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Siddharthnagar News: 800 मीटर तक अवैध..फिर वैध होता है लहसुन
Thu, 19 Dec 2024 11:05 PM IST
गोरखपुर ब्यूरो
संवाद न्यूज एजेंसी, सिद्धार्थनगर
संवाद न्यूज एजेंसी, सिद्धार्थनगर
Updated Thu, 19 Dec 2024 11:05 PM IST
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बढ़नी एसएसबी के गिरफ्त में चाइनीज लहसुन के साथ आरोपी। स्रोत फाइल फोटो
श्याम सुंदर तिवारी /अतुल शुक्ल
सिद्धार्थनगर। बॉर्डर सुरक्षा एजेंसी की तस्करी रोकने की जिम्मेदारी नेपाल सीमा से 800 मीटर तक सीमित है। जैसे ही सरहद के बीच का 800 मीटर एरिया पार किया जांच-पड़ताल न होने से सारा माल वैध हो जाता है। यही कारण है कि तस्करी पर अंकुश नहीं लग पा रहा है। चीन से आने वाले लहसुन में भी यही हो रहा है।
सूत्र बताते हैं कि सीमापार होने के बाद बड़े बाजार में भेजने के लिए लहसुन गोदाम में डंप होता है, बोरी बदली जाती है। इसके बाद उसे बाजार में उतारा जाता है। इसमें दो प्रकार से काम होता है। छोटे धंधेबाज दुकानों पर बेचते हैं और तस्कर थोक में बस्ती से लेकर लखनऊ तक भेज रहे हैं। तस्करी के इस खेल में पूरा सिस्टम काम कर रहा है। धंधेबाजों के साथ कैरियर, दुकान, किराए पर मकान देने वाले और कुछ सिस्टम में बैठे लोग हैं।
सीमावर्ती क्षेत्र के लोगों ने बताया कि खुनुवां और बढ़नी का इलाका लहसुन की तस्करी के लिए सुरक्षित है। इस रुट पर दिन में बाइक, साइकिल और पैदल झोला और बोरी में तस्करी होती है और रात में पिकअप को निकाला जाता है। लहसुन की महंगाई ऐसे ही रही तो चार माह में चार से पांच करोड़ रुपये का लहसुन बार्डर पार हो जाएगा। आने वाले दिनों में लोगों की सेहत पर इसका असर दिखने लगेगा।
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बॉर्डर के बाद जांच हो तो पकड़ में आए मामला : सीमावर्ती क्षेत्र में लहसुन का कारोबार करने वाले मुनाफाखोर इसलिए सफल हैं कि बार्डर पर पकड़े जाने से माल बच गया तो वह वैध हो गया। उसे गोदाम पर लाते हैं। बढ़नी और खुनुवां क्षेत्र के कुछ आढ़तियां हैं, जो गोदाम ले रखे हैं। लहसुन को वहीं पर रखते हैं। इसके बाद जिस दिन जिस जनपद में बाजार लगता है, वहां पिकअप पर लोड करके भेजते हैं।
बढ़नी से उठने वाला लहसुन, गोंडा, बहराइच और बाराबंकी के साथ लखनऊ की बड़ी मंडी और मॉल व किराना की दुकान पर पहुंचाते हैं। किराना की दुकान और मटन बनाने वाले खरीद लेते हैं।
खुनुवां और अन्य कुछ हिस्सों से उठने वाले लहसुन जिले के अलावा संतकबीरनगर, बस्ती और फैजाबाद की मंडी में बिकता है। जबकि, महराजगंज से तस्करी के जरिए आने वाला लहसुन गोरखपुर मंडी के साथ कुशीनगर, देवरिया और और संतकबीनगर के कुछ हिस्से तक जाता है।
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सिद्धार्थनगर। बॉर्डर सुरक्षा एजेंसी की तस्करी रोकने की जिम्मेदारी नेपाल सीमा से 800 मीटर तक सीमित है। जैसे ही सरहद के बीच का 800 मीटर एरिया पार किया जांच-पड़ताल न होने से सारा माल वैध हो जाता है। यही कारण है कि तस्करी पर अंकुश नहीं लग पा रहा है। चीन से आने वाले लहसुन में भी यही हो रहा है।
सूत्र बताते हैं कि सीमापार होने के बाद बड़े बाजार में भेजने के लिए लहसुन गोदाम में डंप होता है, बोरी बदली जाती है। इसके बाद उसे बाजार में उतारा जाता है। इसमें दो प्रकार से काम होता है। छोटे धंधेबाज दुकानों पर बेचते हैं और तस्कर थोक में बस्ती से लेकर लखनऊ तक भेज रहे हैं। तस्करी के इस खेल में पूरा सिस्टम काम कर रहा है। धंधेबाजों के साथ कैरियर, दुकान, किराए पर मकान देने वाले और कुछ सिस्टम में बैठे लोग हैं।
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सीमावर्ती क्षेत्र के लोगों ने बताया कि खुनुवां और बढ़नी का इलाका लहसुन की तस्करी के लिए सुरक्षित है। इस रुट पर दिन में बाइक, साइकिल और पैदल झोला और बोरी में तस्करी होती है और रात में पिकअप को निकाला जाता है। लहसुन की महंगाई ऐसे ही रही तो चार माह में चार से पांच करोड़ रुपये का लहसुन बार्डर पार हो जाएगा। आने वाले दिनों में लोगों की सेहत पर इसका असर दिखने लगेगा।
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बॉर्डर के बाद जांच हो तो पकड़ में आए मामला : सीमावर्ती क्षेत्र में लहसुन का कारोबार करने वाले मुनाफाखोर इसलिए सफल हैं कि बार्डर पर पकड़े जाने से माल बच गया तो वह वैध हो गया। उसे गोदाम पर लाते हैं। बढ़नी और खुनुवां क्षेत्र के कुछ आढ़तियां हैं, जो गोदाम ले रखे हैं। लहसुन को वहीं पर रखते हैं। इसके बाद जिस दिन जिस जनपद में बाजार लगता है, वहां पिकअप पर लोड करके भेजते हैं।
बढ़नी से उठने वाला लहसुन, गोंडा, बहराइच और बाराबंकी के साथ लखनऊ की बड़ी मंडी और मॉल व किराना की दुकान पर पहुंचाते हैं। किराना की दुकान और मटन बनाने वाले खरीद लेते हैं।
खुनुवां और अन्य कुछ हिस्सों से उठने वाले लहसुन जिले के अलावा संतकबीरनगर, बस्ती और फैजाबाद की मंडी में बिकता है। जबकि, महराजगंज से तस्करी के जरिए आने वाला लहसुन गोरखपुर मंडी के साथ कुशीनगर, देवरिया और और संतकबीनगर के कुछ हिस्से तक जाता है।