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लौटी ठंड से कंपकंपाए लोग
ब्यूरो/अमर उजाला सिद्धार्थनगर
Updated Sun, 29 Jan 2017 10:07 PM IST
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सर्द हवाओं ने की हालत खराब
- फोटो : अमर उजाला
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सिद्धार्थनगर। जनवरी के अंत में लौटती ठंड ने लोगों को ठिठुरने पर मजबूर कर दिया है। रविवार को पूरा जिला शीतलहर और गलन के प्रकोप में रहा। गर्म कपड़ों से ढके होने के बाद भी लोग कांपते दिखे। किसी ने अलाव तापकर राहत पाई तो कोई पूरे दिन घर में रजाई के अंदर दुबका रहा। मौसम के अचानक से इस बदले मिजाज ने सबकी चिंता बढ़ा दी है। हाड़कंपाती इस ठंड के आगे लोग बेबस नजर आए।
गुरुवार को अधिकतम तापमान 19 व न्यूनतम तापमान 10 डिग्री रिकार्ड किया गया। पिछले एक पखवाड़ा से ठंड का असर कम हो रहा था। सुबह और शाम ठंड से लोगों को दिन में चटख धूप के चलते राहत मिल रही थी। गणतंत्र दिवस और फिर मौनी अमावस्या बीतने के बाद लोग अनुमान लगा रहे थे कि अब ठंड जाने लगी है।
इस बीच रविवार को अचानक से मौसम ने करवट ली। सर्द हवाओं से गलन में इजाफा हुआ। लोग दिन भर कांपते रहे। हाड़कंपाती ठंड के आगे मानो सूर्य देव ने भी हथियार डाल दिए हों। दिन भर लोग ठंड से राहत पाने के लिए छटपटाते रहे। गनीमत रही कि रविवार को छुट्टी का दिन था। ऑफिस व अन्य काम से बाहर निकलने की जल्दी नहीं थी। लिहाजा लोग दोपहर तक घरों में ही दुबके रहे।
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इसके बाद बाहर भी आए तो गर्म कपड़ों से पूरी तरह ढके हुए थे। जगह-जगह अलाव तापकर लोग राहत पाने की कोशिश करते दिखे। प्रशासनिक स्तर पर ठंड से बचाव के इंतजाम न होने से राहगीरों व निचले तबके के लोगों ने सड़क पर बिखरे पत्ते व लकड़ियां जलाकर ही काम चलाया। कुल मिलाकर ठंड के इस असर से हर तबका बेहाल दिखा। अचानक से इस बदलाव को लेकर चर्चाएं भी रही।
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गुरुवार को अधिकतम तापमान 19 व न्यूनतम तापमान 10 डिग्री रिकार्ड किया गया। पिछले एक पखवाड़ा से ठंड का असर कम हो रहा था। सुबह और शाम ठंड से लोगों को दिन में चटख धूप के चलते राहत मिल रही थी। गणतंत्र दिवस और फिर मौनी अमावस्या बीतने के बाद लोग अनुमान लगा रहे थे कि अब ठंड जाने लगी है।
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इस बीच रविवार को अचानक से मौसम ने करवट ली। सर्द हवाओं से गलन में इजाफा हुआ। लोग दिन भर कांपते रहे। हाड़कंपाती ठंड के आगे मानो सूर्य देव ने भी हथियार डाल दिए हों। दिन भर लोग ठंड से राहत पाने के लिए छटपटाते रहे। गनीमत रही कि रविवार को छुट्टी का दिन था। ऑफिस व अन्य काम से बाहर निकलने की जल्दी नहीं थी। लिहाजा लोग दोपहर तक घरों में ही दुबके रहे।
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इसके बाद बाहर भी आए तो गर्म कपड़ों से पूरी तरह ढके हुए थे। जगह-जगह अलाव तापकर लोग राहत पाने की कोशिश करते दिखे। प्रशासनिक स्तर पर ठंड से बचाव के इंतजाम न होने से राहगीरों व निचले तबके के लोगों ने सड़क पर बिखरे पत्ते व लकड़ियां जलाकर ही काम चलाया। कुल मिलाकर ठंड के इस असर से हर तबका बेहाल दिखा। अचानक से इस बदलाव को लेकर चर्चाएं भी रही।