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Siddharthnagar News: दो वर्षों में पांच सौ महिलाओं ने डीएल बनवाने में दिखाई दिलचस्पी
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एआरटीओ कार्यालय। संवाद
संवाद न्यूज एजेंसी
सिद्धार्थनगर। महिलाओं में वाहन खरीदने और चलाने का शौक बढ़ रहा है, लेकिन वे ड्राइविंग लाइसेंस बनवाने में अधिक रुचि नहीं दिखा रहीं।
इससे दो वर्षों में जिले में बने 50253 लाइसेंस में मात्र 527 लाइसेंस ही महिलाओं के नाम हैं। इससे महिलाओं में लाइसेंस नहीं बनवाने की रुचि दिखाई दे रही है। जबकि पुरुषों की तरह महिलाएं भी वाहन चलाने का शौक रख रही हैं।
गाड़ी चलाना व उससे चलना महिला व पुरुष दोनों को पसंद है। हर वर्ष वाहनों की खरीदारी भी हो रही है। जो आंकड़ा प्रतिवर्ष बढ़ता जा रहा है। लेकिन वाहन खरीदने के बाद लाइसेंस बनवाने में महिलाओं की रुचि कम दिखाई दे रही है।
एआरटीओ कार्यालय से मिले आंकड़ों के अनुसार जिले में हर वर्ष बन रहे ड्राइविंग लाइसेंस में मात्र एक प्रतिशत महिलाओं ने साझेदारी दिखाई है।
जबकि शहर से लेकर गांव तक युवतियां, दफ्तर जाने वाली महिलाएं वाहन चलाते हुए दिखाई देती हैं। ऐसे में यदि इन महिलाओं से किसी भी प्रकार का हादसा होता है तो उसका जिम्मेदार कोई नहीं होगा।
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जबकि एआरटीओ कार्यालय में लाइसेंस बनवाने आने वाली महिलाओं को लाइसेंस बनवाने की पूरी प्रक्रिया भी समझाई जाती है। उसके बाद भी महिलाएं लाइसेंस बनवाने में रुचि नहीं दिखा रही हैं। जबकि जिले में दो वर्षों में 67107 वाहनों का पंजीकरण किया गया है। वहीं 50253 लोगों ने लाइसेंस बनवाया है। इसमें मात्र 527 महिलाओं ने अपनी भागीदारी दिखाई है।
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सिद्धार्थनगर। महिलाओं में वाहन खरीदने और चलाने का शौक बढ़ रहा है, लेकिन वे ड्राइविंग लाइसेंस बनवाने में अधिक रुचि नहीं दिखा रहीं।
इससे दो वर्षों में जिले में बने 50253 लाइसेंस में मात्र 527 लाइसेंस ही महिलाओं के नाम हैं। इससे महिलाओं में लाइसेंस नहीं बनवाने की रुचि दिखाई दे रही है। जबकि पुरुषों की तरह महिलाएं भी वाहन चलाने का शौक रख रही हैं।
गाड़ी चलाना व उससे चलना महिला व पुरुष दोनों को पसंद है। हर वर्ष वाहनों की खरीदारी भी हो रही है। जो आंकड़ा प्रतिवर्ष बढ़ता जा रहा है। लेकिन वाहन खरीदने के बाद लाइसेंस बनवाने में महिलाओं की रुचि कम दिखाई दे रही है।
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एआरटीओ कार्यालय से मिले आंकड़ों के अनुसार जिले में हर वर्ष बन रहे ड्राइविंग लाइसेंस में मात्र एक प्रतिशत महिलाओं ने साझेदारी दिखाई है।
जबकि शहर से लेकर गांव तक युवतियां, दफ्तर जाने वाली महिलाएं वाहन चलाते हुए दिखाई देती हैं। ऐसे में यदि इन महिलाओं से किसी भी प्रकार का हादसा होता है तो उसका जिम्मेदार कोई नहीं होगा।
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जबकि एआरटीओ कार्यालय में लाइसेंस बनवाने आने वाली महिलाओं को लाइसेंस बनवाने की पूरी प्रक्रिया भी समझाई जाती है। उसके बाद भी महिलाएं लाइसेंस बनवाने में रुचि नहीं दिखा रही हैं। जबकि जिले में दो वर्षों में 67107 वाहनों का पंजीकरण किया गया है। वहीं 50253 लोगों ने लाइसेंस बनवाया है। इसमें मात्र 527 महिलाओं ने अपनी भागीदारी दिखाई है।