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हल्लौर कस्बे में अकीदतमंदों ने किया मातम
हल्लौर के दरगाह हजरत अब्बास प्रांगण में मातम करते अकीदतमंद।
- फोटो : SIDDHARTHNAGAR
हल्लौर कस्बे में अकीदतमंदों ने किया मातम
डुमरियागंज। हजरत इमाम हुसैन की लाडली बेटी सकीना की शहादत की याद में रविवार की रात हल्लौर कस्बा स्थित रौजे से अलम ताबूत का जुलूस निकालकर अकीदतमंदों ने देर रात तक नौहा मातम किया।
हल्लौर कस्बा स्थित सकीना के रौजे से रविवार की रात 11 बजे अलम ताबूत का मातमी जुलूस नायाब हैदर रिजवी की देखरेख में निकाला गया। जुलूस रौजे हजरत अली असगर, इमामबाड़ा हुसैनिया बाबुल, बड़ा इमामबाड़ा कला, दरगाह हजरत अब्बास होते हुए वापस रौजे पर आकर समाप्त हो गया। इस बीच शाहिद आलम, सावन हल्लौरी, नफीस हल्लौरी, हसन जमाल, नायाब हैदर, अरमान आरजू, लकी, मुमताज, आले रजा, फैजी कामयाब, शानू आदि ने जनाबे सकीना की शहादत को बयां करने वाला नौहा पढ़ा।
अकीदतमंदों ने मातम किया। अंत में मरसिया मजलिस आयोजित हुई, जिसे शाहिद आलम और जाकिर जमाल हैदर रिजवी ने संबोधित कर सकीना पर यजीदी लश्कर की ओर से ढाए गए जुल्म तथा जिंदाने शाम के कैदखाने में हुई शहादत के मंजर को बयां किया। पूरा माहौल गमगीन बना रहा।
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डुमरियागंज। हजरत इमाम हुसैन की लाडली बेटी सकीना की शहादत की याद में रविवार की रात हल्लौर कस्बा स्थित रौजे से अलम ताबूत का जुलूस निकालकर अकीदतमंदों ने देर रात तक नौहा मातम किया।
हल्लौर कस्बा स्थित सकीना के रौजे से रविवार की रात 11 बजे अलम ताबूत का मातमी जुलूस नायाब हैदर रिजवी की देखरेख में निकाला गया। जुलूस रौजे हजरत अली असगर, इमामबाड़ा हुसैनिया बाबुल, बड़ा इमामबाड़ा कला, दरगाह हजरत अब्बास होते हुए वापस रौजे पर आकर समाप्त हो गया। इस बीच शाहिद आलम, सावन हल्लौरी, नफीस हल्लौरी, हसन जमाल, नायाब हैदर, अरमान आरजू, लकी, मुमताज, आले रजा, फैजी कामयाब, शानू आदि ने जनाबे सकीना की शहादत को बयां करने वाला नौहा पढ़ा।
अकीदतमंदों ने मातम किया। अंत में मरसिया मजलिस आयोजित हुई, जिसे शाहिद आलम और जाकिर जमाल हैदर रिजवी ने संबोधित कर सकीना पर यजीदी लश्कर की ओर से ढाए गए जुल्म तथा जिंदाने शाम के कैदखाने में हुई शहादत के मंजर को बयां किया। पूरा माहौल गमगीन बना रहा।