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Siddharthnagar News: सच्चाई के रास्ते पर चलने की सीख देता है कर्बला
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हल्लौर में मजलिस को संबोधित करते हुए मौलाना कल्बे रूशेद। संवाद
संवाद न्यूज एजेंसी
डुमरियागंज। तहसील के कस्बा हल्लौर स्थित इमाम बारगाह वक्फ शाह आलमगीर सानी में अंजुमन गुलदस्ता मातम की ओर से आयोजित अशरे की पांचवीं मजलिस को शुक्रवार की रात हुई। इसमें दिल्ली से आए मौलाना सैय्यद कल्बे रूशैद रिजवी ने वाकयाते कर्बला और मकसदे इमाम हुसैन के पैगाम का बयान किया। मजलिस में बड़ी संख्या में अकीदतमंद शामिल हुए।
मौलाना कल्बे रूशैद ने कहा कि वाक्याते कर्बला ( कर्बला की घटना) दुनिया को हक, सच्चाई और इंसाफ, भलाई के रास्ते पर चलने की सीख देता है। हजरत इमाम हुसैन को सभी धर्म मजहब के लोग मानते हैं। उन पर अपना अकीदा (आस्था ) रखते हैं। मौलाना ने कहा कि इमाम हुसैन ने कर्बला के मैदान में अपनी कुर्बानी देकर इस्लाम और मानवता की रक्षा की।
उन्होंने कहा कि दुनिया में सबसे अच्छा देश भारत है। जहां सभी को अपने धर्म को मानने और आयोजन की अनुमति मिलती है। पूरे देश में इमाम हुसैन और कर्बला के शहीदों की अजादारी करने की पूरी आजादी है। मौलाना ने मजलिस के आखिर में हजरत इमाम हुसैन के बेटे इमाम सज्जाद और मासूम बेटी सकीना का मसायब बयान किया, जिसे सुनकर सभी अकीदतमंद रो पडे़।
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डुमरियागंज। तहसील के कस्बा हल्लौर स्थित इमाम बारगाह वक्फ शाह आलमगीर सानी में अंजुमन गुलदस्ता मातम की ओर से आयोजित अशरे की पांचवीं मजलिस को शुक्रवार की रात हुई। इसमें दिल्ली से आए मौलाना सैय्यद कल्बे रूशैद रिजवी ने वाकयाते कर्बला और मकसदे इमाम हुसैन के पैगाम का बयान किया। मजलिस में बड़ी संख्या में अकीदतमंद शामिल हुए।
मौलाना कल्बे रूशैद ने कहा कि वाक्याते कर्बला ( कर्बला की घटना) दुनिया को हक, सच्चाई और इंसाफ, भलाई के रास्ते पर चलने की सीख देता है। हजरत इमाम हुसैन को सभी धर्म मजहब के लोग मानते हैं। उन पर अपना अकीदा (आस्था ) रखते हैं। मौलाना ने कहा कि इमाम हुसैन ने कर्बला के मैदान में अपनी कुर्बानी देकर इस्लाम और मानवता की रक्षा की।
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उन्होंने कहा कि दुनिया में सबसे अच्छा देश भारत है। जहां सभी को अपने धर्म को मानने और आयोजन की अनुमति मिलती है। पूरे देश में इमाम हुसैन और कर्बला के शहीदों की अजादारी करने की पूरी आजादी है। मौलाना ने मजलिस के आखिर में हजरत इमाम हुसैन के बेटे इमाम सज्जाद और मासूम बेटी सकीना का मसायब बयान किया, जिसे सुनकर सभी अकीदतमंद रो पडे़।
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