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गांव में खुले जन सुविधा केंद्रों पर रहेगी पैनी नजर
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गांव में खुले जन सुविधा केंद्रों पर रहेगी पैनी नजर
ई-डिस्ट्रिक्ट कार्यालय में अपडेट होंगे गांव के जनसेवा केंद्र
जनसुविधा केंद्र की शुरू हुई जियो टैगिंग, प्रदेश स्तर से होगी मॉनिटरिंग
स्थान कहीं, केंद्र खुले हैं कहीं और, नहीं मिल पा रही सुविधा
संवाद न्यूज एजेंसी
सिद्धार्थनगर। ग्रामीण क्षेत्र के लोगों की सहूलियत के लिए गांवों में खोले गए जनसुविधा केंद्र (सीएससी) पर पैनी नजर रहेगी। शासन की ओर से सीधे मॉनीटरिंग की जा रही है। संचालन हो रहा है कि नहीं, यह जानने के लिए जियो टैगिंग की जा रही है। अगर अपने स्थान पर केंद्र नहीं मिला तो मान्यता रद्द की जा सकती है। साथ ही ग्रामीणों को दी जाने वाली सुविधाओं की जानकारी भी देनी होगी।
गांवों में रहने वालों को आय, जाति, निवास प्रमाणपत्र बनवाने के लिए दूर नहीं जाना पड़े। इसके ग्राम पंचायत स्तर पर सेवा केंद्र खोले गए हैं। वहां आवेदन के बाद आसानी से उनके प्रमाणपत्र बन जाएंगे। लोग डिजिटल माध्यम से फीस जमा कर सकेंगे। साथ ही सरकारी योजनाओं का लाभ भी तत्काल उठा सकेंगे।
लेकिन, सरकार की यह मंशा गांव में सफल होती नजर नहीं आ रही है। कागज में केंद्र कहीं चल रहा है और खुला कहीं और है। ऐसे में जरूरत पड़ने पर लोगों को आज भी चौराहों, तहसील का चक्कर लगना पड़ता है। इसमें समय की बर्बादी के साथ ही रुपये भी खर्च हो रहे हैं। इस तरह की मनमानी रोकने के लिए केंद्रों पर नजर रखी जा रही है। कौन निष्क्रिय है और कौन कहां चल रहा है, इसकी सटीक जानकारी के लिए शासन स्तर से जियो टैगिंग की जा रही है।
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फीडबैक लिया जा रहा है कि कौन से केंद्र कार्य कर रहे हैं और कौन कागज में संचालित हो रहे हैं या फिर गांव के बजाए दूसरे स्थान पर संचालित किया जा रहा है, जिससे आम जनता को लाभ नहीं मिल पा रहा है। अगर जानकारी में ऐसा मिला तो केंद्र की मान्यता चली जाएगी। वहीं, माह में हुए कार्य का भी ब्योरा समय-समय पर मांगा जाएगा।
जनपद की 1136 ग्राम पंचायतों में हैं जनसुविधा केंद्र
ई-डिस्ट्रिक्ट कार्यालय के आंकड़ों के मुताबिक, लगभग 30 लाख की आबादी वाले जिले की 1136 ग्राम पंचायतों में जनसेवा केंद्र खोले गए हैं। ये कार्य भी कर रहे हैं। सभी ई-डिस्ट्रिक्ट कार्यालय से संचालित होते हैं। इसमें शासन स्तर से नौ सौ से अधिक जनसेवा केंद्रों को जियो टैग करके मॉनीटरिंग शुरू कर दी गई है। गांव स्तर पर लोगों को ऑनलाइन सुविधा मुहैया कराना, डिजिटल माध्यम से धन की निकासी आदि कराना इसका उद्देश्य है।
डिजिटल को बढ़ावा देना उद्देश्य
इन केंद्रों को डिजिटल पेमेंट को बढ़ावा देने के लिए भीम एप से जोड़ा गया है। इसके साथ आय, जाति, निवास प्रमाणपत्र आदि का शुल्क प्रति आवेदन 30 रुपये निर्धारित है। ई-डिस्ट्रिक्ट पोर्टल से 36 विभागों की 267 योजनाओं को जनसुविधा केंद्रों से जोड़ा गया है, जिससे गांव में ही ऑनलाइन आवेदन करके योजनाओं का लाभ उठाया जा सके।
गांव में खुले जनसुविधा केंद्र की जिम्मेदारी तय की गई है। ई-डिस्ट्रिक्ट कार्यालय से लेकर प्रदेश स्तर तक मॉनीटरिंग हो रही है। सभी की जियो टैगिंग का कार्य चल रहा है, जो अंतिम चरण में है। शासन से मॉनीटरिंग की जाएगी। साथ ही निरीक्षण करके देखा जाएगा कि कहां काम हो रहा है और कौन केंद्र बंद है। मान्यता कहां के लिए मिली है और संचालित कहां पर हो रहा है। इसको भी देखा जाएगा। -अमरेंद्र कुमार दुबे, ई-डिस्ट्रिक्ट मैनेजर सिद्धार्थनगर
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ई-डिस्ट्रिक्ट कार्यालय में अपडेट होंगे गांव के जनसेवा केंद्र
जनसुविधा केंद्र की शुरू हुई जियो टैगिंग, प्रदेश स्तर से होगी मॉनिटरिंग
स्थान कहीं, केंद्र खुले हैं कहीं और, नहीं मिल पा रही सुविधा
संवाद न्यूज एजेंसी
सिद्धार्थनगर। ग्रामीण क्षेत्र के लोगों की सहूलियत के लिए गांवों में खोले गए जनसुविधा केंद्र (सीएससी) पर पैनी नजर रहेगी। शासन की ओर से सीधे मॉनीटरिंग की जा रही है। संचालन हो रहा है कि नहीं, यह जानने के लिए जियो टैगिंग की जा रही है। अगर अपने स्थान पर केंद्र नहीं मिला तो मान्यता रद्द की जा सकती है। साथ ही ग्रामीणों को दी जाने वाली सुविधाओं की जानकारी भी देनी होगी।
गांवों में रहने वालों को आय, जाति, निवास प्रमाणपत्र बनवाने के लिए दूर नहीं जाना पड़े। इसके ग्राम पंचायत स्तर पर सेवा केंद्र खोले गए हैं। वहां आवेदन के बाद आसानी से उनके प्रमाणपत्र बन जाएंगे। लोग डिजिटल माध्यम से फीस जमा कर सकेंगे। साथ ही सरकारी योजनाओं का लाभ भी तत्काल उठा सकेंगे।
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लेकिन, सरकार की यह मंशा गांव में सफल होती नजर नहीं आ रही है। कागज में केंद्र कहीं चल रहा है और खुला कहीं और है। ऐसे में जरूरत पड़ने पर लोगों को आज भी चौराहों, तहसील का चक्कर लगना पड़ता है। इसमें समय की बर्बादी के साथ ही रुपये भी खर्च हो रहे हैं। इस तरह की मनमानी रोकने के लिए केंद्रों पर नजर रखी जा रही है। कौन निष्क्रिय है और कौन कहां चल रहा है, इसकी सटीक जानकारी के लिए शासन स्तर से जियो टैगिंग की जा रही है।
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फीडबैक लिया जा रहा है कि कौन से केंद्र कार्य कर रहे हैं और कौन कागज में संचालित हो रहे हैं या फिर गांव के बजाए दूसरे स्थान पर संचालित किया जा रहा है, जिससे आम जनता को लाभ नहीं मिल पा रहा है। अगर जानकारी में ऐसा मिला तो केंद्र की मान्यता चली जाएगी। वहीं, माह में हुए कार्य का भी ब्योरा समय-समय पर मांगा जाएगा।
जनपद की 1136 ग्राम पंचायतों में हैं जनसुविधा केंद्र
ई-डिस्ट्रिक्ट कार्यालय के आंकड़ों के मुताबिक, लगभग 30 लाख की आबादी वाले जिले की 1136 ग्राम पंचायतों में जनसेवा केंद्र खोले गए हैं। ये कार्य भी कर रहे हैं। सभी ई-डिस्ट्रिक्ट कार्यालय से संचालित होते हैं। इसमें शासन स्तर से नौ सौ से अधिक जनसेवा केंद्रों को जियो टैग करके मॉनीटरिंग शुरू कर दी गई है। गांव स्तर पर लोगों को ऑनलाइन सुविधा मुहैया कराना, डिजिटल माध्यम से धन की निकासी आदि कराना इसका उद्देश्य है।
डिजिटल को बढ़ावा देना उद्देश्य
इन केंद्रों को डिजिटल पेमेंट को बढ़ावा देने के लिए भीम एप से जोड़ा गया है। इसके साथ आय, जाति, निवास प्रमाणपत्र आदि का शुल्क प्रति आवेदन 30 रुपये निर्धारित है। ई-डिस्ट्रिक्ट पोर्टल से 36 विभागों की 267 योजनाओं को जनसुविधा केंद्रों से जोड़ा गया है, जिससे गांव में ही ऑनलाइन आवेदन करके योजनाओं का लाभ उठाया जा सके।
गांव में खुले जनसुविधा केंद्र की जिम्मेदारी तय की गई है। ई-डिस्ट्रिक्ट कार्यालय से लेकर प्रदेश स्तर तक मॉनीटरिंग हो रही है। सभी की जियो टैगिंग का कार्य चल रहा है, जो अंतिम चरण में है। शासन से मॉनीटरिंग की जाएगी। साथ ही निरीक्षण करके देखा जाएगा कि कहां काम हो रहा है और कौन केंद्र बंद है। मान्यता कहां के लिए मिली है और संचालित कहां पर हो रहा है। इसको भी देखा जाएगा। -अमरेंद्र कुमार दुबे, ई-डिस्ट्रिक्ट मैनेजर सिद्धार्थनगर