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Siddharthnagar News: बलिदान दिवस पर याद किए गए जननायक बिरसा मुंडा
Fri, 09 Jun 2023 11:31 PM IST
गोरखपुर ब्यूरो
संवाद न्यूज एजेंसी, सिद्धार्थनगर
संवाद न्यूज एजेंसी, सिद्धार्थनगर
Updated Fri, 09 Jun 2023 11:31 PM IST
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डुमरियागंज में बिरसा मुंडा का बलिदान दिवस मनाते धूरियाआदिवासी समाज के लोग। संवाद
सिद्धार्थनगर। गोंड/धुरिया समाज के लोगों ने शुक्रवार को डुमरियागंज नगर पंचायत क्षेत्र में आदिवासी जननायक बिरसा मुंडा का 123वां शहादत दिवस (बलिदान दिवस) मनाया। इस मौके पर मौजूद लोगों ने उनके पद चिह्नों पर चलने का संकल्प लिया।
प्रदेश उपाध्यक्ष जनजाति मोर्चा बीजेपी राजेंद्र धुरिया ने कहा कि भारतीय इतिहास में बिरसा मुंडा एक ऐसे नायक थे जिन्होंने भारत के झारखंड में अपने क्रांतिकारी चिंतन से उन्नीसवीं शताब्दी के उत्तरार्द्ध में आदिवासी समाज की दशा और दिशा बदलकर नवीन सामाजिक और राजनीतिक युग का सूत्रपात किया। काले कानूनों को चुनौती देकर बर्बर ब्रिटिश साम्राज्य को सांसत में डाल दिया, जबकि शिक्षक गणेश गोंड और शिव कुमार धुरिया ने अपने विचार में कहा कि बिरसा मुंडा सही मायने में पराक्रम और सामाजिक जागरण के धरातल पर तत्कालीन युग के एकलव्य और स्वामी विवेकानंद थे। ब्रिटिश हुकूमत ने इसे खतरे का संकेत समझकर बिरसा मुंडा को गिरफ्तार करके जेल में डाल दिया। वहां अंग्रेजों ने उन्हें धीमा जहर दिया था। जिस कारण वे 9 जून 1900 को शहीद हो गए। बिरसा मुंडा की गणना महान देशभक्तों में की जाती है। कार्यक्रम के अंत में जल,जंगल और जमीन के संरक्षण हेतु उनके बताएं हुए मार्ग पर चलने का उपस्थित लोगों ने संकल्प लिया। इंदिरा नगर वार्ड सभासद उमाशंकर गोंड, शिव कुमार धुरिया, प्रकाश धुरिया, जवाहर लाल, प्रदीप गोंड, डा.रमेश,राम जतन,चिरकुट राम धुरिया, जगदीश गोंड,अनिल गोंड, राजकुमार धुरिया,कृष्णाराम गोंड,नीरज गोंड लोग मौजूद रहे।
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प्रदेश उपाध्यक्ष जनजाति मोर्चा बीजेपी राजेंद्र धुरिया ने कहा कि भारतीय इतिहास में बिरसा मुंडा एक ऐसे नायक थे जिन्होंने भारत के झारखंड में अपने क्रांतिकारी चिंतन से उन्नीसवीं शताब्दी के उत्तरार्द्ध में आदिवासी समाज की दशा और दिशा बदलकर नवीन सामाजिक और राजनीतिक युग का सूत्रपात किया। काले कानूनों को चुनौती देकर बर्बर ब्रिटिश साम्राज्य को सांसत में डाल दिया, जबकि शिक्षक गणेश गोंड और शिव कुमार धुरिया ने अपने विचार में कहा कि बिरसा मुंडा सही मायने में पराक्रम और सामाजिक जागरण के धरातल पर तत्कालीन युग के एकलव्य और स्वामी विवेकानंद थे। ब्रिटिश हुकूमत ने इसे खतरे का संकेत समझकर बिरसा मुंडा को गिरफ्तार करके जेल में डाल दिया। वहां अंग्रेजों ने उन्हें धीमा जहर दिया था। जिस कारण वे 9 जून 1900 को शहीद हो गए। बिरसा मुंडा की गणना महान देशभक्तों में की जाती है। कार्यक्रम के अंत में जल,जंगल और जमीन के संरक्षण हेतु उनके बताएं हुए मार्ग पर चलने का उपस्थित लोगों ने संकल्प लिया। इंदिरा नगर वार्ड सभासद उमाशंकर गोंड, शिव कुमार धुरिया, प्रकाश धुरिया, जवाहर लाल, प्रदीप गोंड, डा.रमेश,राम जतन,चिरकुट राम धुरिया, जगदीश गोंड,अनिल गोंड, राजकुमार धुरिया,कृष्णाराम गोंड,नीरज गोंड लोग मौजूद रहे।
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