है। यदि इसकी खुदाई होती रही तो पिपरासन टीले का अस्तित्व ही समाप्त हो जाएगा। डॉ. नीता यादव बताती हैं कि उत्खनन हो तो इस क्षेत्र में नेपाल के लुंबिनी से अधिक पुरातात्विक साक्ष्य प्राप्त होने की संभावना है। हालांकि, सर्वेक्षण कार्य पूर्ण होने के बाद ही उत्खनन की संभावना बढ़ेगी। केंद्रीय पुरातत्व एवं सर्वेक्षण विभाग के अधीक्षण पुरातात्विक आफताब ने बताया कि सिद्धार्थनगर के 1136 गांवों में पुरातात्विक सर्वेक्षण होना है। सर्वेक्षण पूरा होने के बाद ही रिपोर्ट सार्वजनिक की जाएगी।
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ईंटें बता रही हैं कुएं की प्राचीनता
संरक्षित पुरातात्विक धरोहर गनवरिया स्तूप के पास एक कुआं है। जिसमें धान की भूसी और मिट्टी से निर्मित ईंटों का प्रयोग हुआ है। डॉ. नीता यादव के अनुसार 625 ईसा पूर्व बौद्ध काल था। यह कुआं उसी दौर में बना होगा। गनवरिया स्तूप के अंदर के कुएं से बाहर वाले कुएं की आकृति मिलती है। उसी दौर में भूसी वाले ईंटों का प्रयोग होता है। इस प्रकार छोटे छोटे साक्ष्य तलाशे जाएं तो अधिक साक्ष्य प्राप्त हो सकते हैं। साक्ष्य प्राप्त और प्रमाणित होंगे तो शोध की दृष्टि से कपिलवस्तु क्षेत्र का महत्व बढ़ जाएगा।
बेखौफ हो रही खुदाई
पुरातात्विक परिक्षेत्र राजा शुद्धोधन के अस्तबल से करीब चार किमी दूर पिपरसन में प्राचीन स्तूप में खुदाई हो रही है। डेढ़ साल पहले खुदाई के मामले में प्रशासन सख्त हुआ तो खुदाई रोक दी गई थी। समय बीता तो अधिकारियों का ध्यान हट गया और फिर खुदाई शुरू हो गई।
एसडीएम नौगढ़ डॉ. ललित मिश्रा ने कहा कि कपिलवस्तु क्षेत्र में पुराने टीले में खुदाई हो रही है तो इसे रोका जाएगा। इस मामले में सख्त कार्रवाई की जाएगी। प्राचीन टीले को खोदकर कोई मिट्टी नहीं बेच सकेगा। मौके पर राजस्व विभाग की टीम जाएगी और कार्रवाई करेगी।
बेखौफ हो रही खुदाई
पुरातात्विक परिक्षेत्र राजा शुद्धोधन के अस्तबल से करीब चार किमी दूर पिपरसन में प्राचीन स्तूप में खुदाई हो रही है। डेढ़ साल पहले खुदाई के मामले में प्रशासन सख्त हुआ तो खुदाई रोक दी गई थी। समय बीता तो अधिकारियों का ध्यान हट गया और फिर खुदाई शुरू हो गई।
एसडीएम नौगढ़ डॉ. ललित मिश्रा ने कहा कि कपिलवस्तु क्षेत्र में पुराने टीले में खुदाई हो रही है तो इसे रोका जाएगा। इस मामले में सख्त कार्रवाई की जाएगी। प्राचीन टीले को खोदकर कोई मिट्टी नहीं बेच सकेगा। मौके पर राजस्व विभाग की टीम जाएगी और कार्रवाई करेगी।