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अमनचैन और भाईचारे का पैगाम देता है इस्लाम : मौलाना आसिफ
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डुमरियागंज क्षेत्र के हल्लौर में मोहर्रम की पहली तारीख पर मजलिस को संबोधित करते हुए मौलाना आसिफ
- मोहर्रम की पहली तारीख पर डुमरियागंज के हल्लौर कस्बे में आयोजित हुई मरसिया मजलिस
संवाद न्यूज एजेंसी
डुमरियागंज। डुमरियागंज तहसील क्षेत्र के शिया बाहुल्य कस्बा हल्लौर में मोहर्रम की पहली तारीख पर सोमवार को शोगवारों की मरसिया मजलिस आयोजित की गई। इसमें नौहा मातम करके हजरत इमाम हुसैन और कर्बला के शहीदों को याद किया।
हल्लौर में मोहर्रम को लेकर रविवार की रात से ही मरसिया मजलिस शुरू हो गई। अशरे की मजलिसें दस दिनों तक आशूरा 17 जुलाई तक चलेंगी। सोमवार की रात हल्लौर स्थित इमामबाड़ा वक्फ शाह आलमगीर सानी, इमामबाड़ा हुसैनिया बाबुल, नैय्यर रजा मरहूम के आवास, दरगाह हजरत अब्बास, शकील हैदर लेखपाल, फहीम हैदर, ताकीब रिजवी, सबीह हैदर लेखपाल तथा मरहूम बशीर हैदर रिटायर्ड ड्राफ्टमैन के घरों पर मरसिया मजलिस हुई।
इसमें हैदरे कर्रार, शाहिद आलम, अंबर मेहंदी, सरवर मेहंदी तथा मजलिस को मौलाना आसिफ रजा, अजीम हैदर रिजवी, जमाल हैदर, काजिम करबलाई, जानशीन अहमद साबिर ने खिताब करते हुए हजरत इमाम हुसैन व कर्बला के शहीदों का मसायब बयान किया, जिसे सुनकर मौजूद शोगवार हाय हुसैन, हाय कर्बला वालों की सदाएं बुलंद कर रोने लगे।
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मजलिस को मौलाना आसिफ रजा ने कहा कि इस्लाम अमनचैन और मोहब्बत का पैगाम देता है। साथ ही लोगों को आपसी भाईचारे के साथ मिलजुलकर रहने का संदेश भी देता है। उन्होंने कहा कि नवासे रसूल हजरत इमाम हुसैन व उनके साथियों व परिजनों ने कर्बला में हक, इंसाफ तथा इस्लाम की हिफाजत के लिए अपनी जान की कुर्बानी दी।
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सज गया मोहर्रम पर सद्दा अलम
हर साल की तरह इस साल भी मोहर्रम की चांद रात पर रविवार को हल्लौर स्थित इमामबाड़ा हुसैनिया बाबुल में मोहर्रम आने का प्रतीक सद्दा पूरी अकीदत के साथ सजाकर नौहा मातम किया गया। इसके बाद मजलिस हुई। इसमें काजिम करबलाई ने बयान कर हजरत इमाम हुसैन की शहादत को बयां किया, सरजा रिजवी ने नौहा पढ़ा।
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संवाद न्यूज एजेंसी
डुमरियागंज। डुमरियागंज तहसील क्षेत्र के शिया बाहुल्य कस्बा हल्लौर में मोहर्रम की पहली तारीख पर सोमवार को शोगवारों की मरसिया मजलिस आयोजित की गई। इसमें नौहा मातम करके हजरत इमाम हुसैन और कर्बला के शहीदों को याद किया।
हल्लौर में मोहर्रम को लेकर रविवार की रात से ही मरसिया मजलिस शुरू हो गई। अशरे की मजलिसें दस दिनों तक आशूरा 17 जुलाई तक चलेंगी। सोमवार की रात हल्लौर स्थित इमामबाड़ा वक्फ शाह आलमगीर सानी, इमामबाड़ा हुसैनिया बाबुल, नैय्यर रजा मरहूम के आवास, दरगाह हजरत अब्बास, शकील हैदर लेखपाल, फहीम हैदर, ताकीब रिजवी, सबीह हैदर लेखपाल तथा मरहूम बशीर हैदर रिटायर्ड ड्राफ्टमैन के घरों पर मरसिया मजलिस हुई।
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इसमें हैदरे कर्रार, शाहिद आलम, अंबर मेहंदी, सरवर मेहंदी तथा मजलिस को मौलाना आसिफ रजा, अजीम हैदर रिजवी, जमाल हैदर, काजिम करबलाई, जानशीन अहमद साबिर ने खिताब करते हुए हजरत इमाम हुसैन व कर्बला के शहीदों का मसायब बयान किया, जिसे सुनकर मौजूद शोगवार हाय हुसैन, हाय कर्बला वालों की सदाएं बुलंद कर रोने लगे।
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मजलिस को मौलाना आसिफ रजा ने कहा कि इस्लाम अमनचैन और मोहब्बत का पैगाम देता है। साथ ही लोगों को आपसी भाईचारे के साथ मिलजुलकर रहने का संदेश भी देता है। उन्होंने कहा कि नवासे रसूल हजरत इमाम हुसैन व उनके साथियों व परिजनों ने कर्बला में हक, इंसाफ तथा इस्लाम की हिफाजत के लिए अपनी जान की कुर्बानी दी।
सज गया मोहर्रम पर सद्दा अलम
हर साल की तरह इस साल भी मोहर्रम की चांद रात पर रविवार को हल्लौर स्थित इमामबाड़ा हुसैनिया बाबुल में मोहर्रम आने का प्रतीक सद्दा पूरी अकीदत के साथ सजाकर नौहा मातम किया गया। इसके बाद मजलिस हुई। इसमें काजिम करबलाई ने बयान कर हजरत इमाम हुसैन की शहादत को बयां किया, सरजा रिजवी ने नौहा पढ़ा।