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Siddharthnagar News: सायरन, बंकर के बीच जिंदगी... इस्राइल में फंसे लोटन के शिवाक
Tue, 03 Mar 2026 03:00 AM IST
गोरखपुर ब्यूरो
संवाद न्यूज एजेंसी, सिद्धार्थनगर
संवाद न्यूज एजेंसी, सिद्धार्थनगर
Updated Tue, 03 Mar 2026 03:00 AM IST
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संवाद न्यूज एजेंसी
लोटन, सिद्धार्थनगर। सायरन बजते ही हम सबको बंकर में भागना पड़ता है। अगर देर हो जाए तो जान भी जा सकती है, हम हर पल डर के साए में जी रहे हैं। इजराइल में कंस्ट्रक्शन सुपरवाइजर के रूप में काम कर रहे जिले के खीरीडीहा गांव के शिवा सिंह की यह आपबीती सिर्फ उनकी नहीं बल्कि उन हजारों भारतीयों की सच्चाई है, जो इस समय युद्ध के बीच जिंदगी बचाने की जंग लड़ रहे हैं।
करीब 18 महीने पहले बेहतर भविष्य की उम्मीद लेकर शिवा सिंह इस्राइल गए थे। घर की जिम्मेदारी उनके कंधों पर थी। पिता का निधन अगस्त 2024 में हो चुका था, मां और छोटे भाई का सहारा बनने के लिए उन्होंने गांव की पंचायत सहायक की नौकरी छोड़ दी और विदेश की राह पकड़ी। सब कुछ ठीक चल रहा था, लेकिन अचानक शुरू हुए युद्ध ने उनकी जिंदगी को खौफ में बदल दिया।
शिवा ने सोशल मीडिया पर जो वीडियो साझा किया, उसमें सायरन की तेज आवाज और बंकर में भागते लोगों की तस्वीरें साफ दिखाई दे रही हैं। उन्होंने बताया, यहां हर बिल्डिंग के नीचे बंकर बना है। सायरन बजते ही काम छोड़कर तुरंत नीचे जाना पड़ता है। कुछ समझ नहीं आता कि अगला पल कैसा होगा। हम लोग सुरक्षित तो हैं, लेकिन डर हमेशा साथ रहता है।
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उन्होंने बताया कि जब पहली बार सायरन बजा तो दिल की धड़कन तेज हो गई। ऐसा लगा जैसे सब कुछ खत्म हो जाएगा। आसपास लोग भाग रहे थे, कोई फोन पर अपने घरवालों से बात कर रहा था। उस वक्त सिर्फ एक ही ख्याल था कि किसी तरह जान बच जाए। शिवा लगातार अपने परिवार से वीडियो कॉल पर संपर्क बनाए हुए हैं। उन्होंने मां और भाई को भरोसा दिलाया है कि फिलहाल खाने-पीने या रहने की कोई दिक्कत नहीं है और वहां की सरकार सुरक्षा का पूरा इंतजाम कर रही है, लेकिन हालात सामान्य नहीं हैं। काम के बीच भी डर बना रहता है। हर आवाज पर लगता है फिर सायरन न बज जाए, उन्होंने बताया।
विदेश जाकर परिवार के लिए सपने पूरे करने निकला शिवा आज खुद एक ऐसे हालात में है, जहां हर दिन सुरक्षित रहने की उम्मीद ही सबसे बड़ी जीत बन गई है।
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लोटन, सिद्धार्थनगर। सायरन बजते ही हम सबको बंकर में भागना पड़ता है। अगर देर हो जाए तो जान भी जा सकती है, हम हर पल डर के साए में जी रहे हैं। इजराइल में कंस्ट्रक्शन सुपरवाइजर के रूप में काम कर रहे जिले के खीरीडीहा गांव के शिवा सिंह की यह आपबीती सिर्फ उनकी नहीं बल्कि उन हजारों भारतीयों की सच्चाई है, जो इस समय युद्ध के बीच जिंदगी बचाने की जंग लड़ रहे हैं।
करीब 18 महीने पहले बेहतर भविष्य की उम्मीद लेकर शिवा सिंह इस्राइल गए थे। घर की जिम्मेदारी उनके कंधों पर थी। पिता का निधन अगस्त 2024 में हो चुका था, मां और छोटे भाई का सहारा बनने के लिए उन्होंने गांव की पंचायत सहायक की नौकरी छोड़ दी और विदेश की राह पकड़ी। सब कुछ ठीक चल रहा था, लेकिन अचानक शुरू हुए युद्ध ने उनकी जिंदगी को खौफ में बदल दिया।
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शिवा ने सोशल मीडिया पर जो वीडियो साझा किया, उसमें सायरन की तेज आवाज और बंकर में भागते लोगों की तस्वीरें साफ दिखाई दे रही हैं। उन्होंने बताया, यहां हर बिल्डिंग के नीचे बंकर बना है। सायरन बजते ही काम छोड़कर तुरंत नीचे जाना पड़ता है। कुछ समझ नहीं आता कि अगला पल कैसा होगा। हम लोग सुरक्षित तो हैं, लेकिन डर हमेशा साथ रहता है।
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उन्होंने बताया कि जब पहली बार सायरन बजा तो दिल की धड़कन तेज हो गई। ऐसा लगा जैसे सब कुछ खत्म हो जाएगा। आसपास लोग भाग रहे थे, कोई फोन पर अपने घरवालों से बात कर रहा था। उस वक्त सिर्फ एक ही ख्याल था कि किसी तरह जान बच जाए। शिवा लगातार अपने परिवार से वीडियो कॉल पर संपर्क बनाए हुए हैं। उन्होंने मां और भाई को भरोसा दिलाया है कि फिलहाल खाने-पीने या रहने की कोई दिक्कत नहीं है और वहां की सरकार सुरक्षा का पूरा इंतजाम कर रही है, लेकिन हालात सामान्य नहीं हैं। काम के बीच भी डर बना रहता है। हर आवाज पर लगता है फिर सायरन न बज जाए, उन्होंने बताया।
विदेश जाकर परिवार के लिए सपने पूरे करने निकला शिवा आज खुद एक ऐसे हालात में है, जहां हर दिन सुरक्षित रहने की उम्मीद ही सबसे बड़ी जीत बन गई है।