फ्री ई-पेपर
पर्सनलाइज़्ड फ़ीड
पर्सनलाइज़्ड नोटिफ़िकेशन
चलते-फिरते ख़बरें
लॉयल्टी रिवॉर्ड्स
डाउनलोड करें

सब्सक्राइब करें
Hindi News ›   Uttar Pradesh ›   Siddharthnagar News ›   Madhav Prasad Tripathi Medical College

Siddharthnagar News: आठ करोड़ के अभाव में अटका 300 बेड का अस्पताल

Fri, 23 Feb 2024 10:56 PM IST
गोरखपुर ब्यूरो संवाद न्यूज एजेंसी, सिद्धार्थनगर
संवाद न्यूज एजेंसी, सिद्धार्थनगर Updated Fri, 23 Feb 2024 10:56 PM IST
विज्ञापन
Madhav Prasad Tripathi Medical College
मेडिकल कॉलेज का भवन।
सिद्धार्थनगर। सरकार के बेहतर स्वास्थ्य सेवाएं मुहैया कराने का दावा संसाधन के अभाव में खोखला साबित हो रहा है। 226 करोड़ की लागत से माधव प्रसाद त्रिपाठी मेडिकल कॉलेज का प्रशासनिक और 300 बेड का अस्पताल भवन खड़ा हो गया। लेकिन आठ करोड़ रुपये के अभाव में संचालन अटक हुआ है। आठ करोड़ मिले तो आईसीयू, बर्न वार्ड, ट्रामा सेंटर, बेड की व्यवस्था हो सके। जबकि, भवन को हैंडओवर हुए एक वर्ष का वक्त गुजर चुका है। धन के लिए 11 बार पत्राचार भी हो चुका है।
विज्ञापन

अस्पताल का संचालन न होने से प्रतिदिन हादसा, बर्न और हार्टअटैक के 10-12 मरीजों को इलाज संभव होते हुए भी रेफर कर दिया जाता है। इसमें कई बार मरीजों के जान पर बन आती है। अगर संसाधन हो और अस्पताल संचालित होता तो शायद मरीजों को रेफर नहीं होना पड़ता। जिम्मेदार जल्द ही संचालन की बात कर रहे हैं।
विज्ञापन


जिले की लगभग 28 लाख आबादी को बेहतर स्वास्थ्य सेवाएं मुहैया कराने के लिए 226 करोड़ की लागत से माधव प्रसाद त्रिपाठी मेडिकल कॉलेज की स्थापना की गई। इसमें प्रशासनिक भवन के साथ 300 बेड का अस्पताल शामिल है। मेडिकल कॉलेज संचालन जैसे ओपीडी और ओटी की व्यवस्था जिला अस्पताल के पुराने भवन में चल रही है। 300 बेड के अस्पताल का भवन एक साल पहले तैयार हो गया है। वायरिंग, पानी और हर बेड पर ऑक्सीजन पहुंचे, इसके लिए पाइप लाइन ऑक्सीजन की व्यवस्था से लैस करके छोड़ दिया गया। अस्पताल संचालन के लिए बेड, ओटी के लिए मशीन और संसाधन जैसी मूलभूत सुविधाओं के लिए शासन की ओर से दूसरा बजट देना है।
विज्ञापन
विज्ञापन

300 बेड के अस्पताल के संचालन में उपयोग होने वाले संसाधन की खरीद के लिए लगभग आठ करोड़ की अनुमानित लगात की जरूरत है। आठ करोड़ नहीं मिलने के कारण अस्पताल का संचालन अटका हुआ। इसकी वजह से गंभीर रोगियों को गोरखपुर, लखनऊ और निजी अस्पतालों में जाना पड़ रहा है। जहां समय और धन की बर्बादी के साथ ही जान पर भी बन आ रही है। जिम्मेदार पत्राचार करने और धन मिलते ही संचालन करने का दम भर रहे हैं।

---

पिछले माह ही किया पत्राचार

300 बेड के संचालन के लिए अबतक 11 बार शासन और अन्य जगहों पर पत्राचार हो चुका है। इसमें जिलाधिकारी की ओर से सांसद की ओर से और 11 दिन पहले प्राचार्य ने फिर संसाधन की खरीद और संचालन के लिए आठ करोड़ की डिमांड के लिए पत्राचार किया है। मेडिकल कॉलेज प्रशासन की ओर से हर माह में पत्राचार किया जा रहा है। लेकिन धन मुहैया कराने के संबंध में जवाब नहीं मिला है।

---

अस्पताल शुरू हो तो इन्हें मिले लाभ

300 बेड का अस्पताल शुरू हो जाए तो इसमें बर्न केयर यूनिट शुरू हो जाए। जिससे जलने वाले मरीजों को लाभ मिले। आईसीयू की सुविधा होनी है अगर हो जाती तो हार्ट अटैक, हादसे के शिकार और अन्य गंभीर रोगियों को सहूलियत मिलती है। इसके साथ ही आधुनिक ओटी बनने से ऑपरेशन आसानी से हो जाती। इसके साथ ही सिटी स्कैल, एमआरआई सहित अन्य जांच की मशीनें शुरू हो जाती है।

---

ट्रामा सेंटर होगा बेहतर

सीएसआर प्रोजेक्ट से पानी के टंकी के पास 3.66 करोड़ की लागत से बने चार बेड के ट्रामा सेंटर पर जांच में आई केंद्रीय स्वास्थ्य टीम ने सवाल उठाया था। टीम ने कहा कि चार बेड का कैसा ट्रामा सेंटर और यहां तक आने का मार्ग भी नहीं है। 30- 50 बेड का ट्रामा सेंटर बनना है। जो नए अस्पताल के शुरू होने के बाद ही संचालित हो सकेगा।

---

इन मरीजों को होना पड़ता है रेफर

ट्रामा सेंटर और आईसीयू नए अस्पताल में संचालित होना है। ट्रामा सेंटर न होने के कारण हर दिन हादसे के शिकार पांच से सात मरीज इसलिए रेफर कर दिए जाते हैं कि सर्जरी करने और उन्हें रखने के लिए आईसीयू की सुविधा नहीं है। इसी प्रकार हार्टअटैक दो से तीन रोगियों रेफर किया जाता है। क्योंकि उन्हें भी आईसीयू की जरूरत पड़ती है। इसके लिए अन्य गंभीर बीमारी के शिकार मरीज, जिन्हें आईसीयू और वेंटीलेटर की जरूरत है, उन्हें रेफर कर दिया जाता है। 24 घंटे में कम से कम 10-12 मरीज रेफर किए जाते हैं। वह भी संसाधन न होने का कारण। क्योंकि इलाज संभव होते हुए भी सुविधा न होने के कारण डॉक्टर उन्हें हायर सेंटर भेज रहे हैं।


---

300 बेड के अस्पताल की बिल्डिंग एक साल पहले ही हैंडओवर हो चुका है। बेड सहित अस्पताल में संचालन में काम आने वाले सुविधाओं के न होने के कारण संचालन शुरू नहीं हो पा रहा है। लगभग आठ करोड़ की जरूरत है। इसके लिए कई बार पत्राचार किया जा चुका है। 10 दिन पहले भी बजट के लिए पत्राचार किया गया है। उम्मीद है कि जल्द ही बजट मिल जाएगा।

-डॉ. एके झा, प्राचार्य, माधव प्रसाद त्रिपाठी मेडिकल कॉलेज
विज्ञापन
विज्ञापन

रहें हर खबर से अपडेट, डाउनलोड करें Android Hindi News App, iOS Hindi News App और Amarujala Hindi News APP अपने मोबाइल पे|
Get all India News in Hindi related to live update of politics, sports, entertainment, technology and education etc. Stay updated with us for all breaking news from India News and more news in Hindi.

विज्ञापन
विज्ञापन
विज्ञापन

एड फ्री अनुभव के लिए अमर उजाला प्रीमियम सब्सक्राइब करें

Next Article

AU ऐप में पढ़ें

Followed