फ्री ई-पेपर
पर्सनलाइज़्ड फ़ीड
पर्सनलाइज़्ड नोटिफ़िकेशन
चलते-फिरते ख़बरें
लॉयल्टी रिवॉर्ड्स
डाउनलोड करें

सब्सक्राइब करें
Hindi News ›   Uttar Pradesh ›   Siddharthnagar News ›   Madhav Prasad Tripathi Medical College

माधव प्रसाद त्रिपाठी मेडिकल कॉलेज : एक बेड पर दो-दो बच्चे भर्ती

Sun, 11 Jun 2023 11:16 PM IST
गोरखपुर ब्यूरो संवाद न्यूज एजेंसी, सिद्धार्थनगर
संवाद न्यूज एजेंसी, सिद्धार्थनगर Updated Sun, 11 Jun 2023 11:16 PM IST
विज्ञापन
Madhav Prasad Tripathi Medical College
मेडिकल कॉलेज के एसएनसीयू वार्ड में एक ही बेड पर भर्ती दो बच्चे।
सिद्धार्थनगर। माधव प्रसाद त्रिपाठी मेडिकल कॉलेज में गर्मी के मौसम में बच्चों वार्ड फुल हो गए है। एक ही बेड पर दो-दो बच्चे भर्ती किए जा रहे हैं, लेकिन डॉक्टरों की संख्या कम होने से इलाज प्रभावित हो रहा है। आठ डॉक्टर होने चाहिए, जबकि तीन डॉक्टरों के भरोसे ही इलाज हो रहा है। कई बार ऐसी स्थिति आ रही है कि जब गंभीर नवजात को लेकर उनकी मां पहुंचती है तो सीनियर डॉक्टर को बुलाया जाता है, जबकि एसएनसीयू व पीआईसीयू में सीनियर डॉक्टर की ड्यूटी 24 घंटे होनी चाहिए।
विज्ञापन

डॉक्टरों के अनुसार अधिक गर्मी में बच्चे उल्टी दस्त से बीमार हो रहे हैं। रविवार को एसएनसीयू के 20 बेड पर 27 बच्चों को भर्ती किया गया था, जबकि 15 बेड का पीआईसीयू में भी लगभग सभी बेड पर बच्चे भर्ती किए गए थे। मेडिकल कॉलेज में डॉक्टरों के दो पद एवं एनएचएम में पांच पद रिक्त हैं। सीनियर डॉ. एसएल पटेल ओपीडी,वार्ड, इमरजेंसी एवं पोस्टमार्टम ड्यूटी की ड्यूूटी भी करते हैं। यहीं कारण है कि एसएनसीयू में गंभीर रूप से बीमार नवजात आते हैं तो उन्हें बुलाया जाता है। एनएचएम के अंतर्गत नियुक्ति डॉ. फजल खान को एमसीएच विंग के पीडियाट्रिक वार्ड में भेजा गया है। इसी प्रकार सीनियर रेजीडेंट डॉ. शालिनी पांडेय भी पीआईसीयू में ड्यूटी कर रही है। इनके अलावा दो जूनियर रेजीडेंट की ड्यूटी लगाई गई है ताकि इलाज होता रहे।
विज्ञापन

इस मामले में प्रभारी प्राचार्य डॉ. एके झा ने बताया कि डॉक्टरों के नियुक्ति की कोशिश की जा रही है। डॉ. फजल खान की नियुक्ति महिला अस्पताल में हैं, इस कारण उन्हें एमसीएच विंग में भेजा गया है। डॉक्टरों की ड्यूटी इस तरह लगाई जा रही है कि बच्चों का इलाज होता रहे।
विज्ञापन
विज्ञापन


मेडिकल कॉलेज के एसएनसीयू में मेरा बच्चा भर्ती है। सीनियर डॉक्टर कभी कभी आते हैं। सात दिन से इलाज हो रहा है, लेकिन चिंता बनी हुई है। सरकारी अस्पताल है, यहां डॉक्टर हर समय होने चाहिए।

सुनीता, इटवा
-------

तीन दिन से मेरा बच्चा एसएनसीयू में भर्ती है। गंभीर था, इसलिए डॉक्टर ने भर्ती कर लिया। सुन रहा हूं कि जूनियर डॉक्टर ही देख रहे हैं। सभी लोग आपस में डॉक्टरों की कमी की चर्चा कर रहे हैं। अब तो हमारे में वश में कुछ नहीं है।
वकील, चिल्हिया
-----------
विज्ञापन
विज्ञापन

रहें हर खबर से अपडेट, डाउनलोड करें Android Hindi News App, iOS Hindi News App और Amarujala Hindi News APP अपने मोबाइल पे|
Get all India News in Hindi related to live update of politics, sports, entertainment, technology and education etc. Stay updated with us for all breaking news from India News and more news in Hindi.

विज्ञापन
विज्ञापन
विज्ञापन

एड फ्री अनुभव के लिए अमर उजाला प्रीमियम सब्सक्राइब करें

Next Article

AU ऐप में पढ़ें

Followed